13 जुलाई 2026
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अखिलेश यादव के कार्यकाल में 'गुंडागर्दी, अराजकता और जातीय हिंसा' थी: ओमप्रकाश राजभर का तीखा हमला

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अखिलेश यादव के कार्यकाल में 'गुंडागर्दी, अराजकता और जातीय हिंसा' थी: ओमप्रकाश राजभर का तीखा हमला

सारांश

यूपी मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक्स पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के कार्यकाल को 'गुंडागर्दी, अराजकता और जातीय हिंसा' का दौर बताया। बुलंदशहर गैंगरेप (2016) और बदायूं दलित हत्याकांड (2014) का हवाला देते हुए उन्होंने ऐलान किया कि वे सपा शासन की जातीय हिंसा की पूरी फेहरिस्त सार्वजनिक करेंगे।

मुख्य बातें

यूपी मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने 13 जुलाई को एक्स पर अखिलेश यादव के कार्यकाल को 'गुंडागर्दी, अराजकता और जातीय हिंसा' का दौर बताया।
राजभर ने 2016 के बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार कांड और मई 2014 के बदायूं दलित हत्याकांड का उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बुलंदशहर कांड के मुख्य आरोपी को योगी सरकार में 2020 में मुठभेड़ में मार गिराया गया।
राजभर ने सपा नेता आजम खान पर बुलंदशहर घटना पर 'अशोभनीय बयान' देने का आरोप लगाया।
उन्होंने ऐलान किया कि वे सपा शासन में हुई जातीय हिंसा की 'एक जनपद-एक जातीय हिंसा' की पूरी सूची सार्वजनिक करेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल को 'गुंडागर्दी, अराजकता और जातीय हिंसा' का दौर करार देते हुए 13 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखा पोस्ट साझा किया। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा शासन में अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ था और दलितों व अति पिछड़ों पर अत्याचार की घटनाएँ बेरोकटोक होती रहीं।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

मंत्री राजभर ने एक्स पर लिखा, 'अखिलेश यादव, दो दिन पहले आपके लोगों की गुंडई देखकर मुझे आपके कार्यकाल की सपाई गुंडागर्दी, अराजकता और आतंक का खौफनाक दौर याद आ गया।' उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान हुई कथित जातीय हिंसा और अत्याचार की घटनाओं को वे एक-एक कर जनता के सामने लाएंगे।

बुलंदशहर गैंगरेप कांड का उल्लेख

राजभर ने 2016 की उस घटना का जिक्र किया जब दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे पर बुलंदशहर में एक माँ और उसकी 14 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले के मुख्य आरोपी को योगी सरकार में 2020 में गिरफ्तार करने की कोशिश की गई, जिस दौरान उसने पुलिस पर हमले की कोशिश की और मुठभेड़ में मारा गया। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन सपा नेता आजम खान ने इस घटना पर 'अशोभनीय बयान' दिया था।

बदायूं दलित हत्याकांड का संदर्भ

राजभर ने अपने पोस्ट में मई 2014 की बदायूं घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर दो दलित बहनों के साथ बलात्कार के बाद हत्या कर उनके शव पेड़ पर लटका दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश आरोपी अखिलेश के 'स्वजातीय' थे और फिल्म 'आर्टिकल 15' के ज़रिए इस मामले को 'नॉर्मलाइज' करने की कोशिश की गई तथा आरोपियों की जातियाँ बदली गईं। हालाँकि ये आरोप राजभर के अपने दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक चुनौती और आगे की रणनीति

मंत्री राजभर ने सपा प्रमुख को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि वे 'एक जनपद-एक जातीय हिंसा' की घटनाओं की पूरी सूची सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा, 'तैयार रहिए अखिलेश जी। आपकी सरकार की याद आपको दिलाकर रहूंगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और सपा व भाजपा गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।

सपा की प्रतिक्रिया

राजभर के इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि राजभर पहले सपा के सहयोगी रह चुके हैं और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गए। उनके इस हमले को आगामी राजनीतिक समीकरणों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है — जो पिछड़े और दलित मतदाताओं को सपा से दूर करने और भाजपा गठबंधन की ओर खींचने के लिए पुरानी घटनाओं को नए सिरे से उठाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि बदायूं कांड (2014) सपा सरकार के दौरान हुआ था, लेकिन बुलंदशहर गैंगरेप (2016) भी उसी कार्यकाल में हुआ — इन घटनाओं पर तब विपक्ष और न्यायपालिका दोनों ने सवाल उठाए थे। हालाँकि, राजभर के आरोप एकतरफा हैं और सपा की प्रतिक्रिया के बिना अधूरे हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि राजभर खुद एक समय सपा के साथ गठबंधन में थे — यह विरोधाभास उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए हैं?
यूपी मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल को 'गुंडागर्दी, अराजकता और जातीय हिंसा' का दौर बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासन में अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ था और दलितों व अति पिछड़ों पर अत्याचार की घटनाएँ बेरोकटोक होती रहीं।
राजभर ने बुलंदशहर गैंगरेप कांड का जिक्र क्यों किया?
राजभर ने 2016 की बुलंदशहर घटना का उल्लेख सपा शासन में कानून-व्यवस्था की कथित विफलता के उदाहरण के रूप में किया, जिसमें दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे पर एक माँ और उसकी 14 वर्षीय बेटी के साथ कथित सामूहिक बलात्कार हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले के मुख्य आरोपी को योगी सरकार में 2020 में मुठभेड़ में मार गिराया गया।
बदायूं दलित हत्याकांड से राजभर का क्या आशय है?
राजभर ने मई 2014 के बदायूं कांड का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर दो दलित बहनों के साथ बलात्कार के बाद हत्या कर शव पेड़ पर लटका दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश आरोपी अखिलेश के 'स्वजातीय' थे और फिल्म 'आर्टिकल 15' के ज़रिए इस मामले को 'नॉर्मलाइज' करने की कोशिश की गई।
राजभर ने आजम खान का जिक्र क्यों किया?
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा नेता आजम खान ने बुलंदशहर गैंगरेप कांड पर 'अशोभनीय बयान' दिया था, जिसे न वे भूले हैं और न यूपी की जनता। यह बयान सपा के वरिष्ठ नेताओं की कथित संवेदनहीनता को उजागर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राजभर आगे क्या करने की योजना बना रहे हैं?
राजभर ने ऐलान किया है कि वे सपा शासन में हुई जातीय हिंसा की घटनाओं की पूरी सूची एक-एक कर सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने इसे 'एक जनपद-एक जातीय हिंसा' अभियान का नाम दिया है, जिसके तहत वे अखिलेश यादव के कार्यकाल की कथित ज़्यादतियों को जनता के सामने लाने का इरादा रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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