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कर्नाटक में PRC के लिए 11 मानदंड तय, SIR प्रक्रिया के बीच 4.8 करोड़ प्रमाण पत्र वितरण शुरू

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कर्नाटक में PRC के लिए 11 मानदंड तय, SIR प्रक्रिया के बीच 4.8 करोड़ प्रमाण पत्र वितरण शुरू

सारांश

भारतीय चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और निवास विवादों के बीच कर्नाटक सरकार ने PRC के लिए 11 मानदंड तय किए। मुख्यमंत्री शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बेंगलुरु में सेवा लॉन्च की; 4.8 करोड़ प्रमाण पत्र घर-घर भेजे जा रहे हैं।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने 20 जुलाई 2026 को स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) के लिए 11 पात्रता मानदंड निर्धारित किए।
शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर ने विधान सौधा में निःशुल्क जाति व PRC वितरण सेवा का शुभारंभ किया।
PRC उन 11 दस्तावेजों में से एक है जिन्हें ECI मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए मान्यता देता है।
वितरण के लिए लगभग 48 लाख जाति प्रमाण पत्र चिह्नित; 4.8 करोड़ प्रमाण पत्र अटल जनस्नेही केंद्रों के माध्यम से उपायुक्तों को भेजे जा चुके हैं।
नागरिक सरकारी वेबसाइट या व्हाट्सएप के ज़रिए प्रमाण पत्र निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।
शिकायतों के लिए तहसीलदार से लेकर उपायुक्त स्तर तक अपील का प्रावधान; पुनः सत्यापन का अधिकार भी दिया गया।

कर्नाटक सरकार ने 20 जुलाई 2026 को स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) जारी करने के लिए 11 पात्रता मानदंड निर्धारित किए हैं — यह कदम भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और राज्य में निवास संबंधी बढ़ते विवादों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने बेंगलुरु के विधान सौधा सम्मेलन हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी।

शुभारंभ और घोषणा का संदर्भ

इस अवसर पर राज्य की निःशुल्क जाति प्रमाण पत्र और स्थायी निवास प्रमाण पत्र वितरण सेवा का औपचारिक शुभारंभ मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने संयुक्त रूप से किया। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि PRC उन 11 दस्तावेजों में से एक है जिन्हें चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए मान्यता देता है, जिससे इस प्रमाण पत्र का महत्व और भी बढ़ जाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य में विवाद गहराता जा रहा है और कथित तौर पर गैर-निवासियों एवं अवैध प्रवासियों द्वारा कर्नाटक के निवासियों के लिए निर्धारित सरकारी लाभों के दुरुपयोग की चिंताएँ उठाई जा रही हैं।

PRC के लिए 11 पात्रता मानदंड

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बताया कि निम्नलिखित में से कोई भी एक शर्त पूरी करने वाला आवेदक PRC के लिए पात्र होगा:

1. कर्नाटक में जन्म। 2. माता-पिता का कम से कम 10 वर्षों से राज्य में स्थायी निवास। 3. कर्नाटक में 12वीं कक्षा या 10 वर्ष की शिक्षा पूरी करना। 4. जीवनसाथी, माता-पिता या कानूनी अभिभावक का राज्य का स्थायी निवासी होना। 5. कर्नाटक में आवासीय या अचल संपत्ति का स्वामित्व। 6. कानूनी उत्तराधिकारी का दर्जा। 7. मतदाता सूची में नाम। 8. आधार कार्ड। 9. राशन कार्ड, राजस्व रिकॉर्ड या अन्य सरकारी दस्तावेजों के माध्यम से दस्तावेजी प्रमाण। 10. कर्नाटक में कम से कम 7 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी। 11. कर्नाटक के निवासियों से विवाहित व्यक्ति।

गौरतलब है कि इनमें से किसी एक मानदंड को पूरा करना ही पर्याप्त होगा — सभी की आवश्यकता नहीं।

जाति प्रमाण पत्र वितरण का दायरा

सरकार ने बड़े पैमाने पर जाति प्रमाण पत्रों के वितरण की भी शुरुआत की है। वितरण के लिए चिह्नित लगभग 48 लाख जाति प्रमाण पत्रों में श्रेणी 2A, 2B, 3A और 3B के तहत 13 लाख लाभार्थी, श्रेणी 1 के तहत 86 लाख और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के 26 करोड़ प्रमाण पत्र धारक शामिल हैं।

परमेश्वर ने बताया कि लगभग 4.8 करोड़ प्रमाण पत्र अटल जनस्नेही केंद्रों के माध्यम से उपायुक्तों को भेजे जा चुके हैं। जिला प्रशासन तहसीलदारों और अन्य जमीनी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से घर-घर जाकर वितरण की निगरानी कर रहा है।

डिजिटल पहुँच और शिकायत निवारण

नागरिक सरकारी वेबसाइट के माध्यम से अपने प्रमाण पत्र निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं या व्हाट्सएप के ज़रिए प्राप्त कर सकते हैं। कठिनाइयों का सामना कर रहे आवेदकों के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित किया गया है — तहसीलदार, उप तहसीलदार और उप-विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपील दायर की जा सकती है, जबकि उपायुक्तों को शिकायतों के आधार पर पुनः सत्यापन का आदेश देने का अधिकार दिया गया है।

आगे की राह

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि जो लोग निर्धारित 11 मानदंडों में से किसी को भी पूरा नहीं करते, वे PRC प्रणाली के दायरे से बाहर रहेंगे। यह पहल SIR प्रक्रिया में राज्य के वास्तविक निवासियों को मज़बूत दस्तावेजी आधार देने और कथित अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन की होगी — क्योंकि तहसीलदार स्तर पर विवेकाधिकार और सत्यापन की खामियाँ अतीत में भी विवाद का कारण बनी हैं। 4.8 करोड़ प्रमाण पत्रों का घर-घर वितरण प्रशासनिक क्षमता की एक बड़ी परीक्षा है, और बिना पारदर्शी ऑडिट ट्रेल के यह पहल भी उन योजनाओं की कतार में जुड़ सकती है जो घोषणा में बड़ी और अमल में कमज़ोर रहती हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) क्या है और इसे क्यों लाया गया?
PRC एक सरकारी दस्तावेज़ है जो यह प्रमाणित करता है कि कोई व्यक्ति कर्नाटक का स्थायी निवासी है। इसे SIR प्रक्रिया के दौरान निवास विवादों और कथित अनियमितताओं के मद्देनजर लाया गया है, और यह ECI द्वारा मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए मान्यता प्राप्त 11 दस्तावेजों में से एक है।
PRC के लिए कौन-कौन से 11 मानदंड निर्धारित किए गए हैं?
कर्नाटक में जन्म, माता-पिता का 10 वर्षों से राज्य में निवास, राज्य में 12वीं या 10 वर्ष की शिक्षा, जीवनसाथी या अभिभावक का स्थायी निवासी होना, राज्य में संपत्ति स्वामित्व, कानूनी उत्तराधिकारी दर्जा, मतदाता सूची में नाम, आधार कार्ड, राशन कार्ड या राजस्व रिकॉर्ड, 7 वर्ष की सरकारी सेवा, और कर्नाटक निवासी से विवाह — इनमें से कोई एक शर्त पूरी करना पर्याप्त है।
जाति प्रमाण पत्र और PRC कैसे प्राप्त किए जा सकते हैं?
नागरिक सरकारी वेबसाइट से निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं या व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन तहसीलदारों और जमीनी अधिकारियों के ज़रिए घर-घर वितरण भी कर रहा है।
PRC के लिए आवेदन में कठिनाई होने पर क्या करें?
सरकार ने एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया है जिसमें तहसीलदार, उप तहसीलदार और उप-विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपील की जा सकती है। उपायुक्तों को शिकायतों के आधार पर पुनः सत्यापन का आदेश देने का अधिकार भी दिया गया है।
SIR प्रक्रिया से PRC का क्या संबंध है?
ECI की SIR प्रक्रिया मतदाता सूची की गहन समीक्षा है जिसमें निवास प्रमाण अनिवार्य है। PRC इसी प्रक्रिया में कर्नाटक के वास्तविक निवासियों को मज़बूत दस्तावेजी आधार देने के लिए लाया गया है, ताकि कथित तौर पर गैर-निवासियों द्वारा राज्य के लाभों के दुरुपयोग को रोका जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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