7 नवंबर 2026
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दीपावली पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अपील: ग्रीन पटाखों का सीमित उपयोग करें

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दीपावली पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अपील: ग्रीन पटाखों का सीमित उपयोग करें

सारांश

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस दीपावली पर दो संदेश एक साथ दिए — ग्रीन पटाखों के सीमित उपयोग से प्रदूषण मुक्त दिल्ली बनाने की अपील, और भाई परमानंद की 150वीं जयंती पर उनकी ऐतिहासिक आत्मकथा का नया संस्करण जारी करके नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जोड़ने का प्रयास।

मुख्य बातें

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 7 नवंबर 2026 को दीपावली पर ग्रीन पटाखों के सीमित उपयोग की अपील की।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ व स्वस्थ दिल्ली बनाना हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
क्रांतिकारी भाई परमानंद (1876–1947) की आत्मकथा 'मेरी आपबीती: कालापानी की कारावास कहानी' का नया संस्करण उनकी 150वीं जयंती पर जारी किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में इस पुस्तक का उल्लेख किया था।
भाई परमानंद के छात्रों में क्रांतिकारी भगत सिंह और सुखदेव शामिल थे।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 7 नवंबर 2026 को दिल्लीवासियों से आग्रह किया कि वे इस दीपावली पर पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए केवल ग्रीन पटाखों का सीमित मात्रा में उपयोग करें, ताकि राष्ट्रीय राजधानी में वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली का निर्माण सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

विधानसभा अध्यक्ष का संदेश

विजेंद्र गुप्ता ने समस्त दिल्लीवासियों को दीपावली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा, 'दीपावली प्रकाश, खुशी, सद्भाव और सकारात्मकता का त्योहार है। यह लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करता है और समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव के मूल्यों को मजबूत करता है।' उन्होंने नागरिकों से यह भी कहा, 'आइए, इस दीपावली को खुशियों के दीप जलाकर, अपने पर्यावरण की रक्षा करके और एक स्वच्छ, स्वस्थ तथा प्रदूषण मुक्त दिल्ली बनाने के लिए मिलकर काम करके मनाएं।'

उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किया गया एक छोटा-सा व्यक्तिगत प्रयास भी बड़ा सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम है। गौरतलब है कि दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रत्येक वर्ष वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता है, जिससे दीपावली के आसपास पटाखों पर प्रतिबंध या सीमाएँ एक संवेदनशील विषय बन जाता है।

भाई परमानंद की आत्मकथा का नया संस्करण जारी

इसी अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष गुप्ता ने क्रांतिकारी और गदर पार्टी के नेता भाई परमानंद (1876–1947) की आत्मकथा 'मेरी आपबीती: कालापानी की कारावास कहानी' का नया संस्करण जारी किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक 'केवल सेलुलर जेल में सहे गए कष्टों का विवरण नहीं है, बल्कि यह उस देशभक्ति, बलिदान और अदम्य साहस की एक सशक्त याद दिलाती है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को आकार दिया।'

यह पुस्तक भाई परमानंद की 150वीं जयंती के अवसर पर जारी की गई। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में इस किताब का जिक्र करते हुए युवाओं से इसे पढ़ने की अपील की थी।

भाई परमानंद: एक ऐतिहासिक परिचय

भाई परमानंद का जन्म 1876 में झेलम जिले (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य, आर्य समाज के प्रभावशाली नेता और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक प्रमुख आवाज़ थे। 1915 के पहले लाहौर षड्यंत्र मामले में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया।

उन्हें अंडमान द्वीप समूह की सेलुलर जेल भेजा गया, जहाँ उन्होंने लगभग पाँच वर्षों तक कैद काटी और राजनीतिक कैदियों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के विरोध में लंबी भूख हड़ताल की। महात्मा गांधी ने 19 नवंबर 1919 को 'यंग इंडिया' में उनके साथ हुए इस बर्ताव की निंदा करते हुए उनकी रिहाई की माँग की।

20 अप्रैल 1920 को रिहा होने के पश्चात परमानंद ने लाहौर के नेशनल कॉलेज में इतिहास पढ़ाया, जहाँ क्रांतिकारी भगत सिंह और सुखदेव भी उनके छात्रों में थे।

आम जनता पर असर और आगे की राह

विधानसभा अध्यक्ष ने इस अवसर पर उपस्थित इतिहासकारों, आर्य समाज के प्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी देश की सामूहिक स्मृति को संजोने के लिए ऐसे ऐतिहासिक वृत्तांतों को नई पीढ़ियों तक पहुँचाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि परमानंद जैसे क्रांतिकारियों के अनुभव भारत की आज़ादी के पीछे छिपे कष्टों और व्यक्तिगत बलिदानों को समझने का महत्वपूर्ण नज़रिया प्रदान करते हैं।

इस दीपावली पर गुप्ता की दोहरी अपील — पर्यावरण संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की — दिल्ली के नागरिकों के लिए एक सामूहिक दायित्व की याद दिलाती है, जो उत्सव और जागरूकता को एक साथ जोड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब सर्दियों में AQI नियमित रूप से 400 के पार जाता है। उल्लेखनीय यह भी है कि इस बार अपील के साथ भाई परमानंद की आत्मकथा के विमोचन को जोड़ना, उत्सव और ऐतिहासिक विमर्श को एकसाथ साधने का प्रयास है — जो प्रधानमंत्री के 'मन की बात' संदर्भ से स्वाभाविक रूप से जुड़ता है। असली परीक्षा नागरिक जागरूकता और नीतिगत अनुपालन तंत्र की होगी, न कि महज प्रतीकात्मक संदेशों की।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजेंद्र गुप्ता ने दीपावली पर क्या अपील की?
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 7 नवंबर 2026 को दिल्लीवासियों से अपील की कि वे केवल ग्रीन पटाखों का सीमित मात्रा में उपयोग करें और वायु व ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सचेत प्रयास करें। उन्होंने कहा कि स्वच्छ दिल्ली बनाना हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
भाई परमानंद की आत्मकथा किसने और क्यों जारी की?
भाई परमानंद (1876–1947) की आत्मकथा 'मेरी आपबीती: कालापानी की कारावास कहानी' का नया संस्करण दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर जारी किया। यह पुस्तक सेलुलर जेल में बिताए कठोर जीवन और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान का विवरण देती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भाई परमानंद की पुस्तक का जिक्र कब किया था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में इस किताब का उल्लेख करते हुए युवाओं से इसे पढ़ने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि इससे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को बेहतर समझा जा सकता है।
भाई परमानंद कौन थे और उनका स्वतंत्रता संग्राम में क्या योगदान था?
भाई परमानंद गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य, आर्य समाज के प्रभावशाली नेता और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक प्रमुख क्रांतिकारी थे। 1915 के लाहौर षड्यंत्र मामले में उन्हें मृत्युदंड मिला जो बाद में आजीवन कारावास में बदला और उन्होंने अंडमान की सेलुलर जेल में पाँच वर्ष बिताए। रिहाई के बाद उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज में भगत सिंह और सुखदेव जैसे छात्रों को इतिहास पढ़ाया।
दिल्ली में दीपावली पर पटाखों के उपयोग को लेकर क्या नियम हैं?
राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए अधिकारियों द्वारा दीपावली के दौरान केवल ग्रीन पटाखों के सीमित उपयोग की अनुमति दी जाती है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भी नागरिकों से इसी दिशा में सचेत प्रयास करने का आह्वान किया है।
राष्ट्र प्रेस
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