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राजभर का अखिलेश पर हमला: 'बहुजनों और गैर यादव पिछड़ों की 5 वारदातों पर क्यों है खामोशी?'

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राजभर का अखिलेश पर हमला: 'बहुजनों और गैर यादव पिछड़ों की 5 वारदातों पर क्यों है खामोशी?'

सारांश

राजभर ने अखिलेश यादव को एक्स पर सीधे चुनौती दी — पाँच दिनों में बहुजन और गैर यादव पिछड़ों से जुड़ी पाँच बड़ी वारदातों पर सपा प्रमुख की खामोशी को उनके पीडीए नारे का खोखलापन बताया। 2027 से पहले यह टकराव यूपी की पिछड़ा राजनीति की नई लकीर खींच रहा है।

मुख्य बातें

ओमप्रकाश राजभर ने 2 जून 2026 को एक्स पर अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला।
पिछले 5 दिनों में बहुजन व गैर यादव पिछड़े वर्ग से जुड़ी 5 बड़ी वारदातों पर सपा प्रमुख की चुप्पी पर सवाल उठाए।
घटनाओं में रामजन्म राजभर की हत्या, लखनऊ में संदीप सिंह की हत्या और चंदौली में गार्गी पटेल से मारपीट शामिल।
राजभर ने ₹45 लाख और ग्रेटर नोएडा में चार फ्लैट के अखलाक प्रकरण का संदर्भ देकर सपा पर चयनात्मक संवेदनशीलता का आरोप लगाया।
सपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने 2 जून 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार किया। राजभर ने आरोप लगाया कि बहुजन और गैर यादव पिछड़े वर्ग के विरुद्ध पिछले पाँच दिनों में हुई पाँच बड़ी वारदातों पर सपा प्रमुख की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। यह टकराव ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में पिछड़े और दलित वर्ग की राजनीति एक बार फिर केंद्र में है।

एक्स पर राजभर का सीधा वार

राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए लिखा कि यदि उन्हें लगता है कि धमकियों से वे चुप हो जाएँगे, तो यह उनकी गलतफ़हमी है। उन्होंने कहा, 'गरीबों, बहुजनों, आम नागरिकों और गैर-यादव ओबीसी वर्ग के खिलाफ आपके वोटर पिछले 5 दिन में 5 बड़ी वारदातें कर दिए हैं और आप चाहते हैं कि मैं चुप रहूँ — यह नहीं हो सकता।'

राजभर ने सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर भी सवाल उठाया और पूछा, 'क्या यही है आपका पीडीए?'

किन घटनाओं का किया उल्लेख

राजभर ने अपनी पोस्ट में जिन घटनाओं का जिक्र किया, उनमें शामिल हैं — सपा विधायक महाराजी प्रजापति से मारपीट, चंदौली में महिला सपा जिलाध्यक्ष गार्गी पटेल से मारपीट, रामजन्म राजभर की हत्या, धनराज मौर्य और सूर्या चौहान से जुड़ी घटनाएँ, तथा लखनऊ में संदीप सिंह की कथित निर्मम हत्या। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सभी घटनाओं के पीछे सपा से जुड़े लोग हैं और अखिलेश यादव ने न घायलों को ढाँढस बँधाया, न मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

अखलाक प्रकरण का संदर्भ

राजभर ने अखलाक की मौत का भी उल्लेख किया और कहा कि उस मामले में अखिलेश यादव ने ₹45 लाख और ग्रेटर नोएडा में चार फ्लैट देने की बात की थी, लेकिन बहुजन और पिछड़े वर्ग की पीड़ा पर उनकी जुबान नहीं खुलती। उन्होंने इसे चयनात्मक संवेदनशीलता बताया।

राजभर की चुनौती और आत्मकथ्य

राजभर ने अखिलेश यादव की पृष्ठभूमि से तुलना करते हुए कहा कि वे स्वयं 'टेम्पू चलाकर' दलितों और पिछड़ों के लिए संघर्ष करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा, 'आप नवाब साहब हैं, आपने दर्द नहीं सहा, ठोकरें नहीं सही, सिपाही की गालियाँ नहीं सुनीं।' उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अखिलेश यादव 'ट्विटर, एसी और पीसी' वाले नेता हैं और कम से कम इस मुद्दे पर एसी में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस ही कर दें।

आगे क्या होगा

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राजभर का यह हमला उत्तर प्रदेश में गैर यादव पिछड़े वर्ग को लेकर सपा और भाजपा गठबंधन के बीच जारी खींचतान का हिस्सा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस वर्ग की राजनीतिक गोलबंदी तेज़ होने के संकेत हैं। सपा की ओर से अभी तक इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे भाजपा गठबंधन 2027 से पहले भुनाना चाहता है। सपा का पीडीए फ्रेम इसी वर्ग पर टिका है, इसलिए राजभर का निशाना रणनीतिक रूप से सटीक है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि राजभर स्वयं सत्तारूढ़ गठबंधन में हैं — ऐसे में पिछड़ों पर अत्याचार की घटनाओं की जवाबदेही केवल विपक्ष तक सीमित करना एकांगी तस्वीर पेश करता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस विरोधाभास को नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने आरोप लगाया कि पिछले पाँच दिनों में बहुजन और गैर यादव पिछड़े वर्ग से जुड़ी पाँच बड़ी वारदातों पर अखिलेश यादव ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने इसे सपा के पीडीए नारे का खोखलापन बताया।
राजभर ने किन घटनाओं का जिक्र किया?
राजभर ने सपा विधायक महाराजी प्रजापति से मारपीट, चंदौली में गार्गी पटेल से मारपीट, रामजन्म राजभर की हत्या, धनराज मौर्य और सूर्या चौहान से जुड़ी घटनाएँ तथा लखनऊ में संदीप सिंह की हत्या का उल्लेख किया।
राजभर ने अखलाक प्रकरण का जिक्र क्यों किया?
राजभर ने अखलाक की मौत पर अखिलेश यादव द्वारा ₹45 लाख और ग्रेटर नोएडा में चार फ्लैट देने का उल्लेख करते हुए कहा कि सपा प्रमुख की संवेदनशीलता चयनात्मक है — बहुजन और पिछड़े वर्ग की पीड़ा पर उनकी जुबान नहीं खुलती।
सपा के पीडीए नारे पर राजभर का क्या कहना है?
राजभर ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे को खोखला बताया और सवाल किया कि यदि इन्हीं वर्गों पर अत्याचार हो और सपा प्रमुख चुप रहें, तो पीडीए का नारा किस काम का।
इस विवाद का 2027 के चुनाव पर क्या असर हो सकता है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले गैर यादव पिछड़े वर्ग की गोलबंदी निर्णायक हो सकती है। राजभर का यह हमला इसी वर्ग को सपा से दूर करने और भाजपा गठबंधन के करीब लाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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