बेलगावी के मराठी मतदाताओं के लिए SIR फॉर्म मराठी में मिले — अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने 19 जुलाई 2026 को भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर मांग की है कि कर्नाटक के बेलगावी (बेलगाम) और अन्य मराठी भाषी सीमावर्ती क्षेत्रों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फॉर्म मराठी भाषा में उपलब्ध कराए जाएं। सांसद का कहना है कि वर्तमान में ये फॉर्म केवल कन्नड़ में उपलब्ध हैं, जिससे हजारों मराठीभाषी मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित हो सकते हैं।
भाषाई बाधा और मतदाताओं की समस्या
सावंत ने पत्र में स्पष्ट किया कि बेलगावी जिले और आसपास के कई इलाकों में बड़ी आबादी केवल मराठी पढ़ती, लिखती और समझती है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को कन्नड़ भाषा की सीमित या कोई जानकारी नहीं है। उनके अनुसार, SIR फॉर्म कथित तौर पर केवल कन्नड़ में उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे इन मतदाताओं को फॉर्म समझने और सही तरीके से भरने में गंभीर कठिनाई हो रही है।
सांसद ने चेताया कि मराठी में फॉर्म न होने के कारण कई पात्र मतदाता दूसरों की सहायता लेने को विवश हैं, जिससे फॉर्म में गलतियाँ, अधूरी जानकारी या गलत घोषणाएं होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप मतदाता सूची में नाम शामिल होने में देरी, आपत्ति या नाम हटने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
कानूनी आधार: 1995 का कर्नाटक हाई कोर्ट आदेश
अरविंद सावंत ने अपनी मांग को 1995 के कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश से भी जोड़ा, जिसमें मराठी भाषी भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें सार्वजनिक सेवाओं तक भाषा के कारण वंचित न होने देने का निर्देश दिया गया था। उनका तर्क है कि चुनाव से जुड़े फॉर्म का मराठी में उपलब्ध होना इसी न्यायिक आदेश की भावना के अनुरूप है।
यह ऐसे समय में आया है जब बेलगावी क्षेत्र में मराठी-कन्नड़ भाषाई विवाद दशकों से राजनीतिक संवेदनशीलता का विषय रहा है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र एकीकरण समिति (MES) जैसे संगठन लंबे समय से इस क्षेत्र के मराठी भाषी नागरिकों के अधिकारों की वकालत करते रहे हैं।
चुनाव आयोग से चार प्रमुख मांगें
सावंत ने अपने पत्र में भारत निर्वाचन आयोग से चार ठोस कदम उठाने की अपील की है:
पहली मांग — बेलगावी और कर्नाटक के अन्य मराठी भाषी क्षेत्रों में SIR फॉर्म मराठी भाषा में उपलब्ध कराए जाएं। दूसरी मांग — जहाँ मराठी फॉर्म उपलब्ध हों, वहाँ मतदाताओं को मराठी में भरे गए फॉर्म जमा करने की अनुमति दी जाए। तीसरी मांग — कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को मराठी फॉर्म उपलब्ध कराने और स्वीकार करने के निर्देश जारी किए जाएं। चौथी मांग — SIR प्रक्रिया के दौरान मराठी भाषा में मतदाता सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
लोकतांत्रिक समावेश का सवाल
सावंत का कहना है कि मराठी में SIR फॉर्म उपलब्ध कराने से न केवल मतदाताओं की व्यावहारिक परेशानियाँ दूर होंगी, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी मजबूत होगी और चुनाव प्रक्रिया में आम नागरिकों का विश्वास भी बढ़ेगा। भाषाई अल्पसंख्यकों के मतदान अधिकार सुनिश्चित करना संविधान की समावेशी भावना के अनुकूल है। अब देखना होगा कि भारत निर्वाचन आयोग इस माँग पर क्या रुख अपनाता है।