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गेहूं खरीद में किसानों की समस्याओं पर कमलनाथ का हमला, MP सरकार से मांगी माफी

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गेहूं खरीद में किसानों की समस्याओं पर कमलनाथ का हमला, MP सरकार से मांगी माफी

सारांश

मध्य प्रदेश में गेहूं MSP खरीद को लेकर सियासी घमासान: कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर किसानों से छल का आरोप लगाया। 19 लाख पंजीकृत किसानों में से सिर्फ 7 लाख को स्लॉट मिला। CM मोहन यादव ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 9 मई तक बढ़ाई।

मुख्य बातें

19 लाख किसानों ने MP में MSP पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया, लेकिन 23 अप्रैल तक सिर्फ 7 लाख को स्लॉट मिल पाया।
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार ने गन्नी बैग की कमी का बहाना बनाकर खरीद करीब एक महीने टाल दी।
सैटेलाइट सर्वे के आधार पर छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग रद्द की गई, जिससे किसान बिचौलियों को सस्ते दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हुए।
CM मोहन यादव ने घोषणा की कि गेहूं खरीद अब सप्ताह में 6 दिन होगी और स्लॉट बुकिंग की तिथि 9 मई तक बढ़ाई गई।
कमलनाथ ने 2,700 रुपए प्रति क्विंटल MSP का वादा पूरा न करने के लिए सरकार से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की।
MP में पिछले साल 2.45 करोड़ टन गेहूं उत्पादन के मुकाबले सरकार का खरीद लक्ष्य केवल 1 करोड़ टन है।

भोपाल, 24 अप्रैल: मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया को लेकर बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने जानबूझकर किसानों के लिए बाधाएं खड़ी कीं, जिससे लाखों किसान एमएसपी का लाभ नहीं उठा पाए और मजबूरी में अपना गेहूं बिचौलियों को सस्ते दामों पर बेचना पड़ा।

किसानों के साथ क्या हुआ — पूरा घटनाक्रम

केंद्र सरकार ने हाल ही में मध्य प्रदेश को MSP पर 1 करोड़ टन गेहूं खरीदने की अनुमति दी। लेकिन कमलनाथ के अनुसार, राज्य सरकार ने शुरुआत में गन्नी बैग (बोरियों) की कमी का बहाना बनाकर खरीद प्रक्रिया करीब एक महीने तक टाल दी।

इस देरी का सबसे बड़ा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ा, जो भंडारण की सुविधा न होने के कारण अपनी फसल रोक नहीं सके और बिचौलियों को कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो गए।

जब खरीद शुरू हुई, तब सैटेलाइट सर्वे के आधार पर कई छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग रद्द कर दी गई। किसान हैरान थे कि खेत में फसल होने के बावजूद उनकी उपज खरीदी क्यों नहीं जा रही।

आंकड़े जो सरकार की विफलता उजागर करते हैं

कमलनाथ ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 23 अप्रैल तक 19 लाख किसानों ने MSP पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया, लेकिन इनमें से केवल लगभग 7 लाख किसान ही स्लॉट बुक करने में सफल रहे। यानी 12 लाख से अधिक किसान अभी भी प्रतीक्षा में हैं।

उन्होंने सरकार की उस नीति पर भी सवाल उठाया जिसमें पहले 5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का गेहूं खरीदने का प्रावधान किया गया। कमलनाथ ने इसे सोची-समझी रणनीति बताया क्योंकि अधिकांश छोटे किसान पहले ही अपनी उपज बेच चुके हैं — जिससे कुल सरकारी खरीद की मात्रा स्वाभाविक रूप से कम हो जाएगी।

उन्होंने 1 करोड़ टन के खरीद लक्ष्य को भी दिखावा करार दिया। उनका तर्क था कि जब पिछले वर्ष प्रदेश में 2.45 करोड़ टन गेहूं उत्पादन हुआ और इस वर्ष उससे भी अधिक उत्पादन का दावा किया जा रहा है, तो केवल 1 करोड़ टन खरीदने का लक्ष्य किसानों के साथ न्याय नहीं है।

कमलनाथ की तीन प्रमुख मांगें

कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर मध्य प्रदेश सरकार से तीन स्पष्ट मांगें रखीं:

पहली — स्लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। दूसरी — किसानों से अधिकतम मात्रा में खरीद सुनिश्चित की जाए। तीसरी — 2,700 रुपए प्रति क्विंटल MSP का वादा पूरा न कर पाने के लिए सरकार किसानों से सार्वजनिक माफी मांगे।

उन्होंने चेतावनी दी कि किसान सरकार की इन चालों को भली-भांति समझ चुके हैं और इन नीतियों के खिलाफ चुप नहीं रहेंगे।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का जवाब

विपक्ष के हमले के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में घोषणा की कि अब गेहूं खरीद सप्ताह में छह दिन होगी और शनिवार को कोई अवकाश नहीं रहेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि अब 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है और जरूरत पड़ने पर इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार का दृढ़ संकल्प है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और राज्य सरकार हर स्थिति में किसानों के साथ खड़ी है।"

गहरा विश्लेषण: किसे फायदा, किसे नुकसान?

यह विवाद केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है — इसके पीछे एक बड़ा आर्थिक समीकरण छिपा है। जब सरकारी खरीद में देरी होती है, तो सबसे पहले आढ़तिए और बिचौलिए सक्रिय हो जाते हैं जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर MSP से कम कीमत पर अनाज खरीद लेते हैं।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 2023 और 2024 में भी गेहूं खरीद के दौरान इसी तरह की शिकायतें आई थीं। यह पहली बार नहीं है कि स्लॉट बुकिंग सिस्टम और सैटेलाइट सर्वे को लेकर किसान परेशान हुए हों।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो पंजाब और हरियाणा में गेहूं MSP खरीद की प्रक्रिया अधिक सुचारू मानी जाती है क्योंकि वहां मंडी इन्फ्रास्ट्रक्चर अधिक विकसित है और डिजिटल बुकिंग में तकनीकी बाधाएं कम आती हैं।

आगामी मध्य प्रदेश नगरीय निकाय चुनावों और ग्रामीण राजनीति के संदर्भ में यह मुद्दा कांग्रेस के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है। किसान वोटबैंक को साधने की कोशिश में दोनों दल आमने-सामने हैं।

अब नजरें 9 मई की बढ़ी हुई स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि पर टिकी हैं — यदि इस दौरान भी तकनीकी समस्याएं बनी रहीं, तो सरकार के लिए राजनीतिक संकट और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है जो हर साल किसानों को बिचौलियों के हाथों लुटवाती है। विडंबना यह है कि जो सरकार किसान-हितैषी होने का दावा करती है, उसी के कार्यकाल में 12 लाख से अधिक पंजीकृत किसान स्लॉट तक नहीं पा सके। सैटेलाइट सर्वे और डिजिटल बुकिंग जैसी आधुनिक तकनीकें, जो किसानों की सुविधा के लिए बनाई गई थीं, उल्टे उनके लिए बाधा बन गईं। असली सवाल यह है कि क्या 9 मई की नई डेडलाइन महज राजनीतिक दबाव से जन्मी एक और घोषणा है, या इस बार सरकार वास्तव में जमीन पर बदलाव लाएगी?
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में गेहूं MSP खरीद में क्या समस्या आ रही है?
मध्य प्रदेश में गेहूं MSP खरीद में स्लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे से जुड़ी तकनीकी बाधाएं सामने आई हैं। 19 लाख पंजीकृत किसानों में से केवल करीब 7 लाख ही स्लॉट बुक कर पाए, बाकी किसान बिचौलियों को सस्ते दाम पर अनाज बेचने को मजबूर हुए।
कमलनाथ ने MP सरकार से क्या मांगें रखी हैं?
कमलनाथ ने तीन मांगें रखी हैं — स्लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे की समस्याओं का समाधान, किसानों से अधिकतम खरीद सुनिश्चित करना, और 2,700 रुपए प्रति क्विंटल MSP का वादा पूरा न करने के लिए सार्वजनिक माफी मांगना।
MP में गेहूं स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि क्या है?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई 2025 कर दी है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है।
मध्य प्रदेश में इस साल कितने गेहूं खरीद का लक्ष्य है?
केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को MSP पर 1 करोड़ टन गेहूं खरीदने की अनुमति दी है। हालांकि, कमलनाथ ने इस लक्ष्य को अपर्याप्त बताया क्योंकि पिछले साल राज्य में 2.45 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ था।
गेहूं MSP पर किसानों को स्लॉट बुकिंग में दिक्कत क्यों हो रही है?
सैटेलाइट सर्वे के आधार पर कई किसानों की स्लॉट बुकिंग रद्द कर दी गई, भले ही उनके खेतों में फसल मौजूद थी। इसके अलावा गन्नी बैग की कमी और तकनीकी खामियों के कारण भी खरीद प्रक्रिया में बाधाएं आईं।
राष्ट्र प्रेस
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