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स्लीपर बस गैंगरेप पर राहुल गांधी का हमला: 'अमित शाह और योगी की पुलिस जवाबदेही से बचेगी, अपराध पर पर्दा पड़ेगा'

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स्लीपर बस गैंगरेप पर राहुल गांधी का हमला: 'अमित शाह और योगी की पुलिस जवाबदेही से बचेगी, अपराध पर पर्दा पड़ेगा'

सारांश

दिल्ली-एनसीआर में 16 वर्षीय छात्रा के साथ स्लीपर बस में कथित गैंगरेप की घटना पर राहुल गांधी ने एक्स पर सीधा हमला बोला — 47 किलोमीटर का सफर, कोई चेकपॉइंट नहीं, कोई पुलिस नहीं। सवाल सिर्फ एक बस का नहीं, बरसों की प्रशासनिक विफलता का है।

मुख्य बातें

4 अगस्त को कश्मीरी गेट क्षेत्र में एक स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई।
पीड़िता मैनपुरी, उत्तर प्रदेश की रहने वाली 11वीं कक्षा की छात्रा है; बस के ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार।
बस ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक 47 किलोमीटर बिना किसी चेकपॉइंट पर रोके गुज़री।
राहुल गांधी ने एक्स पर अमित शाह की दिल्ली पुलिस और योगी आदित्यनाथ की यूपी पुलिस की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
गांधी ने निर्भया कांड का हवाला देते हुए सार्वजनिक परिवहन निगरानी नियमों के पालन पर सवाल खड़े किए।

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 1 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर में एक 16 वर्षीय छात्रा के साथ स्लीपर बस में हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस की जवाबदेही एक बार फिर तय नहीं होगी और इस अपराध पर भी पर्दा डाल दिया जाएगा।

राहुल गांधी ने एक्स पर क्या लिखा

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'दिल्ली-एनसीआर महिलाओं के लिए इतना असुरक्षित हो गया है कि एक नाबालिग लड़की के साथ ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक 47 किलोमीटर के सफर के दौरान एक स्लीपर बस में गैंगरेप किया गया।' उन्होंने सवाल उठाया कि न दिल्ली पुलिस और न ही नोएडा पुलिस को इसकी भनक लगी, जबकि बस नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली की रिंग रोड और सीमा पार करती रही और किसी भी चेकपॉइंट पर उसे नहीं रोका गया।

उन्होंने आगे लिखा कि बस की सीटों पर पर्दे लगे थे ताकि अंदर की गतिविधि छिपी रहे और अपराधियों को प्रशासन का कोई डर नहीं था। गांधी ने निर्भया कांड का संदर्भ देते हुए पूछा कि इतने वर्षों और इतनी घटनाओं के बावजूद ऐसी बसों की चेकिंग और निगरानी के नियमों का पालन क्यों नहीं होता।

सरकार की नाकामी पर सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि वे पर्दे केवल उस एक बस पर नहीं थे — वे सरकार द्वारा प्रशासनिक विफलताओं पर साल-दर-साल डाले गए पर्दों का नतीजा हैं, जिसके कारण महिलाएँ देश की राजधानी में सुरक्षित यात्रा भी नहीं कर पा रहीं। उन्होंने पूछा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इस व्यवस्था को सुधारने से पहले और कितनी महिलाओं और लड़कियों को यह सब झेलना पड़ेगा।

उन्होंने सीधे सवाल किया कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली दिल्ली पुलिस या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश पुलिस की कोई जवाबदेही तय होगी — और खुद ही जवाब दिया: 'बिल्कुल नहीं, इस अपराध पर भी बस पर्दा डाल दिया जाएगा।'

घटना का विवरण

यह कथित घटना 4 अगस्त को हुई, जब मैनपुरी, उत्तर प्रदेश की रहने वाली 11वीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा के साथ कश्मीरी गेट क्षेत्र में एक स्लीपर बस में सामूहिक दुष्कर्म का आरोप है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, छात्रा परिजनों से नाराज होकर बिना बताए घर से निकली थी और नोएडा में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जा रही थी।

भारी बारिश और अंधेरे के कारण वह कथित तौर पर ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर गलती से उतर गई। वहाँ से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे नोएडा सेक्टर-63 छोड़ने का आश्वासन देकर बस में बैठाया। पुलिस ने इस मामले में बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में महिला सुरक्षा को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। गौरतलब है कि निर्भया कांड के बाद से दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन की निगरानी के लिए कई नियम बने, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन अपर्याप्त रहा है। इस मामले में जाँच जारी है और पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके केंद्र में एक ठोस प्रशासनिक सवाल है — 47 किलोमीटर, कई चेकपॉइंट, और पुलिस को कोई सूचना नहीं। निर्भया के बाद बने सभी कानूनों और प्रोटोकॉल के बावजूद सार्वजनिक परिवहन की निगरानी व्यवस्था इतनी कमज़ोर क्यों है, यह सवाल सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों से पूछा जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस केंद्र के अधीन है और यूपी पुलिस राज्य सरकार के — दोनों की जवाबदेही तय करना ज़रूरी है, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी। असली परीक्षा यह है कि गिरफ्तारी के बाद निगरानी तंत्र को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली स्लीपर बस गैंगरेप की घटना क्या है?
4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट क्षेत्र तक एक स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। पुलिस ने बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया है।
राहुल गांधी ने इस मामले में क्या कहा?
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि बस ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक 47 किलोमीटर बिना किसी चेकपॉइंट पर रोके गुज़री और न दिल्ली पुलिस, न नोएडा पुलिस को भनक लगी। उन्होंने अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की पुलिस की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
पीड़िता कौन है और घटना कैसे हुई?
पीड़िता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की 11वीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह परिजनों से नाराज होकर नोएडा में अपने चचेरे भाई के पास जा रही थी और बारिश व अंधेरे में गलती से परी चौक पर उतर गई, जहाँ से बस में बैठी।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
पुलिस ने बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया है और जाँच जारी है। विपक्ष ने दिल्ली पुलिस और यूपी पुलिस की निगरानी चूक पर जवाब माँगा है।
निर्भया कांड के बाद भी ऐसी घटनाएँ क्यों हो रही हैं?
आलोचकों का कहना है कि निर्भया कांड के बाद सार्वजनिक परिवहन निगरानी के लिए बने नियमों का ज़मीनी स्तर पर पालन अपर्याप्त है। राहुल गांधी ने भी इसी बिंदु पर सवाल उठाया कि वर्षों बाद भी बसों की चेकिंग और निगरानी प्रोटोकॉल लागू क्यों नहीं हो रहे।
राष्ट्र प्रेस
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