3 सितंबर 2026
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NCR स्लीपर बस गैंगरेप: NCW ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से 7 दिन में ATR माँगी, 16 वर्षीय पीड़िता को पूरी सुरक्षा का निर्देश

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NCR स्लीपर बस गैंगरेप: NCW ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से 7 दिन में ATR माँगी, 16 वर्षीय पीड़िता को पूरी सुरक्षा का निर्देश

सारांश

NCR में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा के कथित गैंगरेप पर NCW ने कड़ा रुख अपनाया है — दिल्ली पुलिस से 7 दिन में ATR माँगी गई है। उसी दिन ठाणे में 22 नाबालिग लड़कियों और होशियारपुर में 11 साल की बच्ची से जुड़े मामलों पर भी संज्ञान लिया गया।

मुख्य बातें

NCW ने 3 सितंबर 2026 को NCR स्लीपर बस में मैनपुरी की 16 वर्षीय छात्रा के कथित गैंगरेप पर स्वतः संज्ञान लिया।
NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से एक सप्ताह के भीतर ATR माँगी।
ATR में जाँच की स्थिति, फोरेंसिक नतीजे, GPS/CDR/CCTV डेटा और चार्जशीट प्रगति का ब्यौरा अनिवार्य।
ठाणे के शाहपुर में 22 नाबालिग लड़कियों के कथित उत्पीड़न पर भी संज्ञान; आरोपी पहले 2024 में POCSO के तहत गिरफ्तार हो चुका था।
होशियारपुर सरकारी स्कूल के 52 वर्षीय हेडमास्टर पर 11 साल की बच्ची के कथित रेप का मामला — NCW ने 7 दिन में ATR माँगी।
तीनों मामलों में पीड़ितों को कानूनी, मनोवैज्ञानिक सहायता और मुआवज़े का निर्देश।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 3 सितंबर 2026 को नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में चलती स्लीपर बस के भीतर उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की 16 वर्षीय, 11वीं कक्षा की एक छात्रा के साथ कथित तौर पर हुए गैंगरेप का स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (ATR) माँगी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले पर जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित होने तक कड़ी निगरानी रखेगा।

NCW की माँगें और निर्देश

NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने दिल्ली पुलिस प्रमुख को लिखे पत्र में माँग की है कि ATR में जाँच की मौजूदा स्थिति, फोरेंसिक नतीजे, चार्जशीट की प्रगति और निगरानी के उपायों का पूरा ब्यौरा हो। रहाटकर ने कहा, 'बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। आयोग जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करने के लिए इस मामले पर बारीकी से नज़र रखेगा।'

पत्र में घटनाओं के पूरे क्रम और राज्यों के बीच तय किए गए रास्ते का पता लगाने के लिए त्वरित जाँच और आरोपी से हिरासत में पूछताछ की माँग की गई है। साथ ही, पॉक्सो (POCSO) एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर गैंगरेप और आपराधिक धमकी सहित सभी लागू प्रावधानों को सख्ती से लागू करने और जहाँ आवश्यक हो वहाँ आरोप और गंभीर करने का निर्देश दिया गया है।

साक्ष्य संरक्षण पर जोर

NCW ने फोरेंसिक, भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी व्यापक जाँच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसमें मेडिकल साक्ष्य, जब्त की गई बस, GPS/टेलीमैटिक्स डेटा, CDR और रास्ते के CCTV फुटेज विशेष रूप से शामिल हैं। आयोग ने पीड़िता और उसके परिवार को कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और लागू योजनाओं के तहत मुआवज़ा दिलाने का भी निर्देश दिया है।

ठाणे और होशियारपुर के मामलों पर भी संज्ञान

इसी दिन NCW ने दो अन्य गंभीर मामलों पर भी स्वतः संज्ञान लिया। पहला मामला महाराष्ट्र के ठाणे के शाहपुर स्थित एक आदिवासी आश्रम शाला का है, जहाँ एक किचन हेल्पर पर 22 नाबालिग लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का आरोप है। रहाटकर ने इस मामले में अधिकारियों को पत्र लिखकर त्वरित जाँच, POCSO व BNS के तहत सख्त कार्रवाई और संस्थागत खामियों की जाँच की माँग की। उन्होंने कहा, 'ऐसी खबरें बेहद चिंताजनक हैं कि आरोपी को पहले 2024 में इसी तरह के अपराध के लिए POCSO के तहत गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे दूसरे संस्थान में तैनात कर दिया गया था।'

दूसरा मामला पंजाब के होशियारपुर का है, जहाँ एक सरकारी स्कूल के 52 वर्षीय हेडमास्टर पर 11 साल की एक लड़की के कथित रेप का आरोप है। रहाटकर ने कहा, 'बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सँभालने वाले एक शिक्षक द्वारा कथित अपराध बेहद परेशान करने वाला है और इसके लिए सबसे सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए।' इस मामले में भी सात दिनों के भीतर ATR माँगी गई है।

व्यापक संदर्भ और जवाबदेही

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों की बढ़ती घटनाएँ गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। NCW का एक साथ तीन राज्यों — दिल्ली/NCR, महाराष्ट्र और पंजाब — से जुड़े मामलों पर एक ही दिन संज्ञान लेना दर्शाता है कि बाल सुरक्षा तंत्र की व्यापक समीक्षा की ज़रूरत है। तीनों मामलों में आयोग ने पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा, तत्काल मेडिकल व मनोवैज्ञानिक सहायता और मुआवज़े की माँग की है। आने वाले दिनों में सभी तीन राज्यों की पुलिस से प्राप्त ATR के आधार पर NCW अगली कार्रवाई तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ATR माँगने के बाद जवाबदेही कितनी दूर तक जाती है। ठाणे का मामला विशेष रूप से चिंताजनक है — एक आरोपी जो 2024 में POCSO के तहत गिरफ्तार हो चुका था, उसे दूसरे संस्थान में तैनात कर दिया गया, जो संस्थागत सत्यापन तंत्र की पूरी विफलता है। NCW की सात-दिन की ATR की समयसीमा एक नियमित अभ्यास बन चुकी है — असली परीक्षा यह है कि क्या इन रिपोर्टों के आधार पर ठोस अभियोजन और संस्थागत सुधार होते हैं, या ये कागज़ी कार्रवाई तक सीमित रह जाते हैं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NCR स्लीपर बस गैंगरेप मामला क्या है?
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की 16 वर्षीय, 11वीं कक्षा की एक छात्रा के साथ कथित तौर पर NCR में चलती स्लीपर बस के भीतर गैंगरेप किया गया। NCW ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस से जाँच रिपोर्ट माँगी है।
NCW ने दिल्ली पुलिस से क्या-क्या माँगा है?
NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से एक सप्ताह के भीतर ATR माँगी है, जिसमें जाँच की स्थिति, फोरेंसिक नतीजे, GPS/CDR/CCTV साक्ष्य, चार्जशीट प्रगति और निगरानी उपाय शामिल हों। POCSO व BNS के तहत सख्त कार्रवाई और पीड़िता को कानूनी, मनोवैज्ञानिक व आर्थिक सहायता का भी निर्देश दिया गया है।
ठाणे के आश्रम शाला मामले में क्या हुआ?
महाराष्ट्र के ठाणे के शाहपुर में एक आदिवासी आश्रम शाला के किचन हेल्पर पर 22 नाबालिग लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का आरोप है। आरोपी को कथित तौर पर 2024 में इसी तरह के अपराध के लिए POCSO के तहत गिरफ्तार किया गया था और बाद में दूसरे संस्थान में तैनात कर दिया गया था।
होशियारपुर स्कूल मामले में NCW ने क्या कदम उठाया?
पंजाब के होशियारपुर में एक सरकारी स्कूल के 52 वर्षीय हेडमास्टर पर 11 साल की लड़की के कथित रेप का आरोप है। NCW अध्यक्ष रहाटकर ने संबंधित अधिकारियों से सात दिनों के भीतर ATR माँगी है और सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई का निर्देश दिया है।
NCW के स्वतः संज्ञान का क्या मतलब है और इससे क्या होगा?
स्वतः संज्ञान का अर्थ है कि NCW ने बिना किसी शिकायत के मीडिया रिपोर्टों के आधार पर मामले में हस्तक्षेप किया है। इसके तहत आयोग संबंधित पुलिस और प्रशासन से रिपोर्ट माँगता है, जाँच की निगरानी करता है और पीड़ितों को सहायता दिलाने का प्रयास करता है, हालाँकि आयोग के पास स्वयं अभियोजन का अधिकार नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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