राहुल गांधी मानहानि केस: सावरकर पक्ष के वकील का दावा, पेश वीडियो में गोडसे-RSS संबंध पर अलग तथ्य
सारांश
मुख्य बातें
पुणे की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में 3 सितंबर को राहुल गांधी के खिलाफ सात्यकि सावरकर द्वारा दायर मानहानि मामले की सुनवाई हुई। इस सुनवाई में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से उनके वकील ने कुछ वीडियो, उनकी ट्रांसक्रिप्ट और धारा 65बी के तहत तकनीकी प्रमाणपत्र अदालत में दाखिल किए। सावरकर पक्ष के वकील ने इन्हीं दस्तावेज़ों में कई 'महत्वपूर्ण तथ्य' उजागर होने का दावा किया है।
वकील का दावा: क्या है नया मोड़
सात्यकि सावरकर के वकील संग्राम कोलटकर ने बताया कि राहुल गांधी की ओर से पेश किए गए वीडियो, ट्रांसक्रिप्ट और 65बी सर्टिफिकेट को उन्होंने बिना किसी आपत्ति के रिकॉर्ड पर स्वीकार कर लिया है। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं दस्तावेज़ों में नाथूराम गोडसे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और वीर सावरकर को लेकर कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं, जो उनके अनुसार इस मुकदमे के लिहाज़ से अहम हैं।
कोलटकर के अनुसार, राहुल गांधी की ओर से रिकॉर्ड पर लाई गई सामग्री में गोडसे के कथित बयान का उल्लेख है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने RSS से अपने संबंध समाप्त कर लिए थे। यह तथ्य, वकील के दावे के अनुसार, गोडसे और संघ के बीच संबंध को लेकर प्रचलित धारणा से अलग चित्र प्रस्तुत करता है।
गोपाल गोडसे का इंटरव्यू और गांधी जी के अंतिम क्षण
राहुल गांधी की ओर से अदालत में पेश किए गए एक वीडियो में गोपाल गोडसे का इंटरव्यू भी शामिल है। गोपाल गोडसे, महात्मा गांधी हत्याकांड में आरोपी रहे और सजा काट चुके थे। कोलटकर ने बताया कि इस इंटरव्यू में घटना का वह विवरण है, जो आमतौर पर प्रचलित 'हे राम' के संदर्भ से अलग है। गोपाल गोडसे के बयान के अनुसार, गोली लगने के बाद महात्मा गांधी जमीन पर गिर पड़े थे और उस समय उन्होंने कोई शब्द नहीं कहा था। वकील ने यह भी कहा कि महात्मा गांधी एक महान व्यक्तित्व थे और उनके बारे में टिप्पणी करते समय सावधानी बरती जानी चाहिए।
अंबेडकर और सावरकर से जुड़े पुराने प्रसंग
कोलटकर ने अदालत में पेश सामग्री का हवाला देते हुए यह भी दावा किया कि इसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर और वीर सावरकर से जुड़े कुछ ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख है। उनके अनुसार, तत्कालीन कानून मंत्री डॉ. अंबेडकर ने सावरकर, नाथूराम गोडसे और अन्य आरोपियों के वकील भूपटकर से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में अंबेडकर ने कथित तौर पर कहा था कि वीर सावरकर के खिलाफ मुकदमे में कोई पुख्ता सबूत नहीं है। इस आधार पर वकील ने यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया कि सावरकर को बिना पर्याप्त आधार के आरोपी बनाया गया था। हालांकि, कोलटकर ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस बारे में टिप्पणी नहीं करनी कि उस समय ऐसा क्यों हुआ।
वकील ने यह भी बताया कि पेश वीडियो में नाथूराम गोडसे और डॉ. अंबेडकर के निजी सचिव के बीच मुलाकात का उल्लेख है। गोडसे ने अपने मामले में अंबेडकर तक यह संदेश पहुँचाने का अनुरोध किया था कि उन्हें माफी न दी जाए और फाँसी के अलावा कोई दूसरी सजा न मिले।
आगे क्या होगा
अदालत में पेश इन दस्तावेज़ों और वीडियो की सामग्री अब मामले की सुनवाई का हिस्सा बन चुकी है। संग्राम कोलटकर ने इन्हें मुकदमे के लिहाज़ से महत्वपूर्ण बताया है। यह मामला पुणे की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में विचाराधीन है और आगामी सुनवाई में इन्हीं दस्तावेज़ों पर आगे की बहस होने की संभावना है।