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बैरकपुर स्टेशन पर MSDAC सिस्टम चालू: ईस्टर्न रेलवे ने मजबूत किया सिग्नलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

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बैरकपुर स्टेशन पर MSDAC सिस्टम चालू: ईस्टर्न रेलवे ने मजबूत किया सिग्नलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

सारांश

बैरकपुर जैसे व्यस्त उपनगरीय स्टेशन पर मानसून में बार-बार होने वाली सिग्नलिंग गड़बड़ियों के स्थायी समाधान के रूप में ईस्टर्न रेलवे ने MSDAC तकनीक स्थापित की है। यह कदम रेलवे के व्यापक मानसून-प्रतिरोधी इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यक्रम का हिस्सा है।

मुख्य बातें

ईस्टर्न रेलवे ने 24 सितंबर 2026 को बैरकपुर स्टेशन पर MSDAC (मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर) सिस्टम सफलतापूर्वक चालू किया।
सिस्टम प्लेटफॉर्म 4, 2, 1A और 1 तथा डाउन सबअर्बन लाइन पर मौजूदा डीसी ट्रैक सर्किट के समानांतर स्थापित किया गया है।
यह तकनीक जलभराव के दौरान पारंपरिक ट्रैक सर्किट की विफलता के जोखिम को कम करती है और सिग्नलिंग को निर्बाध बनाए रखती है।
CPRO शिबराम माझी ने इसे परिचालन विश्वसनीयता और यात्री सुविधा में महत्वपूर्ण सुधार बताया।
यह अपग्रेड ईस्टर्न रेलवे के पूरे नेटवर्क में आधुनिक तकनीक अपनाने के चल रहे कार्यक्रम का हिस्सा है।

ईस्टर्न रेलवे (ER) ने 24 सितंबर 2026 को बैरकपुर स्टेशन पर मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (MSDAC) सिस्टम को सफलतापूर्वक चालू किया, जिसका उद्देश्य यात्री सुरक्षा बढ़ाना और मानसून के दौरान जलभराव-प्रभावित क्षेत्रों में सिग्नलिंग की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के अनुसार यह कदम उपनगरीय और लंबी दूरी की ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने में भी सहायक होगा।

क्या है MSDAC और कहाँ लगाया गया

MSDAC एक उन्नत सिग्नलिंग तकनीक है जो ट्रैक सेक्शन के एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर सेंसर के माध्यम से ट्रेन के पहियों (एक्सल) की गिनती करती है। जब किसी सेक्शन में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले एक्सल की संख्या मेल खाती है, तो सिस्टम ट्रैक को खाली घोषित करता है; अंतर होने पर ट्रैक को 'व्यस्त' दर्शाता है।

नया सिस्टम प्लेटफॉर्म 4, 2, 1A और 1 के साथ-साथ डाउन सबअर्बन लाइन पर मौजूदा डीसी ट्रैक सर्किट के समानांतर स्थापित किया गया है। यह समानांतर व्यवस्था किसी एक सिस्टम के विफल होने पर दूसरे के जरिए सिग्नलिंग को निर्बाध बनाए रखती है।

जलभराव की चुनौती और तकनीकी समाधान

बैरकपुर क्षेत्र में भारी वर्षा के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या रहती है, जिससे पारंपरिक डीसी ट्रैक सर्किट में खराबी आने का जोखिम बढ़ जाता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'मौजूदा ट्रैक सर्किट के साथ MSDAC की समानांतर व्यवस्था मौसम की वजह से ट्रैक सर्किट में खराबी आने के जोखिम को काफी कम करती है और खराब मौसम में भी सिग्नलिंग संचालन को लगातार बनाए रखने में मदद करती है।'

गौरतलब है कि बैरकपुर कोलकाता के उत्तरी उपनगरीय गलियारे का एक अहम जंक्शन है, जहाँ से प्रतिदिन हजारों यात्री गुजरते हैं। सिग्नलिंग में किसी भी रुकावट का सीधा असर पूरे उपनगरीय नेटवर्क पर पड़ता है।

ईस्टर्न रेलवे की प्रतिक्रिया

ईस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) शिबराम माझी ने कहा कि बैरकपुर में MSDAC सिस्टम का चालू होना सिग्नलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसका मकसद परिचालन विश्वसनीयता को मजबूत करना और यात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि भारी बारिश के दौरान जलभराव पारंपरिक ट्रैक सर्किट के लिए चुनौती बन सकता है, लेकिन समानांतर MSDAC व्यवस्था मौसम से जुड़ी सिग्नलिंग रुकावटों को कम करने में सक्षम है।

आम यात्रियों पर असर

इस तकनीकी उन्नयन से बैरकपुर से कोलकाता और आसपास के स्टेशनों के बीच रोजाना यात्रा करने वाले हजारों उपनगरीय यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। ट्रेनों की अनावश्यक देरी में कमी, समयपालन में सुधार और मानसून सीजन में भी निर्बाध सेवाएं — ये तीन प्रमुख लाभ अधिकारियों ने गिनाए हैं।

यह ईस्टर्न रेलवे के उस व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है जिसके तहत पूरे नेटवर्क में मानसून-प्रतिरोधी सिग्नलिंग तकनीक अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। आगामी मानसून चक्रों में यह प्रणाली पूरी तरह परीक्षित होगी और अपेक्षाओं पर खरा उतरने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु असली परीक्षा अगले मानसून सीजन में होगी जब जलभराव अपने चरम पर होता है। भारतीय रेलवे के उपनगरीय नेटवर्क में सिग्नलिंग विफलताएँ वर्षों से देरी का प्रमुख कारण रही हैं, और एकल-स्टेशन अपग्रेड से व्यापक नेटवर्क-स्तरीय समस्या का समाधान नहीं होता। यह देखना होगा कि ईस्टर्न रेलवे इस मॉडल को कितनी गति से अन्य जलभराव-संवेदनशील स्टेशनों तक विस्तारित करता है — घोषणाओं की बजाय क्रियान्वयन की गति ही इस पहल की असली कसौटी है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MSDAC (मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर) सिस्टम क्या होता है?
MSDAC एक उन्नत सिग्नलिंग तकनीक है जो ट्रैक के एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर ट्रेन के एक्सल (पहियों) की गिनती करके यह निर्धारित करती है कि ट्रैक सेक्शन खाली है या व्यस्त। यह पारंपरिक डीसी ट्रैक सर्किट की तुलना में अधिक विश्वसनीय है, विशेषकर जलभराव वाले क्षेत्रों में।
बैरकपुर स्टेशन पर यह सिस्टम क्यों लगाया गया?
बैरकपुर कोलकाता के उत्तरी उपनगरीय गलियारे का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है जहाँ भारी बारिश के दौरान जलभराव से पारंपरिक ट्रैक सर्किट में खराबी आने का जोखिम रहता है। MSDAC लगाने से एक स्वतंत्र और अतिरिक्त ट्रेन-डिटेक्शन व्यवस्था मिलती है, जिससे मौसमी रुकावटें कम होती हैं।
इस अपग्रेड से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
रोजाना बैरकपुर से यात्रा करने वाले हजारों उपनगरीय और लंबी दूरी के यात्रियों को ट्रेनों की कम देरी, बेहतर समयपालन और मानसून सीजन में भी निर्बाध सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है। सिग्नलिंग विश्वसनीयता बढ़ने से सुरक्षा स्तर भी ऊपर जाएगा।
MSDAC और पारंपरिक डीसी ट्रैक सर्किट में क्या अंतर है?
पारंपरिक डीसी ट्रैक सर्किट जलभराव की स्थिति में विद्युत रिसाव के कारण खराब हो सकता है, जिससे सिग्नल गड़बड़ाते हैं। MSDAC एक्सल काउंटिंग पर आधारित है और मौसम की मार से अपेक्षाकृत सुरक्षित है; इसे मौजूदा सर्किट के समानांतर लगाया गया है ताकि दोनों एक साथ काम करें।
क्या ईस्टर्न रेलवे अन्य स्टेशनों पर भी यह तकनीक लगाएगा?
ईस्टर्न रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, बैरकपुर अपग्रेड उनके पूरे नेटवर्क में आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक अपनाने के चल रहे कार्यक्रम का हिस्सा है। हालांकि, अन्य स्टेशनों की विशिष्ट सूची या समयसीमा की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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