ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला: कन्नौज सांसद निधि में भेदभाव का आरोप, बोले- गैर-यादव OBC अंधेरे में
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 28 जून को समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि कन्नौज लोकसभा क्षेत्र में सांसद निधि का खर्च चुनिंदा इलाकों तक सीमित रखा गया, जबकि गैर-यादव पिछड़े वर्गों और दलित समाज की लगातार अनदेखी की गई। उनका यह हमला सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए सामने आया, जो देखते-देखते राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया।
सांसद निधि पर भेदभाव का आरोप
राजभर ने अखिलेश यादव को 'राजा बाबू' संबोधित करते हुए लिखा कि कन्नौज में सांसद निधि का उपयोग केवल 'सपाई अब्दुल्लों के मोहल्ले' को रोशन करने में किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जाटव, धानुक, धोबी और लोधी समुदायों की गलियाँ अँधेरे में क्यों छोड़ दी गईं, जबकि ये सभी उसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। राजभर के अनुसार, यह चयनात्मक विकास तुष्टिकरण की राजनीति का स्पष्ट उदाहरण है।
OBC आरक्षण पर सपा पर निशाना
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल यादव और मुस्लिम समुदायों तक सिमट कर रह गया। उन्होंने कहा कि इसी कारण पाल, प्रजापति, बिंद, केवट, मल्लाह, राजभर, निषाद, मांझी, दर्जी, तेली, फकीर और बंजारा समेत पूरे अति पिछड़े और दलित समाज के युवा आज ईंट-गारा ढोने, रिक्शा चलाने या ढाबों पर काम करने को मजबूर हैं। उनका कहना था कि सपा सरकार के 13 वर्षों में इन समुदायों की दो पीढ़ियाँ बर्बाद हो गईं।
हिंसा और धमकी के आरोप
राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि मुरादाबाद और बांदा में उनके समुदाय की महिलाओं को सपा कार्यकर्ताओं द्वारा परेशान किया जा रहा है और धमकियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को हिंदू होने की वजह से तो कुछ को गैर-यादव ओबीसी यानी कुर्मी होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। राजभर ने इसे सपा की 'दबंगई और गुंडई' की संस्कृति का हिस्सा बताया।
अखिलेश को सीधी चुनौती
राजभर ने अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि अगर उन्हें राजभर से समस्या है, तो वे सीधे उनसे लड़ें — न कि उनके समुदाय के लोगों को धमकाएँ। उन्होंने कहा कि गैर-यादव ओबीसी और दलित जातियों के हित के लिए वे न झुकेंगे और न रुकेंगे। राजभर ने चेतावनी दी कि यदि सपा में सुधार नहीं हुआ, तो पार्टी टूट कर रहेगी।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है और अति पिछड़ा वर्ग का राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़ हो रहा है। गौरतलब है कि राजभर पहले सपा के साथ गठबंधन में रह चुके हैं और अब भाजपा नीत गठबंधन का हिस्सा हैं। उनका यह हमला सपा के पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक समीकरण को सीधी चुनौती देता है।