कर्नाटक SIR प्रक्रिया में ढिलाई के आरोप: शोभा करंदलाजे ने चुनाव आयोग से तत्काल जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने 4 जुलाई 2025 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर कर्नाटक में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision — SIR) अभियान में कथित अनियमितताओं की तत्काल जांच की मांग की है। उनके पत्र में आरोप लगाया गया है कि राज्य में अनिवार्य घर-घर सत्यापन की जगह सामुदायिक भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर शिविर लगाकर गणना प्रपत्र वितरित किए जा रहे हैं, जिससे SIR का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
मुख्य आरोप और मांगें
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री करंदलाजे ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा किया जाने वाला घर-घर सत्यापन ECI के दिशा-निर्देशों के तहत अनिवार्य है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया को कई स्थानों पर शिविर-आधारित सत्यापन से प्रतिस्थापित किया जा रहा है, जो निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें ऐसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं जिनमें BLO को अपने वैधानिक दायित्व निभाने का अवसर नहीं दिया जा रहा और उन्हें प्रक्रिया में विश्वास में नहीं लिया जा रहा। करंदलाजे के अनुसार, इस तरह की ढिलाई से अवैध प्रवासियों और अयोग्य व्यक्तियों के मतदाता सूची में शामिल होने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
संवैधानिक और कानूनी आधार
करंदलाजे ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और कार्यपालिका के प्रभाव से मुक्त रहे। उन्होंने तर्क दिया कि SIR का उद्देश्य प्रत्येक मतदाता का उसके सामान्य निवास स्थान पर जाकर भौतिक सत्यापन करना है — और इस प्रक्रिया से कोई भी विचलन मतदाता सूची की विश्वसनीयता को कमजोर करता है।
राज्य सरकार पर आरोप
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार राजनीतिक लाभ के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर SIR प्रक्रिया को जानबूझकर कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, BLO, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों में राज्यभर में इस अभियान के संचालन को लेकर व्यापक चिंता है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में अगले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची की शुद्धता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है।
ECI से की गई विशिष्ट मांगें
करंदलाजे ने निर्वाचन आयोग से चार प्रमुख कदम उठाने का अनुरोध किया है: पूरे कर्नाटक में SIR अभियान की जांच; BLO को स्वतंत्र रूप से दायित्व निभाने देने की पुष्टि; राज्य के सभी निर्वाचन अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रियाओं के कड़े पालन के निर्देश; और आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की नियुक्ति। उन्होंने जोर देकर कहा कि शुद्ध और सटीक मतदाता सूची लोकतांत्रिक चुनावों की विश्वसनीयता की आधारशिला है।
आगे क्या
अब निगाहें इस बात पर हैं कि भारत निर्वाचन आयोग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है। यदि आयोग जांच का आदेश देता है, तो कर्नाटक में SIR अभियान की प्रक्रिया और राज्य सरकार की भूमिका दोनों ही राजनीतिक बहस के केंद्र में आ सकती हैं। गौरतलब है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर इस तरह के विवाद अन्य राज्यों में भी उठते रहे हैं, जो चुनावी प्रशासन में पारदर्शिता की व्यापक चुनौती को रेखांकित करते हैं।