दीपावली पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अपील: ग्रीन पटाखों का सीमित उपयोग करें
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 7 नवंबर 2026 को दिल्लीवासियों से आग्रह किया कि वे इस दीपावली पर पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए केवल ग्रीन पटाखों का सीमित मात्रा में उपयोग करें, ताकि राष्ट्रीय राजधानी में वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली का निर्माण सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विधानसभा अध्यक्ष का संदेश
विजेंद्र गुप्ता ने समस्त दिल्लीवासियों को दीपावली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा, 'दीपावली प्रकाश, खुशी, सद्भाव और सकारात्मकता का त्योहार है। यह लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करता है और समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव के मूल्यों को मजबूत करता है।' उन्होंने नागरिकों से यह भी कहा, 'आइए, इस दीपावली को खुशियों के दीप जलाकर, अपने पर्यावरण की रक्षा करके और एक स्वच्छ, स्वस्थ तथा प्रदूषण मुक्त दिल्ली बनाने के लिए मिलकर काम करके मनाएं।'
उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किया गया एक छोटा-सा व्यक्तिगत प्रयास भी बड़ा सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम है। गौरतलब है कि दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रत्येक वर्ष वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता है, जिससे दीपावली के आसपास पटाखों पर प्रतिबंध या सीमाएँ एक संवेदनशील विषय बन जाता है।
भाई परमानंद की आत्मकथा का नया संस्करण जारी
इसी अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष गुप्ता ने क्रांतिकारी और गदर पार्टी के नेता भाई परमानंद (1876–1947) की आत्मकथा 'मेरी आपबीती: कालापानी की कारावास कहानी' का नया संस्करण जारी किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक 'केवल सेलुलर जेल में सहे गए कष्टों का विवरण नहीं है, बल्कि यह उस देशभक्ति, बलिदान और अदम्य साहस की एक सशक्त याद दिलाती है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को आकार दिया।'
यह पुस्तक भाई परमानंद की 150वीं जयंती के अवसर पर जारी की गई। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में इस किताब का जिक्र करते हुए युवाओं से इसे पढ़ने की अपील की थी।
भाई परमानंद: एक ऐतिहासिक परिचय
भाई परमानंद का जन्म 1876 में झेलम जिले (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य, आर्य समाज के प्रभावशाली नेता और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक प्रमुख आवाज़ थे। 1915 के पहले लाहौर षड्यंत्र मामले में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया।
उन्हें अंडमान द्वीप समूह की सेलुलर जेल भेजा गया, जहाँ उन्होंने लगभग पाँच वर्षों तक कैद काटी और राजनीतिक कैदियों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के विरोध में लंबी भूख हड़ताल की। महात्मा गांधी ने 19 नवंबर 1919 को 'यंग इंडिया' में उनके साथ हुए इस बर्ताव की निंदा करते हुए उनकी रिहाई की माँग की।
20 अप्रैल 1920 को रिहा होने के पश्चात परमानंद ने लाहौर के नेशनल कॉलेज में इतिहास पढ़ाया, जहाँ क्रांतिकारी भगत सिंह और सुखदेव भी उनके छात्रों में थे।
आम जनता पर असर और आगे की राह
विधानसभा अध्यक्ष ने इस अवसर पर उपस्थित इतिहासकारों, आर्य समाज के प्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी देश की सामूहिक स्मृति को संजोने के लिए ऐसे ऐतिहासिक वृत्तांतों को नई पीढ़ियों तक पहुँचाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि परमानंद जैसे क्रांतिकारियों के अनुभव भारत की आज़ादी के पीछे छिपे कष्टों और व्यक्तिगत बलिदानों को समझने का महत्वपूर्ण नज़रिया प्रदान करते हैं।
इस दीपावली पर गुप्ता की दोहरी अपील — पर्यावरण संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की — दिल्ली के नागरिकों के लिए एक सामूहिक दायित्व की याद दिलाती है, जो उत्सव और जागरूकता को एक साथ जोड़ती है।