अखिलेश यादव के कार्यकाल में 'गुंडागर्दी, अराजकता और जातीय हिंसा' थी: ओमप्रकाश राजभर का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल को 'गुंडागर्दी, अराजकता और जातीय हिंसा' का दौर करार देते हुए 13 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखा पोस्ट साझा किया। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा शासन में अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ था और दलितों व अति पिछड़ों पर अत्याचार की घटनाएँ बेरोकटोक होती रहीं।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
मंत्री राजभर ने एक्स पर लिखा, 'अखिलेश यादव, दो दिन पहले आपके लोगों की गुंडई देखकर मुझे आपके कार्यकाल की सपाई गुंडागर्दी, अराजकता और आतंक का खौफनाक दौर याद आ गया।' उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान हुई कथित जातीय हिंसा और अत्याचार की घटनाओं को वे एक-एक कर जनता के सामने लाएंगे।
बुलंदशहर गैंगरेप कांड का उल्लेख
राजभर ने 2016 की उस घटना का जिक्र किया जब दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे पर बुलंदशहर में एक माँ और उसकी 14 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले के मुख्य आरोपी को योगी सरकार में 2020 में गिरफ्तार करने की कोशिश की गई, जिस दौरान उसने पुलिस पर हमले की कोशिश की और मुठभेड़ में मारा गया। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन सपा नेता आजम खान ने इस घटना पर 'अशोभनीय बयान' दिया था।
बदायूं दलित हत्याकांड का संदर्भ
राजभर ने अपने पोस्ट में मई 2014 की बदायूं घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर दो दलित बहनों के साथ बलात्कार के बाद हत्या कर उनके शव पेड़ पर लटका दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश आरोपी अखिलेश के 'स्वजातीय' थे और फिल्म 'आर्टिकल 15' के ज़रिए इस मामले को 'नॉर्मलाइज' करने की कोशिश की गई तथा आरोपियों की जातियाँ बदली गईं। हालाँकि ये आरोप राजभर के अपने दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक चुनौती और आगे की रणनीति
मंत्री राजभर ने सपा प्रमुख को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि वे 'एक जनपद-एक जातीय हिंसा' की घटनाओं की पूरी सूची सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा, 'तैयार रहिए अखिलेश जी। आपकी सरकार की याद आपको दिलाकर रहूंगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और सपा व भाजपा गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।
सपा की प्रतिक्रिया
राजभर के इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि राजभर पहले सपा के सहयोगी रह चुके हैं और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गए। उनके इस हमले को आगामी राजनीतिक समीकरणों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है।