वसीम अकरम बोले: 'भारत-पाकिस्तान मैच सिर्फ एक खेल है, बदले की भावना 1970 के दशक की सोच'
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के पूर्व महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने क्रिकेट प्रेमियों से अपील की है कि भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबलों को राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि खेल की भावना से देखा जाए। '1 मिनट' पॉडकास्ट पर बात करते हुए अकरम ने कहा कि इस प्रतिद्वंद्विता में दशकों पुरानी कड़वाहट घोलना न खिलाड़ियों के लिए उचित है, न समर्थकों के लिए।
मुख्य बात: 'यह सिर्फ एक मैच है'
अकरम ने पॉडकास्ट पर सीधे शब्दों में कहा, 'लोगों के पास बहुत समय है। वे क्यों नहीं समझते? यह बस एक खेल है। आखिरकार, यह सिर्फ एक मैच है। किसी को जीतना है, किसी को हारना है। फिर अगले मैच की ओर बढ़ना है। मगर नहीं, जो बहुत पहले हुआ था, वह अभी भी लोगों के मन में है। बदला लेने जैसी बातें 1970 के दशक की हैं।' उन्होंने इस मानसिकता को पुरानी कहावत 'खाली दिमाग शैतान का घर होता है' से जोड़ा।
इरफान पठान से दोस्ती और मतभेद
अकरम ने भारत के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान के साथ अपने दीर्घकालिक संबंध का भी जिक्र किया। दोनों की पहली मुलाकात 2004 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान हुई थी, जब पठान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना रहे थे।
अकरम ने कहा, 'इरफान 2004 में ऑस्ट्रेलिया के अपने पहले दौरे पर मुझसे मिले थे। मैं कमेंट्री कर रहा था। वह मेरे बहुत बड़े फैन थे। हमें खेलते हुए देखकर ही बड़े हुए थे। मैंने उन्हें कुछ टिप्स दिए थे।' उन्होंने यह भी बताया कि पठान का बॉलिंग एक्शन शुरू से ही उनसे मिलता-जुलता था, और उस स्तर पर पहुँचे खिलाड़ियों को तकनीक से ज्यादा माइंडसेट पर सलाह दी जाती है।
सोशल मीडिया पर असहमति, सम्मान बरकरार
अकरम ने स्वीकार किया कि पठान की सोशल मीडिया गतिविधियों से वे हमेशा सहमत नहीं रहे। उन्होंने कहा, 'यह अलग बात है कि वह पाकिस्तान के खिलाफ कुछ न कुछ सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहते हैं। हालांकि, हमारे फैन भी तैयार रहते हैं। वे भी नजरअंदाज नहीं करते।' इसके बावजूद अकरम ने जोर दिया कि अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है और इससे आपसी सम्मान कम नहीं होता।
पठान और अकरम: एक समानांतर करियर
इरफान पठान ने 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। बाएँ हाथ की तेज गेंदबाजी, नई गेंद को स्विंग कराने की क्षमता और बॉलिंग एक्शन में समानता के कारण उनके शुरुआती वर्षों में उनकी तुलना अकरम से होना स्वाभाविक था। गौरतलब है कि पठान ने जल्द ही भारत के सबसे होनहार ऑलराउंडरों में अपनी जगह पक्की कर ली।
विशेषज्ञ का नजरिया: खेल को खेल रहने दें
अकरम की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत-पाकिस्तान मुकाबले हमेशा सोशल मीडिया पर तीखी बहस का केंद्र बनते हैं। क्रिकेट इतिहास के सबसे धारदार तेज गेंदबाजों में शुमार अकरम का मानना है कि इस प्रतिद्वंद्विता की असली खूबसूरती मैदान पर है — मैदान के बाहर की कड़वाहट में नहीं। आने वाले टूर्नामेंटों में दोनों देशों के भिड़ने की संभावना को देखते हुए उनकी यह अपील और भी प्रासंगिक हो जाती है।