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कर्नाटक एसआईआर में गड़बड़ी: एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन, प्रह्लाद जोशी ने लगाए गंभीर आरोप

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कर्नाटक एसआईआर में गड़बड़ी: एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन, प्रह्लाद जोशी ने लगाए गंभीर आरोप

सारांश

एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के समक्ष कर्नाटक एसआईआर में कथित गड़बड़ियों की शिकायत की — मृत मतदाताओं के नाम न हटाने, बांग्लादेशी नागरिकों को सूची में शामिल करने और बीएलए के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप। आयोग ने जाँच का आश्वासन दिया है।

मुख्य बातें

प्रह्लाद जोशी के नेतृत्व में एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने 7 जुलाई को भारत निर्वाचन आयोग को कर्नाटक एसआईआर में कथित अनियमितताओं पर ज्ञापन सौंपा।
आरोप: हुबली, धारवाड़ और मैसूर में बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की कोशिश।
कुमारस्वामी ने दावा किया कि कर्नाटक में 20 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक रह रहे हैं; साक्ष्य-युक्त पेन ड्राइव आयोग को सौंपी।
अशोक ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को मुस्लिम नामों को सूची से न हटाने के मौखिक निर्देश दिए गए हैं।
एनडीए ने स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करने की माँग की; चुनाव आयोग ने जाँच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
राहुल गांधी पर आरोप: 27 वार्डों में धोखाधड़ी का दावा किया लेकिन औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार, 7 जुलाई को नई दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से कहा कि आयोग ने कर्नाटक में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान कथित अनियमितताओं की जाँच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के इस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों से मुलाकात कर कांग्रेस सरकार पर एसआईआर प्रक्रिया को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।

मुख्य आरोप और शिकायतें

जोशी ने कहा कि कांग्रेस पहले एसआईआर का विरोध करती रही और अब उसके क्रियान्वयन के दौरान कथित अनियमितताओं में संलिप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि हुबली, धारवाड़ और मैसूर जैसे बड़े शहरों में बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की कोशिश हो रही है। ये आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि बूथ लेवल एजेंटों (BLA) को पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही और जब वे एसआईआर फॉर्मों की बड़े पैमाने पर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं, तो अधिकारी उनसे अभद्र व्यवहार करते हैं।

मृत मतदाताओं और पात्रता नियमों पर विवाद

जोशी के अनुसार, अधिकारियों ने उन्हें बताया कि मृत मतदाताओं के नाम सूची से न हटाने के मौखिक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं है, वे केवल माता-पिता या दादा-दादी जैसे निकट संबंधियों के आधार पर पात्रता साबित कर सकते हैं। उनका आरोप है कि कर्नाटक में लोग चाचा और दूर के रिश्तेदारों का हवाला देकर फॉर्म भर रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है।

राहुल गांधी और 27 वार्डों का मामला

जोशी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने बेंगलुरु में मतदाता धोखाधड़ी के आरोप लगाए, लेकिन कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई। एनडीए ने आयोग को बताया कि राहुल गांधी द्वारा उल्लेखित 27 वार्डों में समानांतर एसआईआर प्रक्रिया चलाए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

कुमारस्वामी और अशोक के आरोप

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने दावा किया कि कर्नाटक में 20 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक रह रहे हैं और राज्य सरकार उन्हें मतदाता पहचान पत्र व आधार कार्ड जारी कर संरक्षण दे रही है। उन्होंने कथित अनियमितताओं से जुड़े साक्ष्यों वाली एक पेन ड्राइव भी आयोग को सौंपी।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अधिकारियों को मौखिक रूप से निर्देश दिए हैं कि खान, अब्दुल और करीम जैसे मुस्लिम नामों को मतदाता सूची से न हटाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यभर के उपायुक्त इन कथित निर्देशों का पालन कर रहे हैं। ये सभी आरोप एनडीए नेताओं की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

एनडीए की माँगें और आगे की राह

एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया की निगरानी के लिए स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करने की माँग की है। जोशी ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग किसी विशेष समुदाय को प्रक्रिया से बाहर रखने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि एसआईआर चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संचालित हो। चुनाव आयोग ने शिकायतों की जाँच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है — अब सबकी नज़रें आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि ये सभी दावे अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं — और चुनाव से पहले मतदाता सूची विवाद भारत में कोई नई घटना नहीं है। असली कसौटी यह होगी कि चुनाव आयोग महज आश्वासन से आगे बढ़कर पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करता है या नहीं। मुस्लिम नामों को लेकर आर. अशोक के आरोप, यदि सत्य हैं, तो संवैधानिक रूप से अत्यंत गंभीर हैं — और यदि असत्य हैं, तो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की स्पष्ट कोशिश। दोनों ही स्थितियों में, मीडिया और नागरिक समाज की जिम्मेदारी है कि वे तथ्य-जाँच को राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखें।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक एसआईआर (SIR) क्या है और इसमें विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। कर्नाटक में इस अभियान के दौरान एनडीए ने मृत मतदाताओं के नाम न हटाने, अपात्र लोगों को शामिल करने और बीएलए के साथ अभद्र व्यवहार जैसी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
एनडीए ने चुनाव आयोग से क्या माँगें की हैं?
एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने 7 जुलाई को चुनाव आयोग से कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया की निगरानी के लिए स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करने की माँग की है। साथ ही यह सुनिश्चित करने की माँग की है कि प्रक्रिया आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संचालित हो।
प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
जोशी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बेंगलुरु में मतदाता धोखाधड़ी के दावे किए, लेकिन कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई। एनडीए ने आयोग को यह भी बताया कि राहुल गांधी द्वारा उल्लेखित 27 वार्डों में समानांतर एसआईआर प्रक्रिया चलाए जाने के आरोप सामने आए हैं।
एच.डी. कुमारस्वामी ने चुनाव आयोग को क्या साक्ष्य सौंपे?
कुमारस्वामी ने कथित अनियमितताओं से जुड़े साक्ष्यों वाली एक पेन ड्राइव चुनाव आयोग को सौंपी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कर्नाटक में 20 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक रह रहे हैं और राज्य सरकार उन्हें मतदाता पहचान पत्र व आधार कार्ड जारी कर रही है।
चुनाव आयोग ने एनडीए की शिकायत पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने एनडीए प्रतिनिधिमंडल के ज्ञापन का विस्तार से अध्ययन किया और शिकायतों की जाँच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। आयोग की ओर से अभी तक कोई औपचारिक आदेश या विस्तृत प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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