बैरकपुर रेलवे स्टेशन की 164वीं सालगिरह: ईस्टर्न रेलवे ने हेरिटेज उत्सव से की याद
सारांश
मुख्य बातें
ईस्टर्न रेलवे (ER) ने 17 अगस्त 2026 को बैरकपुर रेलवे स्टेशन की 164वीं वर्षगाँठ एक भव्य हेरिटेज उत्सव के साथ मनाई। 1862 में स्थापित यह स्टेशन मूल रूप से देश की पहली सैन्य छावनी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से जोड़ने के उद्देश्य से बनाया गया था। यह आयोजन रेल मंत्रालय की 'स्टेशन महोत्सव' पहल का हिस्सा था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1772 में बैरकपुर में सैन्य गैरीसन और छावनी की स्थापना की थी। वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1775 में औपचारिक रूप से छावनी बोर्ड की घोषणा की। इस धरती ने भारतीय इतिहास की कई निर्णायक घटनाओं को अपनी आँखों से देखा है।
अंग्रेजों द्वारा '1824 के बैरकपुर विद्रोह' के नाम से दर्ज इस घटना में सिपाही बिंदी तिवारी के नेतृत्व में 47वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सैनिकों ने पहले एंग्लो-बर्मी युद्ध में भाग लेने के लिए बर्मा (अब म्यांमार) जाने से इनकार कर दिया था। अंग्रेज शासकों ने तोपों के बल पर उन सैनिकों का नरसंहार किया।
1857 में मंगल पांडे और उनके साथियों ने इसी भूमि पर अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूँका। कुछ इतिहासकारों का मत है कि यहीं से भारत की स्वतंत्रता की पहली लड़ाई की नींव पड़ी थी।
स्टेशन का ऐतिहासिक महत्व
ईस्टर्न रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों ने इस स्टेशन का व्यापक उपयोग किया था। उनके अनुसार, बैरकपुर स्टेशन देश के सबसे पुराने उपनगरीय स्टेशनों में से एक है, जिसने औपनिवेशिक काल से आधुनिक भारत तक की यात्रा को साक्षात देखा है और आज भी एक महत्वपूर्ण पारगमन केंद्र के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।
उत्सव के मुख्य कार्यक्रम
समारोह में स्थानीय स्कूली छात्रों ने अपने शिक्षकों द्वारा रचित कविताओं का पाठ किया, जो भारत की स्वतंत्रता और स्वाधीनता संग्राम की कठिनाइयों पर केंद्रित थीं। एक विशेष वीडियो प्रस्तुति में बैरकपुर स्टेशन के ऐतिहासिक उद्भव से लेकर उसकी वर्तमान भूमिका तक के सफर को दर्शाया गया।
भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के सदस्यों ने मंगल पांडे के ऐतिहासिक संघर्ष और विद्रोह की भावना को जीवंत करते हुए एक नाटक प्रस्तुत किया और मंगल पांडे सहित अन्य गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को उनकी समर्पित सेवा के लिए सम्मानित भी किया गया।
स्टेशन महोत्सव पहल
यह उत्सव रेल मंत्रालय की 'स्टेशन महोत्सव' पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य हेरिटेज स्टेशनों को उनके निर्माण वर्ष के आधार पर सेलिब्रेट करना है। भारतीय रेलवे नेटवर्क के 100 से अधिक स्टेशनों को इन आयोजनों के लिए चुना गया है, ताकि उनकी ऐतिहासिक विरासत और आसपास के क्षेत्रों में उनके योगदान को रेखांकित किया जा सके।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के ओजस्वी सामूहिक गायन के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल एक वर्षगाँठ का उत्सव था, बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय रेलवे की विरासत और देशभक्ति के मूल्यों से पुनः जोड़ने का एक सार्थक प्रयास भी था। आगामी वर्षों में ऐसे और स्टेशनों पर इसी तरह के आयोजन प्रस्तावित हैं।