31 जुलाई 2026
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खंडवा में 11 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन: टापू पर फंसे 4 युवक सुरक्षित, SDRF-होमगार्ड की 30 जवानों की टीम ने बचाया

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खंडवा में 11 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन: टापू पर फंसे 4 युवक सुरक्षित, SDRF-होमगार्ड की 30 जवानों की टीम ने बचाया

सारांश

खंडवा में बारिश के बीच नदी के उफान से टापू पर फंसे 4 युवकों को बचाने के लिए 11 घंटे चला संयुक्त अभियान — ड्रोन से लाइफ जैकेट, फोन पर लगातार संपर्क, और 30 से अधिक जवानों की टीम। मानसून में बहु-एजेंसी समन्वय की यह मिसाल राहत देने वाली है।

मुख्य बातें

31 जुलाई 2026 को खंडवा जिले के जावर थाना क्षेत्र में 4 युवक नदी के टापू पर फंस गए।
शाम 6:15 बजे सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ, जो 11 घंटे तक चला।
ड्रोन के जरिए युवकों तक लाइफ जैकेट, खाना और पानी पहुंचाया गया; मोबाइल फोन से लगातार संपर्क बना रहा।
इंदौर एसडीआरएफ, खंडवा एसडीआरएफ, होमगार्ड, गोताखोर और जिला प्रशासन समेत 30 से अधिक जवान तैनात रहे।
सुबह जलस्तर घटने पर नाव के जरिए टापू तक पहुंचकर चारों को सुरक्षित निकाला गया।
एसडीआरएफ कमांडेंट आशीष कुशवाह ने बहु-एजेंसी समन्वय को सफलता का मुख्य कारण बताया।

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में 31 जुलाई 2026 को बारिश के बीच नदी के तेज बहाव में टापू पर फंसे 4 युवकों को एसडीआरएफ, होमगार्ड और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने करीब 11 घंटे के लंबे अभियान के बाद सुरक्षित निकाल लिया। जावर थाना क्षेत्र में हुई यह घटना मानसून के दौरान नदियों के अचानक उफान से उत्पन्न खतरों की एक और गंभीर मिसाल बनकर सामने आई।

कैसे फंसे युवक

चारों युवक गुरुवार शाम घूमने के उद्देश्य से जावर थाना क्षेत्र की नदी के पास गए थे। इसी दौरान अचानक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और बहाव इतना तीव्र हो गया कि वे टापू पर फंसकर रह गए और वापस नहीं लौट सके। शाम करीब 6:15 बजे कंट्रोल रूम को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद बचाव अभियान तत्काल शुरू किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

सूचना मिलते ही खंडवा एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। कंपनी कमांडर ने घटनास्थल का जायजा लिया, लेकिन नदी का बहाव इतना तेज था कि शुरुआती प्रयासों में नाव और रस्सियों के जरिए युवकों तक पहुंचना संभव नहीं हो पाया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तरीय कमांड सेंटर से संपर्क किया गया और इंदौर एसडीआरएफ की टीम को भी तत्काल बुलाया गया। इसके साथ ही एनडीआरएफ से भी समन्वय स्थापित किया गया।

जिला प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट की संभावना को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पूरी स्थिति से अवगत कराया।

ड्रोन से पहुंची मदद, फोन ने बचाई जान

राहत की बात यह रही कि चारों युवकों के पास मोबाइल फोन थे, जिससे रेस्क्यू टीम का उनसे लगातार संपर्क बना रहा। एसडीआरएफ ने ड्रोन की सहायता से युवकों तक लाइफ जैकेट, खाने के पैकेट और पानी पहुंचाया। फोन पर उन्हें लाइफ जैकेट सही तरीके से पहनने का तरीका भी समझाया गया। टीम लगातार नदी के जलस्तर और बहाव पर नज़र बनाए रही।

सुबह हुई सफल वापसी

एसडीआरएफ कमांडेंट आशीष कुशवाह ने बताया कि सुबह के समय जलस्तर और बहाव में कुछ कमी आने पर बचाव दल नाव के जरिए टापू तक पहुंचने में सफल रहा और चारों युवकों को सुरक्षित किनारे तक लाया गया। सूचना मिलने से लेकर सफल रेस्क्यू तक पूरे अभियान में साढ़े 10 से 11 घंटे का समय लगा।

30 से अधिक जवानों की संयुक्त टीम

कमांडेंट आशीष कुशवाह के अनुसार इस अभियान में इंदौर एसडीआरएफ की पाँच सदस्यीय टीम, खंडवा एसडीआरएफ, होमगार्ड, गोताखोर और जिला प्रशासन समेत 30 से अधिक जवान शामिल रहे। सभी एजेंसियों के बेहतर समन्वय और संयुक्त प्रयास ने इस कठिन अभियान को सफल बनाया। यह ऑपरेशन मानसून के दौरान बहु-एजेंसी समन्वय की अहमियत को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल को भी उठाता है जो हर मानसून में दोहराया जाता है — नदियों के किनारे और जलभराव क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही पर रोक के बावजूद ऐसी घटनाएँ क्यों नहीं रुकतीं। ड्रोन और मोबाइल संपर्क ने इस बार जान बचाई, लेकिन हर बार ऐसी तकनीकी उपलब्धता की गारंटी नहीं होती। मध्य प्रदेश में मानसून के दौरान नदी-क्षेत्रों में प्रवेश की सख्त निगरानी और जन-जागरूकता अभियान की ज़रूरत इस घटना से एक बार फिर स्पष्ट होती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खंडवा में टापू पर कौन फंसा था और कब?
31 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के जावर थाना क्षेत्र में 4 युवक घूमने गए थे, जहाँ अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से वे एक टापू पर फंस गए। शाम करीब 6:15 बजे कंट्रोल रूम को इसकी सूचना मिली।
रेस्क्यू ऑपरेशन में कितना समय लगा और कौन शामिल था?
पूरे ऑपरेशन में साढ़े 10 से 11 घंटे का समय लगा। इसमें इंदौर एसडीआरएफ, खंडवा एसडीआरएफ, होमगार्ड, गोताखोर और जिला प्रशासन समेत 30 से अधिक जवान शामिल रहे।
युवकों को टापू पर फंसे रहने के दौरान कैसे मदद मिली?
चारों युवकों के पास मोबाइल फोन होने से रेस्क्यू टीम का उनसे लगातार संपर्क बना रहा। एसडीआरएफ ने ड्रोन के जरिए उन तक लाइफ जैकेट, खाने के पैकेट और पानी पहुंचाया, और फोन पर लाइफ जैकेट पहनने का तरीका भी बताया।
युवकों को आखिरकार कैसे बचाया गया?
सुबह के समय नदी का जलस्तर और बहाव कुछ कम होने पर बचाव दल नाव के जरिए टापू तक पहुंचने में सफल रहा और चारों युवकों को सुरक्षित किनारे पर लाया गया।
क्या एयरलिफ्ट की भी तैयारी थी?
हाँ, जिला प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट की संभावना को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पूरी स्थिति से अवगत कराया था। हालाँकि अंततः नाव के जरिए ही सफल रेस्क्यू हो गया।
राष्ट्र प्रेस
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