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पश्चिम बंगाल: जुलाई हादसे के बाद पूर्वी रेलवे ने लगाया NILC ऑटो PN सुरक्षा सिस्टम

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पश्चिम बंगाल: जुलाई हादसे के बाद पूर्वी रेलवे ने लगाया NILC ऑटो PN सुरक्षा सिस्टम

सारांश

जुलाई में चार बच्चों सहित पाँच की जान लेने वाले हादसे के बाद पूर्वी रेलवे ने आखिरकार उस लेवल क्रॉसिंग पर रियल-टाइम निगरानी वाला NILC ऑटो PN सिस्टम लगाया। यह तकनीक स्टेशन मास्टर को गेटमैन की मौखिक जानकारी से आज़ाद करती है — वही चूक जिसने त्रासदी को जन्म दिया था।

मुख्य बातें

पूर्वी रेलवे ने 23 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल की उस लेवल क्रॉसिंग पर NILC ऑटो पीएन सिस्टम स्थापित किया जहाँ 17 जुलाई को हादसा हुआ था।
हादसे में चार बच्चों सहित पाँच लोगों की जान गई थी; कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
करनसुबर्ण और खागड़ाघाट रोड स्टेशनों के बीच तीन लेवल क्रॉसिंग पर नया सिस्टम लगाया गया।
नई प्रणाली स्टेशन मास्टर को रियल-टाइम में गेट की स्थिति जाँचने और स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने की सुविधा देती है।
महाप्रबंधक गीतिका पांडे ने स्वयं परिचालन प्रक्रियाओं और सिग्नलिंग पैनल का निरीक्षण किया।
रेल मंत्रालय के निर्देश पर हादसे के बाद सुरक्षा सुधार के लिए यह कदम उठाया गया।

पूर्वी रेलवे ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के उस लेवल क्रॉसिंग पर अत्याधुनिक नॉन-इंटरलॉक्ड लेवल क्रॉसिंग (NILC) ऑटो पीएन सिस्टम स्थापित किया, जहाँ इस साल 17 जुलाई को हुए भीषण हादसे में पाँच लोगों की जान गई थी — जिनमें चार बच्चे शामिल थे। इस तकनीकी उन्नयन के साथ करनसुबर्ण और खागड़ाघाट रोड स्टेशनों के बीच दो अन्य लेवल क्रॉसिंग पर भी यही सिस्टम लगाया गया।

हादसे की पृष्ठभूमि

17 जुलाई की सुबह इस लेवल क्रॉसिंग पर तैनात गेटमैन समय रहते रेलवे फाटक बंद नहीं कर पाया था। इसके चलते बच्चों को ले जा रही एक कार ट्रेन की चपेट में आ गई, जिसमें चार बच्चों की मौत हो गई और एक साइकिल सवार की भी जान चली गई। कई अन्य बच्चे और कार का चालक गंभीर रूप से घायल हुए। घटना के बाद रेल मंत्रालय ने पूर्वी रेलवे को सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश दिए थे।

नए सिस्टम की प्रमुख विशेषताएँ

रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार, NILC ऑटो पीएन सिस्टम में कई तकनीक-आधारित सुरक्षा परतें शामिल हैं। इनमें बूम और लीवर लॉकिंग का वेरिफिकेशन, आरकेटी आधारित फिजिकल ऑथेंटिकेशन, ट्रेन के गुजरने का सटीक पता लगाना, रियल-टाइम स्टेटस मॉनिटरिंग और प्रमाणित ट्रेन कैंसिलेशन प्रक्रिया शामिल हैं।

इस व्यवस्था में स्टेशन मास्टर लेवल क्रॉसिंग गेट की स्थिति पर रियल टाइम में नज़र रख सकता है और ट्रेन को आगे बढ़ाने की अनुमति देने से पहले स्वतंत्र रूप से सत्यापित कर सकता है कि फाटक पूरी तरह बंद है। इससे स्टेशन मास्टर को केवल गेटमैन की मौखिक जानकारी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा — जो 17 जुलाई के हादसे की मूल कमज़ोरी थी।

महाप्रबंधक की समीक्षा और निरीक्षण

पूर्वी रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडे की मौजूदगी में यह सिस्टम स्थापित किया गया। उन्होंने एक लेवल क्रॉसिंग पर निर्धारित परिचालन प्रक्रियाओं की समीक्षा की और गेटमैन से सुरक्षा नियमों, फाटक संचालन, आपातकालीन प्रक्रियाओं तथा उपकरण रखरखाव के बारे में विस्तृत बातचीत की।

पांडे ने करनसुबर्ण रेलवे स्टेशन के इंटरलॉकिंग पैनल का भी निरीक्षण किया और ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर से सिग्नलिंग पैनल के कामकाज, परिचालन प्रक्रियाओं और ट्रेन संचालन से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों की समीक्षा की। उन्होंने सुरक्षा नियमों के सख्त पालन और महत्वपूर्ण ड्यूटी के दौरान पूर्ण सतर्कता पर जोर दिया।

सिस्टम का उद्देश्य और व्यापक महत्व

अधिकारियों के अनुसार, यह सिस्टम मौजूदा मानव-निर्भर प्रक्रियाओं का विकल्प नहीं, बल्कि एक अतिरिक्त सुरक्षा परत है। इसका लक्ष्य स्टेशन मास्टर और गेटमैन के बीच संचार व तालमेल को मज़बूत करना और ट्रेन संचालन के दौरान प्रक्रिया-संबंधी चूक की संभावना को न्यूनतम करना है।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में मानव रहित और अपर्याप्त सुरक्षित लेवल क्रॉसिंग पर होने वाले हादसे चिंता का विषय बने हुए हैं। रेल मंत्रालय के निर्देश पर की गई यह कार्रवाई संकेत देती है कि जवाबदेही तंत्र ने काम किया — भले ही इसके लिए पाँच जिंदगियाँ जानी पड़ीं।

आगे की राह

पूर्वी रेलवे के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस तकनीकी मॉडल को अन्य संवेदनशील लेवल क्रॉसिंग पर भी विस्तारित किया जा सकता है। फिलहाल करनसुबर्ण-खागड़ाघाट रोड खंड की तीन क्रॉसिंग पर यह सिस्टम सक्रिय हो चुका है और इसके प्रदर्शन की निगरानी की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक असुविधाजनक सवाल बना रहता है: क्या यह तकनीकी उन्नयन जुलाई की त्रासदी से पहले भी संभव था? NILC ऑटो PN कोई नई अवधारणा नहीं है, और पाँच जिंदगियाँ जाने के बाद इसे 'अतिरिक्त सुरक्षा परत' कहना उस प्रणालीगत विफलता को ढकने का प्रयास लग सकता है जो हादसे की असली जड़ थी। गेटमैन की अकेली ज़िम्मेदारी पर निर्भर नॉन-इंटरलॉक्ड क्रॉसिंग देशभर में हज़ारों की संख्या में हैं; तीन क्रॉसिंग पर सिस्टम लगाना स्वागतयोग्य है, लेकिन पर्याप्त नहीं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या रेल मंत्रालय इस मॉडल को प्राथमिकता के आधार पर व्यापक पैमाने पर लागू करता है, या यह खबर सुर्खियों में आई और फिर अगले हादसे तक दराज में बंद हो गई।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वी रेलवे ने पश्चिम बंगाल में कौन-सा नया सुरक्षा सिस्टम लगाया है?
पूर्वी रेलवे ने NILC (नॉन-इंटरलॉक्ड लेवल क्रॉसिंग) ऑटो पीएन सिस्टम स्थापित किया है। यह सिस्टम स्टेशन मास्टर को रियल-टाइम में गेट की स्थिति जाँचने और गेटमैन की मौखिक जानकारी पर निर्भर हुए बिना ट्रेन को आगे बढ़ाने की अनुमति देने में सक्षम बनाता है।
17 जुलाई का पश्चिम बंगाल रेलवे हादसा क्या था?
17 जुलाई 2026 की सुबह करनसुबर्ण-खागड़ाघाट रोड स्टेशनों के बीच एक लेवल क्रॉसिंग पर गेटमैन समय रहते फाटक बंद नहीं कर पाया, जिससे बच्चों को ले जा रही एक कार ट्रेन की चपेट में आ गई। इस हादसे में चार बच्चों और एक साइकिल सवार की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
NILC ऑटो PN सिस्टम में क्या-क्या सुरक्षा सुविधाएँ हैं?
इस सिस्टम में बूम और लीवर लॉकिंग का वेरिफिकेशन, आरकेटी आधारित फिजिकल ऑथेंटिकेशन, ट्रेन के गुजरने का सटीक पता लगाना, रियल-टाइम स्टेटस मॉनिटरिंग और प्रमाणित ट्रेन कैंसिलेशन प्रक्रिया शामिल हैं। यह स्टेशन मास्टर और गेटमैन के बीच पीएन आधारित संचार की सुविधा भी देता है।
इस सिस्टम को कितनी लेवल क्रॉसिंग पर लगाया गया है?
23 सितंबर 2026 को करनसुबर्ण और खागड़ाघाट रोड स्टेशनों के बीच तीन लेवल क्रॉसिंग पर यह सिस्टम लगाया गया है — जिसमें वह क्रॉसिंग भी शामिल है जहाँ जुलाई का हादसा हुआ था।
रेल मंत्रालय ने हादसे के बाद क्या कार्रवाई की?
हादसे के बाद रेल मंत्रालय ने पूर्वी रेलवे को सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ज़रूरी कदम उठाने का निर्देश दिया था। इसी के अनुपालन में महाप्रबंधक गीतिका पांडे की निगरानी में NILC ऑटो PN सिस्टम की स्थापना की गई और परिचालन प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई।
राष्ट्र प्रेस
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