3 सितंबर 2026
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक: एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, श्रमिक आवास और NDRF सेंटर को मंजूरी

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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक: एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, श्रमिक आवास और NDRF सेंटर को मंजूरी

सारांश

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में एक साथ कई मोर्चों पर बड़े फैसले लिए गए — ₹756.01 करोड़ की एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, अप्रवासी श्रमिकों के लिए EWS फ्लैट और ट्रांजिट हॉस्टल, NDRF के लिए 30 निशुल्क फ्लैट और सेक्टर अल्फा-1 में सार्वजनिक पुस्तकालय। यह बैठक ग्रेटर नोएडा के बुनियादी ढाँचे की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में 3 सितंबर 2026 को एक दर्जन से अधिक अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की परियोजना की अनुमानित लागत ₹756.01 करोड़ ; चार प्राधिकरण समान हिस्सेदारी से खर्च वहन करेंगे।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए जुनपत गांव से 12 किलोमीटर की 10 लेन सड़क बनेगी; तीन ओवरब्रिज शामिल।
पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में EWS फ्लैट; ईकोटेक-6 और ईकोटेक-11 में 3,000-3,000 वर्ग मीटर भूमि ट्रांजिट हॉस्टल के लिए।
ओमीक्रॉन-1ए में NDRF आठवीं वाहिनी के रीजनल रिस्पांस सेंटर हेतु 30 फ्लैट निशुल्क आवंटित।
आवासीय भूखंड आवंटियों को कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र के लिए 30 जून 2028 तक अंतिम अवसर; अन्यथा आवंटन रद्द हो सकता है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में 3 सितंबर 2026 को शहरी विकास, कनेक्टिविटी, श्रमिक आवास, शिक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े एक दर्जन से अधिक अहम प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। ₹756.01 करोड़ की अनुमानित लागत वाली दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी परियोजना से लेकर अप्रवासी श्रमिकों के लिए ईडब्ल्यूएस (EWS) आवास तक, इस बैठक के फैसले ग्रेटर नोएडा के दीर्घकालिक शहरी ढाँचे को नई दिशा देने वाले हैं।

एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी: दो बड़े मार्गों को मंजूरी

बोर्ड ने ग्रेटर नोएडा की 130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना को स्वीकृति दी। पहले चरण में एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क बनाई जाएगी, जिसकी अनुमानित लागत ₹756.01 करोड़ होगी। इस परियोजना की लागत यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्राधिकरण समान रूप से वहन करेंगे।

गौरतलब है कि एनएचएआई (NHAI) के सर्वेक्षण में इस कनेक्टिविटी के लिए दो वैकल्पिक मार्ग सुझाए गए थे, जिनमें से समिति ने पहले चरण के लिए एक मार्ग को अंतिम रूप दिया है। दूसरे चरण में शेष हिस्से का निर्माण किया जाएगा। इस कनेक्टिविटी से ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक पहुँच आसान होगी।

इसके साथ ही 105 मीटर चौड़ी सड़क को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के प्रस्ताव को भी बोर्ड की मंजूरी मिली। फेस-1 में इस सड़क का करीब 6 किलोमीटर हिस्सा पहले ही बन चुका है। अब फेस-2 में जुनपत गांव से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक करीब 12 किलोमीटर की 10 लेन और 4 सर्विस लेन वाली सड़क बनाई जाएगी। मार्ग में रेलवे लाइन, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लिंक लाइन और जीटी रोड पड़ेंगे, जहाँ तीन ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। सड़क निर्माण का खर्च एनएचएआई उठाएगा, जबकि भूमि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उपलब्ध कराएगा।

श्रमिक आवास: EWS फ्लैट और ट्रांजिट हॉस्टल

औद्योगिक गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में अन्य जिलों और राज्यों से आने वाले अप्रवासी श्रमिकों की आवासीय जरूरतों को देखते हुए प्राधिकरण पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में ईडब्ल्यूएस फ्लैट विकसित करेगा। इसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है और 2026 के अंत तक निर्माण शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अतिरिक्त सेक्टर ईकोटेक-6 और ईकोटेक-11 में 3,000-3,000 वर्ग मीटर भूमि ट्रांजिट लेबर हॉस्टल के लिए चिन्हित की गई है। प्राधिकरण यह जमीन श्रम विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करेगा और हॉस्टल का निर्माण श्रम विभाग द्वारा किया जाएगा। यहाँ रोजगार की तलाश में आने वाले अप्रवासी श्रमिक कम किराये पर अस्थायी आवास प्राप्त कर सकेंगे।

सार्वजनिक पुस्तकालय और सामाजिक अवसंरचना

सेक्टर अल्फा-1 में 1,360 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में सार्वजनिक पुस्तकालय बनाने को भी मंजूरी दी गई। इसमें 440 वर्ग मीटर में तीन मंजिला लाइब्रेरी होगी, जबकि शेष हिस्से में पार्किंग, शौचालय और अन्य सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। पुस्तकालय में बच्चों, छात्रों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी, और आर्थिक रूप से कमजोर छात्र न्यूनतम शुल्क पर पुस्तकें इश्यू करा सकेंगे। इसका निर्माण भी 2026 के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य है।

रिठौरी गांव में रेलवे लाइन के ऊपर फुटओवर ब्रिज बनाने का भी फैसला लिया गया, जिसमें रैंप, सीढ़ियाँ और लिफ्ट की सुविधा होगी। यह ब्रिज वर्ष 2022 में सांसद डॉ. महेश शर्मा के पत्र के बाद शुरू हुई प्रक्रिया का परिणाम है। निर्माण का खर्च ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उठाएगा और रेलवे से आवश्यक स्वीकृति एवं एनओसी ली जाएगी।

NDRF सेंटर और आपदा प्रबंधन

आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत-बचाव कार्यों को तेज करने के लिए ओमीक्रॉन-1ए में एनडीआरएफ (NDRF) की आठवीं वाहिनी, गाजियाबाद के रीजनल रिस्पांस सेंटर हेतु 30 फ्लैट निशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। इनका उपयोग टीम के कैंप, परिसर और स्टाफ कार्यालय के रूप में होगा और कर्मियों की तैनाती रोटेशन के आधार पर की जाएगी। इससे बाढ़, औद्योगिक दुर्घटना, भवन गिरने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में एनडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई संभव होगी।

अन्य प्रमुख फैसले

आवासीय भूखंडों के आवंटियों को भवन निर्माण पूरा करने और कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए 30 जून 2028 तक का अंतिम अवसर दिया गया है। यह अवसर वर्तमान प्रचलित विलंब शुल्क के साथ उपलब्ध होगा; निर्धारित अवधि तक प्रमाण पत्र न लेने वाले आवंटियों का आवंटन रद्द किया जा सकता है।

वायु गुणवत्ता सुधारने और सड़कों पर धूल नियंत्रण के लिए ग्रेटर नोएडा सेंट्रल और ईस्ट जोन में पाँच वर्षों तक मैकेनिकल रोड स्वीपिंग कराई जाएगी। सीएक्यूएम (CAQM) और आईआईटी रुड़की के सुझावों के आधार पर इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। बैठक में चेयरमैन दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश समेत विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इन फैसलों के क्रियान्वयन से ग्रेटर नोएडा के बुनियादी ढाँचे में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — क्योंकि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाएँ वर्षों से विभिन्न समितियों और सर्वेक्षणों के दौर से गुजरती रही हैं। EWS फ्लैट और ट्रांजिट हॉस्टल की घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन श्रम विभाग को भूमि निशुल्क देने के बाद निर्माण की जिम्मेदारी उसी पर छोड़ना एक संभावित बाधा है — क्योंकि विभागीय निर्माण परियोजनाएँ अक्सर समयसीमा से पिछड़ती हैं। NDRF को 30 फ्लैट निशुल्क देना आपदा तैयारी की दृष्टि से सराहनीय कदम है, पर यह भी देखना होगा कि रोटेशन-आधारित तैनाती व्यवहार में कितनी प्रभावी रहती है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में कौन-कौन से प्रमुख फैसले लिए गए?
3 सितंबर 2026 को हुई इस बैठक में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी (₹756.01 करोड़), ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से 12 किलोमीटर सड़क, EWS श्रमिक आवास, NDRF के लिए 30 निशुल्क फ्लैट, सेक्टर अल्फा-1 में पुस्तकालय और रिठौरी में फुटओवर ब्रिज समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
ग्रेटर नोएडा को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की परियोजना की लागत क्या है और इसे कौन वहन करेगा?
इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹756.01 करोड़ है। यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्राधिकरण इस खर्च को समान रूप से वहन करेंगे। पहले चरण में एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क बनाई जाएगी।
अप्रवासी श्रमिकों के लिए ग्रेटर नोएडा में क्या आवास व्यवस्था की जाएगी?
प्राधिकरण पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में EWS फ्लैट विकसित करेगा और 2026 के अंत तक निर्माण शुरू करने का लक्ष्य है। इसके अलावा सेक्टर ईकोटेक-6 और ईकोटेक-11 में 3,000-3,000 वर्ग मीटर भूमि ट्रांजिट लेबर हॉस्टल के लिए श्रम विभाग को निशुल्क दी जाएगी।
आवासीय भूखंड आवंटियों के लिए कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र की अंतिम तिथि क्या है?
बोर्ड ने आवंटियों को भवन निर्माण पूरा कर कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए 30 जून 2028 तक का अंतिम अवसर दिया है। यह अवसर वर्तमान प्रचलित विलंब शुल्क के साथ मिलेगा और समयसीमा तक प्रमाण पत्र न लेने पर आवंटन रद्द हो सकता है।
ग्रेटर नोएडा में NDRF के रीजनल रिस्पांस सेंटर के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
ओमीक्रॉन-1ए में NDRF की आठवीं वाहिनी, गाजियाबाद के रीजनल रिस्पांस सेंटर के लिए 30 फ्लैट निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। इनका उपयोग टीम कैंप, परिसर और स्टाफ कार्यालय के रूप में होगा, जिससे बाढ़ और औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसी आपदाओं में त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
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