25 अगस्त 2026
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मतदाता सूची पुनरीक्षण: डीके शिवकुमार ने CEC को पत्र लिखा, 1.5 करोड़ कर्नाटक मतदाताओं पर संकट

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मतदाता सूची पुनरीक्षण: डीके शिवकुमार ने CEC को पत्र लिखा, 1.5 करोड़ कर्नाटक मतदाताओं पर संकट

सारांश

कर्नाटक में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान 1.5 करोड़ पात्र मतदाताओं पर नाम कटने का संकट मंडरा रहा है। CM शिवकुमार ने CEC को पत्र लिखकर प्रक्रिया में पारदर्शिता, समय विस्तार और अतिरिक्त अधिकारियों की माँग की है।

मुख्य बातें

कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने 25 अगस्त 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा।
राज्य के 5.54 करोड़ मतदाताओं में से 1.08 करोड़ को एएसडीडीओ श्रेणी में रखा गया; कुल 1.5 करोड़ को दावा प्रस्तुत करना पड़ सकता है।
अकेले बेंगलुरु में 46.88 लाख मतदाता एएसडीडीओ श्रेणी में; 43.8 लाख को सत्यापन नोटिस मिलने की संभावना।
शिवकुमार ने प्रत्येक मतदाता को दावा दाखिल करने के लिए कम से कम 3-4 सप्ताह का समय देने की माँग की।
अधिक मामलों वाले जिलों में अतिरिक्त निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की नियुक्ति का अनुरोध किया गया।
चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी प्रतीक्षित है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 25 अगस्त 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम सूची से न हटाए जाने की अपील की है। शिवकुमार ने आशंका जताई है कि अपर्याप्त समय और प्रक्रियागत खामियों के चलते लगभग 1.5 करोड़ वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कर्नाटक में कुल 5.54 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 1.08 करोड़ को एएसडीडीओ (अनुपस्थित, कहीं और चले गए, मृत, जाली या अन्य) श्रेणी में रखा गया है। इसके अतिरिक्त, 24 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची जारी होने के बाद लगभग 43.8 लाख मतदाताओं को 'तार्किक विसंगतियों' या वर्ष 2002 की मतदाता सूची से न जुड़े होने के कारण सत्यापन नोटिस मिलने की संभावना है।

अकेले बेंगलुरु में 46.88 लाख मतदाता एएसडीडीओ श्रेणी में रखे गए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्यभर में कुल मिलाकर लगभग 1.5 करोड़ मतदाताओं को अपना नाम सूची में बनाए रखने या पुनः शामिल कराने के लिए दावा प्रस्तुत करना पड़ सकता है।

किन मतदाताओं पर असर

शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि एएसडीडीओ श्रेणी में आए अनेक लोग वास्तविक और पात्र मतदाता हैं, जो बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के घर-घर सत्यापन के दौरान नौकरी, स्वास्थ्य या अन्य व्यक्तिगत कारणों से घर पर उपस्थित नहीं थे। इसके अलावा, जो मतदाता एक मतदान केंद्र क्षेत्र से दूसरे में स्थानांतरित हुए हैं, उनका पुराने पते से नाम हट गया, लेकिन नए पते पर पंजीकरण का अवसर नहीं मिला।

विशेष रूप से बेंगलुरु जैसे घनी आबादी वाले शहरों में सड़क के एक तरफ से दूसरी तरफ जाने मात्र से मतदान केंद्र बदल सकता है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है। 'अनुपस्थित' और 'स्थानांतरित' श्रेणी के मतदाताओं को नोटिस तक नहीं मिलता, जिससे उन्हें अपना नाम हटने की जानकारी ही नहीं होती।

मुख्यमंत्री की प्रमुख माँगें

शिवकुमार ने चुनाव आयोग से दावों एवं आपत्तियों की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सत्यापन का सामना कर रहे प्रत्येक मतदाता को जवाब देने और दस्तावेज जमा करने के लिए कम से कम तीन से चार सप्ताह का समय मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2023 के चुनावी रोल मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार चुनाव आयोग अधिसूचना जारी कर यह अवधि बढ़ा सकता है, और चूँकि निकट भविष्य में कर्नाटक में कोई चुनाव प्रस्तावित नहीं है, इसलिए ऐसा करना व्यावहारिक रूप से संभव है।

मुख्यमंत्री ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड समिति बैठकें आयोजित करने के स्पष्ट निर्देश देने की भी माँग की, जिनमें प्रारूप मतदाता सूची पढ़कर सुनाई जाए और संभावित त्रुटियाँ चिह्नित की जाएँ।

जनशक्ति और प्रशासनिक सहयोग

शिवकुमार ने चेताया कि बड़ी संख्या में दावों और आपत्तियों को मौजूदा संसाधनों के साथ समय पर निपटाना कठिन होगा। उन्होंने चुनाव आयोग से अधिक मामलों वाले जिलों में अतिरिक्त निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति का अनुरोध किया। कर्नाटक सरकार ने व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने और प्रशासनिक सहयोग देने की पूरी तैयारी का आश्वासन दिया है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य ऐसी मतदाता सूची तैयार करना होना चाहिए जिस पर जनता को पूरा भरोसा हो — जिसमें हर पात्र नागरिक का नाम शामिल हो, अपात्र नाम हटाए जाएँ और कोई भी व्यक्ति केवल समय, सूचना या अवसर की कमी के कारण मताधिकार से वंचित न हो। चुनाव आयोग की ओर से इस पत्र पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रवासी और कामकाजी नागरिकों को समायोजित करने में सक्षम है। बेंगलुरु जैसे महानगर में 46.88 लाख मतदाताओं का एएसडीडीओ श्रेणी में जाना दर्शाता है कि शहरी प्रवासिता और BLO की एकल-विज़िट पद्धति के बीच गहरी खाई है। आलोचकों का कहना है कि यह मुद्दा तकनीकी नहीं, राजनीतिक भी है — विपक्षी राज्य सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग के बीच विश्वास की कमी इसे और संवेदनशील बनाती है। असली परीक्षा यह है कि चुनाव आयोग समयसीमा विस्तार की माँग पर कितनी जल्दी और किस रुख से जवाब देता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद क्या है?
कर्नाटक में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 5.54 करोड़ मतदाताओं में से 1.08 करोड़ को एएसडीडीओ श्रेणी में रखा गया है और करीब 1.5 करोड़ को दावा प्रस्तुत करना पड़ सकता है। CM शिवकुमार का कहना है कि इनमें से अनेक वास्तविक और पात्र मतदाता हैं जो BLO सत्यापन के समय घर पर उपस्थित नहीं थे।
एएसडीडीओ श्रेणी का मतदाताओं पर क्या असर होगा?
एएसडीडीओ (अनुपस्थित, कहीं और चले गए, मृत, जाली या अन्य) श्रेणी में आने वाले मतदाताओं को अपना नाम सूची में बनाए रखने के लिए दावा प्रस्तुत करना होगा। यदि वे समय पर दावा नहीं कर पाए तो उनका नाम अंतिम मतदाता सूची से हट सकता है और वे मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग से क्या माँगें रखी हैं?
शिवकुमार ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: दावों एवं आपत्तियों की अवधि कम से कम 3-4 सप्ताह बढ़ाना, ग्राम सभा और वार्ड समिति बैठकों के माध्यम से जन-जागरूकता सुनिश्चित करना, और अधिक मामलों वाले जिलों में अतिरिक्त निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की नियुक्ति।
बेंगलुरु में मतदाता सूची की स्थिति कितनी गंभीर है?
बेंगलुरु में अकेले 46.88 लाख मतदाता एएसडीडीओ श्रेणी में रखे गए हैं। शहर की घनी आबादी और लगातार बदलते पते के कारण यहाँ सड़क के एक तरफ से दूसरी तरफ जाने मात्र से मतदान केंद्र बदल सकता है, जिससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हट सकते हैं।
क्या चुनाव आयोग दावों की समय-सीमा बढ़ा सकता है?
हाँ, 2023 के चुनावी रोल मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार चुनाव आयोग अधिसूचना जारी कर यह अवधि बढ़ा सकता है। चूँकि निकट भविष्य में कर्नाटक में कोई चुनाव प्रस्तावित नहीं है, इसलिए समय-सीमा विस्तार व्यावहारिक रूप से संभव है — हालाँकि आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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