राजनाथ सिंह ने 16 डीपीएसयू की समीक्षा की, पाँच साल का रक्षा रोडमैप तैयार करने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित रक्षा सार्वजनिक उपक्रम भवन में देश के सभी 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) के वार्षिक प्रदर्शन की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने इन उपक्रमों को अगले पाँच वर्षों के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया, जो बदलती सुरक्षा चुनौतियों और भविष्य की रक्षा ज़रूरतों के अनुरूप हो।
समीक्षा बैठक का मुख्य एजेंडा
मंगलवार को आयोजित इस बैठक में रक्षा उत्पादन को सुदृढ़ करना, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास, नवाचार को बढ़ावा देना और रक्षा निर्यात में तेज़ी लाना — ये चार प्रमुख बिंदु केंद्र में रहे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ सिंह ने सभी 16 डीपीएसयू के प्रदर्शन और अब तक की प्रगति का विस्तार से जायज़ा लिया तथा रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन में उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि डीपीएसयू देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को मज़बूत करने और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही उन्होंने इन उपक्रमों को अपनी उत्पादन क्षमता, तकनीकी दक्षता और अनुसंधान एवं विकास को निरंतर बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया।
स्वदेशी तकनीक और नवाचार पर ज़ोर
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता रेखांकित की। उनका ज़ोर ऐसी अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियाँ और तकनीक विकसित करने पर रहा, जो भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन ज़रूरतों के अनुरूप हों और विदेशी तकनीक पर निर्भरता को घटाएँ।
उन्होंने डीपीएसयू से नई तकनीकों को अपनाने, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने तथा बदलते युद्ध-परिदृश्य और सुरक्षा वातावरण के अनुसार अपनी क्षमताओं में आवश्यक बदलाव लाने का आह्वान किया। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियाँ, ड्रोन, साइबर क्षमताएँ और उन्नत हथियार प्रणालियाँ आधुनिक युद्ध की धुरी बनती जा रही हैं।
रक्षा निर्यात बढ़ाने का आह्वान
रक्षा मंत्री ने रक्षा निर्यात को विस्तार देने पर विशेष बल दिया। डीपीएसयू से कहा गया कि वे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय रक्षा उत्पादों की पहुँच बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धी और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद विकसित करें। गौरतलब है कि भारत का रक्षा निर्यात हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है और डीपीएसयू की इसमें निर्णायक भूमिका मानी जा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि 'डिफेंस पीएसयू का रूपांतरण केवल आर्थिक या औद्योगिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता है।' रक्षा मंत्रालय के अनुसार, डीपीएसयू बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली और क्षमताओं में व्यापक बदलाव ला रहे हैं, जिससे वे न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की ज़रूरतें देश में ही पूरी कर सकेंगे, बल्कि वैश्विक रक्षा बाज़ार में भी भारत की मज़बूत उपस्थिति सुनिश्चित कर सकेंगे।
आगे की राह
इस समीक्षा बैठक का व्यापक उद्देश्य डीपीएसयू को भविष्य की रक्षा ज़रूरतों के लिए अधिक सक्षम, तकनीकी रूप से उन्नत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी तकनीक पर बढ़ते ज़ोर और निर्यात क्षमता के विस्तार से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई मज़बूती मिलेगी।