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ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला: कन्नौज सांसद निधि में भेदभाव का आरोप, बोले- गैर-यादव OBC अंधेरे में

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ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला: कन्नौज सांसद निधि में भेदभाव का आरोप, बोले- गैर-यादव OBC अंधेरे में

सारांश

ओमप्रकाश राजभर ने एक्स पर अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लिया — कन्नौज में सांसद निधि से सिर्फ 'अब्दुल्लों के मोहल्ले' रोशन करने का आरोप, गैर-यादव OBC और दलितों की 13 साल की उपेक्षा का हिसाब माँगा, और चेतावनी दी कि सपा टूट कर रहेगी।

मुख्य बातें

ओमप्रकाश राजभर ने 28 जून को एक्स पर अखिलेश यादव पर कन्नौज सांसद निधि में भेदभाव का आरोप लगाया।
राजभर के अनुसार, विकास कार्य चुनिंदा इलाकों तक सीमित रहे, जाटव, धानुक, धोबी, लोधी समुदाय उपेक्षित रहे।
सपा के 13 वर्षों के शासन में OBC आरक्षण का लाभ केवल यादव और मुस्लिम समुदायों तक सिमटने का आरोप।
मुरादाबाद और बांदा में अति पिछड़े समुदाय की महिलाओं को धमकाए जाने का आरोप।
राजभर ने चेतावनी दी — सुधार नहीं हुआ तो सपा टूट कर रहेगी ।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 28 जून को समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि कन्नौज लोकसभा क्षेत्र में सांसद निधि का खर्च चुनिंदा इलाकों तक सीमित रखा गया, जबकि गैर-यादव पिछड़े वर्गों और दलित समाज की लगातार अनदेखी की गई। उनका यह हमला सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए सामने आया, जो देखते-देखते राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया।

सांसद निधि पर भेदभाव का आरोप

राजभर ने अखिलेश यादव को 'राजा बाबू' संबोधित करते हुए लिखा कि कन्नौज में सांसद निधि का उपयोग केवल 'सपाई अब्दुल्लों के मोहल्ले' को रोशन करने में किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जाटव, धानुक, धोबी और लोधी समुदायों की गलियाँ अँधेरे में क्यों छोड़ दी गईं, जबकि ये सभी उसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। राजभर के अनुसार, यह चयनात्मक विकास तुष्टिकरण की राजनीति का स्पष्ट उदाहरण है।

OBC आरक्षण पर सपा पर निशाना

राजभर ने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल यादव और मुस्लिम समुदायों तक सिमट कर रह गया। उन्होंने कहा कि इसी कारण पाल, प्रजापति, बिंद, केवट, मल्लाह, राजभर, निषाद, मांझी, दर्जी, तेली, फकीर और बंजारा समेत पूरे अति पिछड़े और दलित समाज के युवा आज ईंट-गारा ढोने, रिक्शा चलाने या ढाबों पर काम करने को मजबूर हैं। उनका कहना था कि सपा सरकार के 13 वर्षों में इन समुदायों की दो पीढ़ियाँ बर्बाद हो गईं।

हिंसा और धमकी के आरोप

राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि मुरादाबाद और बांदा में उनके समुदाय की महिलाओं को सपा कार्यकर्ताओं द्वारा परेशान किया जा रहा है और धमकियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को हिंदू होने की वजह से तो कुछ को गैर-यादव ओबीसी यानी कुर्मी होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। राजभर ने इसे सपा की 'दबंगई और गुंडई' की संस्कृति का हिस्सा बताया।

अखिलेश को सीधी चुनौती

राजभर ने अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि अगर उन्हें राजभर से समस्या है, तो वे सीधे उनसे लड़ें — न कि उनके समुदाय के लोगों को धमकाएँ। उन्होंने कहा कि गैर-यादव ओबीसी और दलित जातियों के हित के लिए वे न झुकेंगे और न रुकेंगे। राजभर ने चेतावनी दी कि यदि सपा में सुधार नहीं हुआ, तो पार्टी टूट कर रहेगी।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है और अति पिछड़ा वर्ग का राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़ हो रहा है। गौरतलब है कि राजभर पहले सपा के साथ गठबंधन में रह चुके हैं और अब भाजपा नीत गठबंधन का हिस्सा हैं। उनका यह हमला सपा के पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक समीकरण को सीधी चुनौती देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे एक सत्तारूढ़ गठबंधन के मंत्री द्वारा उठाना इसकी धार को तेज़ करता है। दिलचस्प यह है कि राजभर खुद पहले सपा के साथ गठबंधन में रह चुके हैं — इसलिए उनकी आलोचना में वैचारिक ईमानदारी और चुनावी अवसरवाद, दोनों की परतें हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि यह बयानबाज़ी उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें भाजपा गठबंधन सपा के पारंपरिक गैर-यादव OBC आधार को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने कन्नौज लोकसभा क्षेत्र में सांसद निधि का उपयोग केवल चुनिंदा इलाकों में किया और गैर-यादव OBC व दलित समुदायों की उपेक्षा की। उन्होंने सपा पर तुष्टिकरण की राजनीति और OBC आरक्षण को यादव-मुस्लिम समुदायों तक सीमित रखने का भी आरोप लगाया।
राजभर ने किन जातियों का उल्लेख किया?
राजभर ने पाल, प्रजापति, बिंद, केवट, मल्लाह, राजभर, निषाद, मांझी, दर्जी, तेली, फकीर और बंजारा समेत जाटव, धानुक, धोबी और लोधी जातियों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि ये सभी अति पिछड़े और दलित समुदाय सपा के शासनकाल में हाशिए पर रहे।
राजभर ने सपा के शासनकाल के बारे में क्या कहा?
राजभर ने कहा कि सपा सरकार के 13 वर्षों में गैर-यादव OBC और दलित समुदायों की दो पीढ़ियाँ बर्बाद हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान इन समुदायों के युवा ईंट-गारा ढोने, रिक्शा चलाने और ढाबों पर काम करने को मजबूर हुए।
राजभर ने अखिलेश यादव को क्या चेतावनी दी?
राजभर ने कहा कि अगर सपा ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो पार्टी टूट कर रहेगी। उन्होंने अखिलेश को सीधे चुनौती दी कि अगर उन्हें राजभर से समस्या है तो वे उनसे लड़ें, न कि उनके समुदाय के लोगों को धमकाएँ।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्यों अहम है?
यह बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अति पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक ध्रुवीकरण के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। राजभर भाजपा नीत गठबंधन के सहयोगी हैं और उनका यह हमला सपा के पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक वोट आधार को कमज़ोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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