7 जुलाई 2026
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कर्नाटक SIR विवाद: प्रह्लाद जोशी ने चुनाव आयोग से की मुलाकात, CM शिवकुमार पर लगाए गंभीर आरोप

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कर्नाटक SIR विवाद: प्रह्लाद जोशी ने चुनाव आयोग से की मुलाकात, CM शिवकुमार पर लगाए गंभीर आरोप

सारांश

कर्नाटक में SIR को लेकर सियासी घमासान तेज़ हो गया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चुनाव आयोग से मिलकर CM शिवकुमार पर मतदाता सूची शुद्धिकरण को बाधित करने का आरोप लगाया — मदरसों और कांग्रेस नेताओं के घरों पर सामूहिक फॉर्म भरवाने से लेकर मृत मतदाताओं के नाम न हटाने के कथित मौखिक निर्देशों तक।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 7 जुलाई को चुनाव आयोग से मुलाकात कर कर्नाटक SIR में अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई।
आरोप है कि BLO घर-घर जाने की बजाय मदरसों, मस्जिदों और कांग्रेस नेताओं के आवासों पर सामूहिक रूप से फॉर्म भरवा रहे हैं।
जोशी के अनुसार राज्य सरकार ने कथित तौर पर मौखिक निर्देश दिए हैं कि मृत, स्थानांतरित व अवैध प्रवासी मतदाताओं के नाम सूची से न हटाए जाएं।
बेंगलुरु महानगरपालिका के 27 वार्डों में राज्य चुनाव आयोग के ज़रिए समानांतर प्रक्रिया शुरू करने का भी आरोप।
कर्नाटक सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार, 7 जुलाई को नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात कर कर्नाटक में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं। बैठक के बाद उन्होंने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया।

मुख्य आरोप: नियमों की अनदेखी

जोशी ने दावा किया कि चुनाव आयोग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को प्रत्येक मतदाता के घर कम-से-कम तीन बार जाकर इन्युमरेशन फॉर्म देना और वापस लेना अनिवार्य है। उनके अनुसार, कर्नाटक में कई स्थानों पर यह प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही। उनका आरोप है कि इसके बजाय लोगों को मदरसों, मस्जिदों, दरगाहों तथा कांग्रेस नेताओं के आवासों पर एकत्र कर सामूहिक रूप से फॉर्म भरवाए जा रहे हैं।

कथित मौखिक निर्देशों का आरोप

जोशी ने यह भी दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि राज्य सरकार की ओर से कुछ अधिकारियों को कथित तौर पर मौखिक निर्देश दिए गए हैं कि मृत, स्थानांतरित, अवैध अथवा अवैध प्रवासी मतदाताओं के नाम सूची से न हटाए जाएं। उन्होंने कहा, 'यदि ऐसा हो रहा है तो यह पूरी मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया को निरर्थक बना देगा और चुनाव आयोग के उद्देश्य पर सीधा प्रहार होगा।' हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बेंगलुरु नगर निगम चुनाव का संदर्भ

जोशी ने बेंगलुरु महानगरपालिका चुनाव का विशेष उल्लेख किया। उनका कहना है कि जहाँ चुनाव आयोग पहले से SIR चला रहा है, वहीं राज्य चुनाव आयोग के माध्यम से 27 वार्डों में अलग तरीके से समानांतर प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार यह कदम मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान को कमज़ोर करने की रणनीति का हिस्सा है।

शिवकुमार पर सीधा निशाना

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या सरकारी अधिकारी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के इशारे पर काम कर रहे हैं, तो जोशी ने कहा कि उन्हें 'पूरा विश्वास है कि ऐसा ही हो रहा है।' उन्होंने दावा किया कि शिवकुमार खुद सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटता है तो उसकी जिम्मेदारी उनकी सरकार नहीं लेगी। उन्होंने इसे 'लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध एक बड़ा षड्यंत्र' करार दिया। गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा

यह मामला ऐसे समय में उठा है जब कर्नाटक में SIR प्रक्रिया और बेंगलुरु नगर निगम चुनाव दोनों को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। चुनाव आयोग के रुख और राज्य सरकार की संभावित प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि ये अब तक एकतरफा राजनीतिक बयान हैं — कर्नाटक सरकार की ओर से कोई खंडन या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। SIR जैसी प्रक्रियाएँ स्वाभाविक रूप से राजनीतिक रूप से संवेदनशील होती हैं क्योंकि मतदाता सूची से नाम हटाना सत्ता-पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए चुनावी जोखिम रखता है। असली सवाल यह है कि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर स्वतंत्र जाँच करता है या नहीं — क्योंकि बिना सत्यापन के ये आरोप महज़ चुनावी बयानबाज़ी बनकर रह जाएंगे।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) क्या है?
SIR चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान है, जिसमें BLO घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं और मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। कर्नाटक में यह प्रक्रिया इस समय विवादों में है।
प्रह्लाद जोशी ने चुनाव आयोग से मिलकर क्या शिकायत की?
जोशी ने आरोप लगाया कि BLO घर-घर जाने की बजाय मदरसों, मस्जिदों और कांग्रेस नेताओं के घरों पर लोगों को एकत्र कर सामूहिक रूप से फॉर्म भरवा रहे हैं, जो चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। उन्होंने मृत व अवैध मतदाताओं के नाम न हटाने के कथित मौखिक निर्देशों का भी उल्लेख किया।
CM डीके शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
जोशी ने दावा किया कि शिवकुमार स्वयं सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटता है तो उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार नहीं लेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी शिवकुमार के इशारे पर काम कर रहे हैं, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बेंगलुरु नगर निगम चुनाव का इस विवाद से क्या संबंध है?
जोशी के अनुसार, जहाँ चुनाव आयोग पहले से SIR चला रहा है, वहीं राज्य चुनाव आयोग के ज़रिए बेंगलुरु के 27 वार्डों में अलग तरीके से समानांतर प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जा रही है। उनका मानना है कि यह कदम SIR अभियान को कमज़ोर करने की रणनीति है।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
चुनाव आयोग ने जोशी की शिकायत सुन ली है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कर्नाटक सरकार की प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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