पोखरण में ड्रोनाथॉन-2026 शुरू: वायुसेना ने लॉन्च किया UAS रोडमैप, 'वायु उत्तम' का रियल-टाइम प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना ने 14 सितंबर 2026 को पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में देश के पहले ड्रोनाथॉन-2026 का आगाज़ किया — एक तीन दिवसीय आयोजन जिसमें स्वदेशी मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) की युद्धक विश्वसनीयता को वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में परखा जा रहा है। वायुसेना उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन किया और इस अवसर पर भारतीय वायुसेना UAS रोडमैप भी जारी किया।
आयोजन का दायरा और प्रतिभागी
ड्रोनाथॉन-2026 में 20 से अधिक प्रमुख रक्षा कंपनियाँ, स्टार्टअप, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम (MSME), रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और स्वतंत्र नवोन्मेषक भाग ले रहे हैं। पोखरण की कठिन भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियाँ इस आयोजन को प्रयोगशाला-परीक्षण से कहीं आगे ले जाती हैं — यहाँ प्रणालियों की थर्मल सहनशीलता, संचार स्थायित्व और स्वायत्त निर्णय-क्षमता की वास्तविक जाँच होती है।
समारोह में रक्षा मंत्रालय, मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ, भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे — जो इस आयोजन के बहु-सेवा महत्व को रेखांकित करता है।
किन क्षमताओं की हो रही है जाँच
वायुसेना के अनुसार ड्रोनाथॉन में निगरानी और टोह, स्वायत्त संचालन, ड्रोन झुंड तकनीक (Swarm Technology), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इंजन व प्रणोदन प्रणाली, उन्नत सेंसर, पेलोड एकीकरण, संचार तंत्र और हवाई क्षेत्र प्रबंधन — सभी को इस मूल्यांकन के दायरे में रखा गया है।
गौरतलब है कि वायुसेना का लक्ष्य केवल नई तकनीक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि यह आकलन करना है कि ये प्रणालियाँ बदलती परिचालन ज़रूरतों और उभरते खतरों के अनुसार कितनी तेज़ी से खुद को ढाल सकती हैं।
'वायु उत्तम' — स्वदेशी ट्रैफिक मैनेजमेंट की बड़ी छलांग
ड्रोनाथॉन के पहले दिन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही स्वदेशी रूप से विकसित मल्टी-मोड मानवरहित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम 'वायु उत्तम' का रियल-टाइम प्रदर्शन। पोखरण में हुए इस प्रदर्शन के दौरान 'वायु उत्तम' ने सैन्य और नागरिक — दोनों श्रेणियों के मानवरहित हवाई तंत्रों का एक साथ पता लगाया और उन्हें ट्रैक किया।
यह प्रणाली तेज़ी से भीड़भाड़ वाले हवाई क्षेत्र में विभिन्न UAS अभियानों के समन्वित प्रबंधन के लिए बनाई गई है। इसके अतिरिक्त यह अनधिकृत या नियंत्रण से बाहर हो चुके ड्रोन की पहचान कर समय पर उनसे निपटने में सहायता कर सकती है। वायुसेना के अनुसार, 'वायु उत्तम' का संभावित उपयोग केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं — हवाई क्षेत्र सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की रक्षा, नागरिक विमानन और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी इसकी प्रासंगिकता देखी जा रही है।
UAS रोडमैप: उद्योग को स्पष्ट दिशा
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित द्वारा जारी भारतीय वायुसेना UAS रोडमैप का उद्देश्य उद्योग, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान संगठनों को वायुसेना की भविष्य की प्राथमिकताओं से अवगत कराना है, ताकि वे अपने नवाचार प्रयासों को सटीक दिशा दे सकें। यह ऐसे समय में आया है जब मानवरहित प्रणालियाँ मानवयुक्त विमानों की महत्वपूर्ण सहयोगी क्षमता के रूप में उभर रही हैं — अभियानों की पहुँच, दीर्घकालिक संचालन और परिचालन लचीलेपन को नई ऊँचाई देते हुए।
आगे की राह
यह तीन दिवसीय आयोजन 16 सितंबर 2026 तक चलेगा। ड्रोनाथॉन-2026 भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है — जहाँ स्वदेशी कंपनियों को वास्तविक परीक्षण का मंच मिल रहा है और वायुसेना को भविष्य की ज़रूरतों के अनुरूप साझेदार।