3 सितंबर 2026
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राजस्थान में खाद संकट: गहलोत का आरोप — ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम से किसान परेशान, MP को जा रही सप्लाई

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राजस्थान में खाद संकट: गहलोत का आरोप — ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम से किसान परेशान, MP को जा रही सप्लाई

सारांश

राजस्थान में खाद का डिजिटल सिस्टम किसानों के लिए राहत नहीं, मुसीबत बन गया है। गहलोत का आरोप — सर्वर डाउन, लंबी लाइनें और खाली हाथ लौटते किसान। साथ ही सवाल यह भी कि राजस्थान की खाद MP क्यों जा रही है।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 3 सितंबर 2026 को राजस्थान की भाजपा सरकार पर खाद संकट को लेकर तीखा हमला बोला।
गहलोत का आरोप — FFS ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम में तकनीकी खराबी और सर्वर डाउन होने से किसान घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ लौट रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राजस्थान की खाद सप्लाई मध्य प्रदेश भेजी जा रही है, जिससे स्थानीय किसान वंचित हो रहे हैं।
कृषि विभाग के सहायक निदेशक राजेश विजय ने तकनीकी समस्याओं को स्वीकार किया, लेकिन इसे नए ऐप से जुड़ी अस्थायी खामी बताया।
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से सीधे जवाब माँगा कि किसानों की परेशानी कब खत्म होगी।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने 3 सितंबर 2026 को राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि नया ऑनलाइन खाद बुकिंग सिस्टम किसानों की समस्याएँ सुलझाने के बजाय उन्हें और अधिक परेशान कर रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजस्थान के किसानों का वाजिब खाद हिस्सा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश भेजा जा रहा है।

क्या है विवाद का केंद्र

राजस्थान सरकार ने 'फर्टिलाइजर सेल्स फ्रेमवर्क' (FFS) के तहत एक डिजिटल खाद बुकिंग प्रणाली लागू की है, जिसका उद्देश्य किसानों को खाद की उपलब्धता ऑनलाइन देखने और डिजिटल रूप से बुकिंग करने की सुविधा देना है। सरकार का दावा है कि यह सिस्टम वितरण को अधिक पारदर्शी बनाएगा, स्टॉक की निगरानी में मदद करेगा और सब्सिडी वाली खाद सही लाभार्थियों तक पहुँचाएगा।

हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ज़मीनी हकीकत इस दावे से बिल्कुल उलट है। गहलोत के अनुसार, तकनीकी खराबी, सर्वर डाउन होने और लंबी कतारों के चलते किसानों को खाद लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, और कई किसान अंत में खाली हाथ लौट रहे हैं।

गहलोत के आरोप

गहलोत ने कहा, 'भाजपा सरकार का नया ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम खाद उपलब्ध कराने के बजाय किसानों को परेशान करने का ज़रिया बन गया है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजस्थान के किसानों को उनका वाजिब हिस्सा नहीं मिल रहा, जबकि खाद की सप्लाई मध्य प्रदेश भेजी जा रही है।

कांग्रेस नेता ने भाजपा के 'डबल-इंजन' शासन मॉडल पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह मॉडल राजस्थान के किसानों तक पर्याप्त खाद पहुँचाने में विफल साबित हुआ है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से सवाल किया: 'कृपया जवाब दें कि किसानों को कब तक यह परेशानी झेलनी पड़ेगी?'

सरकार की प्रतिक्रिया

जयपुर में कृषि विभाग के सहायक निदेशक राजेश विजय ने स्वीकार किया कि तकनीकी समस्याएँ हैं, लेकिन इसे अस्थायी बताया। उन्होंने कहा कि एक नया ऐप शुरू किया गया है और इन तकनीकी खामियों को दूर करने पर काम जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब रबी सीज़न की बुवाई से पहले खाद की माँग अपने चरम पर होती है।

आम किसानों पर असर

गौरतलब है कि राजस्थान एक कृषि-प्रधान राज्य है जहाँ लाखों किसान खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए सरकारी खाद वितरण प्रणाली पर निर्भर हैं। डिजिटल प्रणाली में खामियाँ उन किसानों के लिए विशेष रूप से कठिन हैं जो दूरदराज के इलाकों में रहते हैं या जिनके पास स्मार्टफोन और इंटरनेट की सुविधा सीमित है। यदि बुवाई के मौसम में समय पर खाद नहीं मिली, तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस ने इस मुद्दे को विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर उठाने के संकेत दिए हैं। सरकार पर दबाव बढ़ने के साथ, कृषि विभाग को तकनीकी खामियाँ दूर करने और वितरण प्रणाली को सुचारु बनाने की ज़िम्मेदारी निभानी होगी। यह विवाद राजस्थान में कृषि नीति और डिजिटल गवर्नेंस की सीमाओं पर बड़े सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि डिजिटल गवर्नेंस की उस बुनियादी चुनौती का प्रतीक है जो ग्रामीण भारत में बार-बार सामने आती है — जब नीति शहरी इंटरनेट की गति से बनती है और ज़मीन पर उतरती है गाँव की धीमी कनेक्टिविटी पर। FFS जैसी प्रणालियाँ पारदर्शिता के लिए ज़रूरी हैं, लेकिन बिना मज़बूत डिजिटल बुनियादी ढाँचे और ऑफलाइन विकल्प के इन्हें लागू करना किसानों को नई मुसीबत में डालता है। खाद सप्लाई के MP डायवर्जन का आरोप, अगर सही है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं — यह नीतिगत प्राथमिकता का सवाल है। सरकार को तकनीकी सुधार के साथ-साथ इन आरोपों की पारदर्शी जाँच भी करनी चाहिए।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में ऑनलाइन खाद बुकिंग सिस्टम क्या है और इसमें क्या समस्या है?
राजस्थान सरकार ने 'फर्टिलाइजर सेल्स फ्रेमवर्क' (FFS) के तहत एक डिजिटल प्रणाली शुरू की है, जिससे किसान खाद की उपलब्धता देख सकते हैं और ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। आलोचकों के अनुसार, सर्वर डाउन होने और तकनीकी खराबी के कारण किसानों को घंटों इंतजार के बाद भी खाद नहीं मिल रही।
अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
गहलोत ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम किसानों की मदद करने के बजाय उन्हें परेशान कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान के किसानों का वाजिब खाद हिस्सा मध्य प्रदेश भेजा जा रहा है और भाजपा का 'डबल-इंजन' मॉडल इस संकट को हल करने में विफल रहा है।
राजस्थान सरकार ने खाद संकट पर क्या कहा?
कृषि विभाग के सहायक निदेशक राजेश विजय ने माना कि तकनीकी समस्याएँ हैं, लेकिन इन्हें नए ऐप से जुड़ी अस्थायी खामी बताया। उन्होंने कहा कि विभाग इन समस्याओं को दूर करने पर काम कर रहा है।
इस खाद संकट से राजस्थान के किसानों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि बुवाई के मौसम में समय पर खाद नहीं मिली, तो फसल उत्पादन पर सीधा नकारात्मक असर पड़ सकता है। विशेष रूप से दूरदराज के किसान, जिनके पास स्मार्टफोन और इंटरनेट सुविधा सीमित है, इस डिजिटल प्रणाली की खामियों से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
FFS प्रणाली का उद्देश्य क्या था?
सरकार ने FFS प्रणाली इसलिए शुरू की थी ताकि खाद वितरण में पारदर्शिता आए, स्टॉक की निगरानी हो सके और सब्सिडी वाली खाद सही लाभार्थियों तक पहुँचे। हालाँकि, क्रियान्वयन में तकनीकी खामियों ने इसके उद्देश्य को कमज़ोर किया है।
राष्ट्र प्रेस
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