3 सितंबर 2026
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राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्त अधिवक्ता मदन मोहन पांडे बोले — श्रद्धालुओं की सुविधा रहेगी पहली प्राथमिकता

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राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्त अधिवक्ता मदन मोहन पांडे बोले — श्रद्धालुओं की सुविधा रहेगी पहली प्राथमिकता

सारांश

दशकों तक राम जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले अधिवक्ता मदन मोहन पांडे अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य बन गए हैं। 1994 से इस मामले से जुड़े पांडे ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ देना होगी।

मुख्य बातें

अधिवक्ता मदन मोहन पांडे को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य नियुक्त किया गया।
पांडे ने 1994 में महंत परमहंस रामचंद्र दास की ओर से राम जन्मभूमि मामले में औपचारिक वकालतनामा दाखिल किया था।
उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय तक रामलला और महंत परमहंस दास दोनों पक्षों की पैरवी की।
नई ज़िम्मेदारी में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, मंदिर विकास और सेवा को प्राथमिकता दी जाएगी।
पांडे ने कहा — ट्रस्ट के माध्यम से दर्शनार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नवनियुक्त सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडे ने 3 सितंबर 2026 को कहा कि ट्रस्ट में मिली नई ज़िम्मेदारी के तहत उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना होगी। पांडे दशकों से राम जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई से जुड़े रहे हैं और उनका औपचारिक वकालतनामा वर्ष 1994 में दाखिल हुआ था।

कानूनी संघर्ष से ट्रस्ट तक का सफर

मदन मोहन पांडे ने बताया कि वे राम जन्मभूमि आंदोलन से शुरुआत से ही जुड़े रहे हैं। 1994 में उन्होंने महंत परमहंस रामचंद्र दास की ओर से इस मामले में औपचारिक वकालतनामा दाखिल किया। इसके बाद वे रामलला के भी अधिवक्ता बने और दोनों पक्षों की ओर से न्यायालयों में पैरवी करते रहे।

उन्होंने कहा कि इस मामले को उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ा। उच्च न्यायालय में भी निर्णय उनके पक्ष में आया था, हालाँकि बाद में विपक्षी पक्ष की ओर से फैसले में विभाजन कराया गया। अंततः सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम फैसला उनके पक्ष में रहा।

ट्रस्ट में शामिल होने पर क्या बोले पांडे

ट्रस्ट की सदस्यता मिलने पर पांडे ने कहा कि जिस विषय से वे इतने लंबे समय तक जुड़े रहे, उससे संबंधित संस्था में ज़िम्मेदारी मिलना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर का विकास, श्रद्धालुओं की सुविधा और सेवा — ये तीन बिंदु उनके कार्यकाल की धुरी रहेंगे।

श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ज़ोर

पांडे ने कहा कि अयोध्या में दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को ट्रस्ट के माध्यम से जितनी बेहतर सुविधाएँ दी जा सकती हैं, उन्हें सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मंदिर के उत्थान और विकास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएँगे।

आगे की राह

ट्रस्ट में पांडे की नियुक्ति राम जन्मभूमि की दशकों लंबी कानूनी यात्रा के एक महत्वपूर्ण अध्याय को संस्थागत रूप देती है। यह ऐसे समय में आई है जब अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और मंदिर परिसर के विस्तार एवं सुविधाओं के उन्नयन की माँग भी बढ़ रही है। आने वाले समय में ट्रस्ट किस दिशा में कदम उठाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें अब मंदिर प्रबंधन में शामिल करना एक सुविचारित संकेत है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि ट्रस्ट श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार कितनी तेज़ी से कर पाता है — क्योंकि अयोध्या में आस्था की भीड़ और बुनियादी ढाँचे के बीच की खाई अभी भी चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मदन मोहन पांडे को राम मंदिर ट्रस्ट में क्यों नियुक्त किया गया?
अधिवक्ता मदन मोहन पांडे राम जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई से 1994 से जुड़े हैं और उन्होंने महंत परमहंस रामचंद्र दास तथा रामलला दोनों पक्षों की पैरवी इलाहाबाद उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय तक की। उनकी दीर्घकालिक कानूनी भागीदारी और विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट क्या है?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट वह संस्था है जो अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण, प्रबंधन और विकास की देखरेख करती है। सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने इस ट्रस्ट का गठन किया था।
मदन मोहन पांडे ट्रस्ट में अपनी ज़िम्मेदारी कैसे निभाएँगे?
पांडे ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना और मंदिर के विकास एवं उत्थान में योगदान देना होगा। ट्रस्ट के माध्यम से दर्शनार्थियों के लिए सुविधाओं को और उन्नत करने का प्रयास किया जाएगा।
राम जन्मभूमि मामले में मदन मोहन पांडे की क्या भूमिका रही है?
पांडे ने 1994 में महंत परमहंस रामचंद्र दास की ओर से औपचारिक वकालतनामा दाखिल किया और बाद में रामलला के भी अधिवक्ता बने। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों में पैरवी की; सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम फैसला उनके पक्ष में आया।
अयोध्या में श्रद्धालुओं के लिए क्या सुविधाएँ बेहतर होंगी?
पांडे ने संकेत दिया है कि ट्रस्ट के माध्यम से दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर किया जाएगा। हालाँकि विशिष्ट योजनाओं का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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