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एनएफआर आरपीएफ ने जनवरी–जून 2026 में 430 लोगों को बचाया, 18–20 जुलाई में कई नाबालिगों को सुरक्षित किया

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एनएफआर आरपीएफ ने जनवरी–जून 2026 में 430 लोगों को बचाया, 18–20 जुलाई में कई नाबालिगों को सुरक्षित किया

सारांश

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की आरपीएफ ने 2026 के पहले छह महीनों में 430 लोगों को बचाया। 18 से 20 जुलाई के बीच असम, बिहार और पश्चिम बंगाल में कई नाबालिगों को ट्रेनों और स्टेशनों से सुरक्षित निकाला गया और बाल कल्याण समितियों को सौंपा गया।

मुख्य बातें

एनएफआर आरपीएफ ने जनवरी से जून 2026 के बीच अपने नेटवर्क से 430 लोगों को बचाया।
18 जुलाई को न्यू अलीपुरदुआर में 12 वर्षीय लड़के को बचाकर अलीपुरदुआर सीडब्ल्यूसी को सौंपा गया।
19 जुलाई को न्यू बोंगाईगांव से चार नाबालिग लड़कियाँ और किशनगंज से 10 वर्षीय लड़का बचाया गया।
कटिहार में 14 वर्षीय लड़की को चाइल्ड लाइन को सौंपा; एक अन्य अभियान में 18 वर्षीय युवक को पिता से मिलाया गया।
20 जुलाई को गोलपारा में 13 वर्षीय और कामाख्या स्टेशन पर 16 वर्षीय लड़की को बचाया गया।
एनएफआर पूर्वोत्तर राज्यों , पश्चिम बंगाल के 7 जिलों और उत्तरी बिहार के 5 जिलों में संचालित है।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) की रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने असुरक्षित बच्चों की सुरक्षा और यात्रियों की मदद के अपने अभियान को और तेज़ कर दिया है। एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिनजल किशोर शर्मा ने 26 जुलाई 2026 को बताया कि जनवरी से जून 2026 के बीच आरपीएफ ने एनएफआर नेटवर्क के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों से 430 लोगों — पुरुष और महिला दोनों — को सुरक्षित बचाया है।

मुख्य बचाव अभियान: 18 से 20 जुलाई

18 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के न्यू अलीपुरदुआर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ कर्मियों ने एक 12 वर्षीय लड़के को बचाया और उसे अलीपुरदुआर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दिया।

19 जुलाई को असम के न्यू बोंगाईगांव में आरपीएफ ने ट्रेन से यात्रा कर रही चार नाबालिग लड़कियों को बचाकर बोंगाईगांव बाल कल्याण समिति को सुपुर्द किया। उसी दिन बिहार के किशनगंज में एक 10 वर्षीय लड़के को ट्रेन से बचाकर किशनगंज बाल सहायता लाइन को सौंपा गया।

बिहार के कटिहार रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने एक 14 वर्षीय लड़की को बचाकर चाइल्ड लाइन, कटिहार को सौंपा। एक अन्य अभियान में आरपीएफ ट्रेन एस्कॉर्ट पार्टी ने ट्रेन में यात्रा कर रही एक अन्य 14 वर्षीय लड़की को बचाया और स्थानीय पुलिस से समन्वय कर उसे सुरक्षित हिरासत में लिया। इसी दौरान एक 18 वर्षीय युवक को उसके पिता से मिलाया गया।

20 जुलाई को असम के गोलपारा में एक 13 वर्षीय लड़की को ट्रेन से बचाकर गोलपारा बाल कल्याण समिति को सौंपा गया। गुवाहाटी के कामाख्या रेलवे स्टेशन पर स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों के सहयोग से एक 16 वर्षीय लड़की को बचाकर गुवाहाटी रेलवे चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया गया।

बहु-एजेंसी समन्वय का मॉडल

शर्मा के अनुसार, आरपीएफ बाल कल्याण समितियों, बाल सहायता लाइनों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर बचाए गए बच्चों की देखभाल और उन्हें उनके परिवारों से पुनर्मिलन कराने का काम करती है। यह बहु-एजेंसी मॉडल बचाव के बाद की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाता है।

गौरतलब है कि एनएफआर का मुख्यालय गुवाहाटी के पास मालिगांव में स्थित है और यह पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के सात जिलों और उत्तरी बिहार के पाँच जिलों में संचालित होता है — एक विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र जहाँ रेलवे स्टेशन अक्सर असुरक्षित बच्चों के पारगमन बिंदु बन जाते हैं।

आम जनता और यात्रियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में बाल तस्करी और घर से भागे बच्चों की समस्या गंभीर बनी हुई है। रेलवे नेटवर्क पर आरपीएफ की सक्रिय उपस्थिति न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि आम यात्रियों के लिए भी एक सुरक्षित वातावरण बनाती है।

आगे की राह

एनएफआर ने स्पष्ट किया है कि आरपीएफ की यह निगरानी और बचाव गतिविधियाँ निरंतर जारी रहेंगी। बाल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए आरपीएफ अपने नेटवर्क में सतर्कता और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, जिससे रेलवे परिसर में असुरक्षित बच्चों की पहचान और त्वरित सहायता और सुगम हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बचाए गए 430 लोगों में से कितने बच्चे थे और उनमें से कितनों का सफल पुनर्वास हुआ — यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। पूर्वोत्तर भारत बाल तस्करी के लिए संवेदनशील गलियारा माना जाता है और रेलवे स्टेशन अक्सर इस नेटवर्क के पारगमन बिंदु बनते हैं। बाल कल्याण समितियों को सौंपने की प्रक्रिया सराहनीय है, परंतु बचाव के बाद के परिणामों — जैसे परिवार से पुनर्मिलन दर और कानूनी कार्रवाई की स्थिति — की पारदर्शी रिपोर्टिंग इस अभियान की विश्वसनीयता को और मज़बूत करेगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएफआर आरपीएफ ने 2026 में कितने लोगों को बचाया?
जनवरी से जून 2026 के बीच एनएफआर की आरपीएफ ने अपने नेटवर्क के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों से 430 लोगों — पुरुष और महिला दोनों — को बचाया। यह आँकड़ा एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिनजल किशोर शर्मा ने 26 जुलाई 2026 को साझा किया।
18 से 20 जुलाई के बीच आरपीएफ ने किन-किन जगहों पर बच्चों को बचाया?
इस अवधि में न्यू अलीपुरदुआर (पश्चिम बंगाल), न्यू बोंगाईगांव और गोलपारा (असम), किशनगंज और कटिहार (बिहार), तथा कामाख्या रेलवे स्टेशन (गुवाहाटी) पर बचाव अभियान चलाए गए। कुल मिलाकर कई नाबालिगों को सुरक्षित निकाला गया।
बचाए गए बच्चों को किन संस्थाओं को सौंपा जाता है?
आरपीएफ बचाए गए नाबालिगों को बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी), बाल सहायता लाइनों (चाइल्ड लाइन) और अन्य अधिकृत एजेंसियों को सौंपती है। स्थानीय पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों के साथ भी समन्वय किया जाता है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) किन क्षेत्रों में काम करती है?
एनएफआर का मुख्यालय गुवाहाटी के पास मालिगांव में है और यह पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के सात जिलों और उत्तरी बिहार के पाँच जिलों में संचालित होती है।
आरपीएफ बाल संरक्षण के लिए क्या कदम उठा रही है?
आरपीएफ निरंतर सतर्कता और त्वरित हस्तक्षेप के ज़रिए रेलवे परिसर में असुरक्षित बच्चों की पहचान करती है। बाल कल्याण समितियों, चाइल्ड लाइन, एनजीओ और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर वह बचाए गए बच्चों की देखभाल और यथासंभव परिवारों से पुनर्मिलन सुनिश्चित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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