राम मंदिर सीईओ जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर विपक्ष का हमला, कांग्रेस-सपा बोले — चंदा विवाद का दाग नहीं मिटेगा
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने 3 सितंबर को एक साथ मोर्चा खोलते हुए मंदिर निर्माण के दौरान कथित चंदा अनियमितताओं के पुराने आरोपों को फिर से उठाया और कहा कि महज सीईओ बदलने से इन सवालों का जवाब नहीं मिलता। दूसरी ओर, मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने इसे ट्रस्ट का पूर्णतः आंतरिक मामला करार दिया।
कांग्रेस विधायक वडेट्टीवार का तीखा बयान
मुंबई में कांग्रेस विधायक विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ने कहा कि यदि कथित तौर पर पहले सब कुछ लूट लिया गया और अब केवल सीईओ की कुर्सी बदली गई है, तो इससे आरोपों का दाग नहीं मिटता। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों आम श्रद्धालुओं ने आस्था और भावना के साथ दान दिया था, और उस धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वडेट्टीवार ने यह भी आरोप लगाया कि इस धन का उपयोग कथित तौर पर राजनीतिक उद्देश्यों और दलों को तोड़ने की कोशिशों में किया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस तरह राजनीतिक दल बदलने से भ्रष्टाचार के आरोप नहीं मिटते, उसी तरह ट्रस्ट का सीईओ बदलने से कथित अनियमितताओं का पूरा मामला समाप्त नहीं हो सकता।
एआईसीसी प्रवक्ता राठौर ने उठाए प्रक्रियागत सवाल
शिमला में एआईसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि नई नियुक्ति पर टिप्पणी से पहले राम मंदिर से जुड़े पुराने विवाद की पृष्ठभूमि को समझना ज़रूरी है। उनके अनुसार, कथित चंदा चोरी का विवाद सामने आने के बाद तत्कालीन सीईओ और ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की भूमिका को लेकर देशभर में नाराजगी का माहौल बना था।
राठौर ने दावा किया कि सरकार की ओर से एसआईटी जांच कराई गई, लेकिन उनके अनुसार इससे अपेक्षित परिणाम नहीं निकला और संबंधित लोगों को क्लीन चिट मिल गई। उन्होंने सवाल उठाया कि एक धार्मिक संस्था के संचालन के लिए सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को नियुक्त करने का निर्णय कितना उचित है, और चेतावनी दी कि इससे भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी नियुक्तियों की परंपरा शुरू हो सकती है।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद की माँग — कोर्ट की निगरानी में जांच
लखनऊ में समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि केवल किसी एक व्यक्ति को सीईओ बनाने से पुराने सवाल खत्म नहीं होंगे। उन्होंने इसे राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बताते हुए कहा कि मंदिर में करोड़ों श्रद्धालु आते हैं और दान देते हैं। प्रसाद ने दावा किया कि विवाद सामने आने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में कमी आई है।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष लगातार न्यायालय की निगरानी में एक समिति गठित कर मामले की जांच कराने की मांग करता रहा है, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष से जुड़े कथित बयानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कोषाध्यक्ष ने कथित तौर पर कहा था कि वह कभी वहां आए ही नहीं और उन्होंने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए — इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति दी गई। गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव शुरुआत से ही राम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित 'चंदा चोरी' के मामले को उठाते रहे हैं।
मौलाना कासमी ने बताया आंतरिक मामला
मुंबई में मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि राम मंदिर का प्रबंधन संबंधित लोगों का अपना मामला है और ट्रस्ट जिसे सीईओ बनाना चाहे, जिसे रखना या हटाना चाहे — वह पूरी तरह उसका अधिकार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मंदिर से जुड़े लोगों की ओर से ही इसे 'चोरी' नहीं बल्कि 'लूट' बताया गया था। कासमी ने कहा कि इस मामले को राम मंदिर से जुड़े लोगों को ही सुलझाना चाहिए।
आगे क्या होगा
विपक्ष की ओर से न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग अब फिर से जोर पकड़ सकती है। एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक दिशा और पारदर्शिता पर नज़रें टिकी रहेंगी। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राम मंदिर देश के सबसे बड़े धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्रों में से एक बन चुका है और उसके प्रबंधन पर जनता की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से ऊँची हैं।