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कर्नाटक SIR: गृह मंत्री परमेश्वर बोले — किसी पात्र मतदाता का अधिकार नहीं छिनना चाहिए

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कर्नाटक SIR: गृह मंत्री परमेश्वर बोले — किसी पात्र मतदाता का अधिकार नहीं छिनना चाहिए

सारांश

कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने बेलगावी में साफ कहा — SIR के नाम पर किसी पात्र मतदाता का हक नहीं छिनना चाहिए। BLO को समन्वय से काम करने और उपायुक्तों को निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार देने की बात कही। साथ ही केंद्र पर जल जीवन मिशन और मनरेगा फंड में देरी का आरोप भी लगाया।

मुख्य बातें

परमेश्वर ने 1 जुलाई 2026 को बेलगावी में कहा कि SIR के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे।
BLO और संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए।
उपायुक्तों और तहसीलदारों को निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दिया गया।
परमेश्वर ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन और मनरेगा के लिए केंद्र से पर्याप्त फंड नहीं मिला।
KPCC अध्यक्ष के कार्यकाल में 13 कांग्रेस कार्यालय बने; 'भारत जोड़ो भवन' पर ₹20 करोड़ खर्च हुए।
पार्टी ने 2028 चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की।

कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने 1 जुलाई 2026 को बेलगावी में स्पष्ट किया कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान किसी भी पात्र मतदाता को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। बेलगावी जिला कांग्रेस कार्यालय में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने इस प्रक्रिया को पूरी सावधानी और पारदर्शिता के साथ लागू करने पर जोर दिया।

SIR प्रक्रिया पर मुख्य निर्देश

परमेश्वर ने कहा कि SIR को लेकर पूरे देश में चर्चा हो रही है और दूसरे राज्यों में चुनाव के दौरान सामने आई समस्याओं से सबक लेते हुए कर्नाटक को अधिक सतर्क रहना होगा। उन्होंने निर्देश दिया कि हर विधानसभा क्षेत्र में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और अन्य संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना वजह सूची से न हटे।

उन्होंने यह भी बताया कि उपायुक्तों और तहसीलदारों को निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दे दिया गया है, जिससे प्रक्रिया सरल होगी और नागरिकों को कम परेशानी उठानी पड़ेगी।

केंद्र-राज्य वित्तीय विवाद

परमेश्वर ने केंद्र और राज्य के संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक को केंद्रीय अनुदान समय पर न मिलने से विकास योजनाओं को लागू करने में कठिनाइयाँ आई हैं। उनके अनुसार, जल जीवन मिशन और मनरेगा जैसी योजनाओं के लिए भी पर्याप्त फंड नहीं मिला, जिसका असर गरीबों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने पर पड़ा।

संगठनात्मक पुनर्गठन की योजना

पार्टी संगठन के सवाल पर परमेश्वर ने कहा कि जब भी कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) का नया अध्यक्ष पद संभालता है, तो पदाधिकारियों में बदलाव स्वाभाविक है। उन्होंने निर्देश दिया कि मंत्री, विधायक और जिला कांग्रेस अध्यक्ष मिलकर महासचिव समेत विभिन्न संगठनात्मक पदों के लिए योग्य कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करें, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए KPCC अध्यक्ष के पास भेजा जाएगा।

पार्टी कार्यालयों और राजनीतिक सफर का जिक्र

परमेश्वर ने KPCC अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि उस दौरान जिला और तालुका स्तर पर करीब 13 कांग्रेस कार्यालय बनाए गए। 'भारत जोड़ो भवन' का निर्माण लगभग ₹20 करोड़ की लागत से हुआ, हालांकि उद्घाटन से पहले ही उन्होंने पद छोड़ दिया था। बेलगावी जिला कांग्रेस कार्यालय के निर्माण में पूर्व मंत्री लक्ष्मी हेब्बलकर और मंत्री सतीश जारकीहोली के प्रयासों की उन्होंने सराहना की। उन्होंने बताया कि कार्यालय की जमीन खरीद के लिए ₹25 लाख मंजूर किए गए थे और तत्कालीन मंत्री डी.के. शिवकुमार ने इसकी जोरदार पैरवी की थी।

परमेश्वर ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने सात वर्षों तक पार्टी महासचिव के रूप में कार्य किया। पूर्व मुख्यमंत्री धर्म सिंह और एस.एम. कृष्णा ने उन्हें उपाध्यक्ष नियुक्त किया, और बाद में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने उन्हें कांग्रेस कार्य समिति में शामिल किया। अंत में उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर गरीबों, दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए काम करें, ताकि 2028 के बाद भी पार्टी जनता का विश्वास बनाए रख सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए मतदाता सूची की शुद्धता सीधे राजनीतिक हित से जुड़ी है। केंद्र पर जल जीवन मिशन और मनरेगा फंड में देरी का आरोप नया नहीं है, लेकिन इसे SIR बैठक में उठाना यह संकेत देता है कि राज्य सरकार केंद्र-राज्य तनाव को जनाधार के मुद्दे के रूप में पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है। असली परीक्षा यह होगी कि BLO स्तर पर समन्वय के ये निर्देश ज़मीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक चुनावी प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है — अपात्र नाम हटाए जाते हैं और नए पात्र मतदाता जोड़े जाते हैं। कर्नाटक में यह प्रक्रिया 2026 में चल रही है और इसे लेकर राज्यभर में चर्चा है।
गृह मंत्री परमेश्वर ने SIR पर क्या कहा?
गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने 1 जुलाई 2026 को बेलगावी में कहा कि SIR प्रक्रिया में किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना वजह सूची से नहीं हटना चाहिए। उन्होंने BLO और अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।
निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार किसे दिया गया है?
परमेश्वर ने बताया कि उपायुक्तों और तहसीलदारों को निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दे दिया गया है। इससे SIR प्रक्रिया में मतदाताओं को दस्तावेज़ जुटाने में आसानी होगी।
परमेश्वर ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
परमेश्वर ने कहा कि केंद्रीय अनुदान समय पर न मिलने से कर्नाटक में विकास योजनाएँ प्रभावित हुई हैं। जल जीवन मिशन और मनरेगा जैसी योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिला, जिसका असर गरीबों तक लाभ पहुँचाने पर पड़ा।
KPCC संगठन में बदलाव की प्रक्रिया क्या है?
परमेश्वर ने बताया कि मंत्री, विधायक और जिला कांग्रेस अध्यक्ष मिलकर महासचिव समेत विभिन्न पदों के लिए योग्य कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करेंगे, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए KPCC अध्यक्ष के पास भेजा जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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