रामनगर एसआईआर विवाद: प्रह्लाद जोशी का कर्नाटक सरकार पर चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप, निष्पक्ष जांच की माँग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 4 जुलाई 2025 को आरोप लगाया कि रामनगर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की संवैधानिक प्रक्रिया में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार सीधे हस्तक्षेप कर रही है। केंद्रीय खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री जोशी ने कथित अनियमितताओं की तत्काल एवं निष्पक्ष जांच की माँग करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबु कुमार ने भी रामनगर के उपायुक्त से इस मामले में रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
जोशी ने अपने बयान में दावा किया कि रामनगर में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) का कथित दुरुपयोग किया गया और चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों की खुलेआम अनदेखी की गई। उन्होंने कहा, "रामनगर एसआईआर प्रक्रिया में राज्य सरकार का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप और राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट रूप से झलकता है। निष्पक्ष जांच बिना किसी देरी के की जानी चाहिए।"
जोशी ने आगे आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए मतदाता सूची में हेरफेर की एक सुनियोजित साजिश सरकार के उच्च स्तर पर रची गई प्रतीत होती है। उन्होंने कहा, "विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित चुनाव आयोग के नियमों और दिशानिर्देशों की पूरी तरह से अवहेलना की गई है। बूथ स्तर के अधिकारियों का कथित दुरुपयोग इस पूरी प्रक्रिया को अवैध बनाता है।"
चुनाव आयोग की सक्रियता
इस पूरे विवाद के बीच कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबु कुमार ने रामनगर के उपायुक्त को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह रिपोर्ट एक विवाह हॉल में बीएलओ द्वारा एसआईआर संचालन और चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के कथित उल्लंघन से जुड़ी है। अंबु कुमार ने कहा, "घटना के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी (रामनगर के उपायुक्त) ने मौके का दौरा किया। वे इस मामले में रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।"
कुमारस्वामी के आरोपों से शुरू हुआ विवाद
गौरतलब है कि यह कार्रवाई केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी द्वारा रामनगर जिले में एसआईआर अभ्यास में बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगाने और एक कथित वीडियो जारी करने के एक दिन बाद हुई। कुमारस्वामी ने मतदाता सूची संशोधन में व्यापक अनियमितताओं का दावा किया था, जिसके बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया।
कांग्रेस सरकार पर सीधा निशाना
जोशी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर एक स्वतंत्र संवैधानिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और स्थानीय प्रशासन पर दबाव डालने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "राज्य की कांग्रेस सरकार का हस्तक्षेप और स्थानीय प्रशासन पर कथित दबाव, उस संवैधानिक प्रक्रिया में हुआ है, जिसे स्वतंत्र रूप से चलना चाहिए। यह बेहद निंदनीय है।" जोशी ने यह भी सवाल उठाया कि इन कथित अनियमितताओं से किसके हितों की पूर्ति हो रही है और माँग की कि इस सुनियोजित प्रयास की व्यापक जांच तुरंत शुरू हो।
आगे क्या होगा
रामनगर के उपायुक्त की रिपोर्ट मिलने के बाद चुनाव आयोग आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला कर्नाटक में सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा जनता दल (सेक्युलर) के बीच राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बनता दिख रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग की जांच में कथित उल्लंघनों की पुष्टि होती है या नहीं।