करंदलाजे ने कर्नाटक एसईसी पर समानांतर एसआईआर का आरोप लगाया, ईसीआई से तत्काल हस्तक्षेप की माँग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम और रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने शुक्रवार, 3 जुलाई को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग (केएसईसी) द्वारा ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में कथित रूप से चलाई जा रही 'समानांतर विशेष गहन संशोधन (एसआईआर)' प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की अपील की। उनका तर्क है कि विधानसभा मतदाता सूची का संशोधन करना पूरी तरह से ईसीआई के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है और केएसईसी की यह कार्रवाई उस अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है।
मुख्य घटनाक्रम
करंदलाजे ने ईसीआई को लिखे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि ईसीआई ने कर्नाटक में एसआईआर के तीसरे चरण का कार्यक्रम पहले ही अधिसूचित कर दिया है और यह प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रही है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची पहले ही फ्रीज की जा चुकी है और संशोधन कार्य संविधान के अनुच्छेद 324 तथा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के अंतर्गत हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इसके बावजूद केएसईसी ने जीबीए के अंतर्गत कुछ विधानसभा क्षेत्रों में स्वतंत्र समय-सीमा और अलग-अलग कट-ऑफ तारीखों के साथ अपनी अलग अधिसूचनाएँ जारी कर दीं, जो कथित तौर पर एक समानांतर संशोधन प्रक्रिया की शुरुआत है।
संवैधानिक तर्क
करंदलाजे ने रेखांकित किया कि संविधान के अनुच्छेद 243के और 243जेडए के तहत गठित केएसईसी को शहरी स्थानीय निकायों और अन्य स्थानीय प्राधिकरणों के चुनाव कराने का अधिकार है, परंतु उसे विधानसभा मतदाता सूची का एसआईआर स्वतंत्र रूप से तैयार करने या कराने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स एंड अदर्स बनाम भारत निर्वाचन आयोग एंड अदर्स' का भी हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने मतदाता सूची के एसआईआर को संपन्न कराने के ईसीआई के अधिकार को स्पष्ट रूप से बरकरार रखा था।
आम जनता और चुनाव प्रक्रिया पर असर
केंद्रीय मंत्री ने चेतावनी दी कि इस प्रकार की समानांतर प्रक्रिया से मतदाताओं, राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों के बीच व्यापक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उनके अनुसार इससे मतदाता सूची में विसंगतियाँ आ सकती हैं और समग्र चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
करंदलाजे ने यह भी कहा कि इस तरह की दोहरी कवायद से सार्वजनिक संसाधनों का अनावश्यक व्यय, प्रशासनिक भ्रम और मतदाता सूची की प्रामाणिकता को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
करंदलाजे की माँगें
केंद्रीय मंत्री ने ईसीआई से तीन प्रमुख कदम उठाने का आग्रह किया: पहला, जीबीए क्षेत्र में केएसईसी द्वारा चलाई जा रही कथित समानांतर एसआईआर प्रक्रिया की वैधता की तत्काल जाँच की जाए; दूसरा, उचित निर्देश जारी कर यह सुनिश्चित किया जाए कि विधानसभा मतदाता सूची का केवल एक समान एसआईआर ईसीआई की देखरेख में हो; और तीसरा, केएसईसी को किसी भी समानांतर संशोधन प्रक्रिया से तत्काल रोका जाए तथा उसे ईसीआई द्वारा अंतिम रूप दी गई मतदाता सूची को ही अपनाने का निर्देश दिया जाए।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल पहले से तेज है। करंदलाजे ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर देते हुए ईसीआई से मतदाता सूची संशोधन की विश्वसनीयता, एकरूपता और प्रामाणिकता की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की। ईसीआई की प्रतिक्रिया और इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।