मानव तस्करी रोधी अभियान: हटिया स्टेशन पर RPF ने तीन नाबालिगों को बचाया, तस्कर गिरफ्तार

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मानव तस्करी रोधी अभियान: हटिया स्टेशन पर RPF ने तीन नाबालिगों को बचाया, तस्कर गिरफ्तार

सारांश

रांची के हटिया रेलवे स्टेशन पर RPF ने तीन नाबालिग बच्चों को मानव तस्कर के चंगुल से बचाया। पुरुलिया निवासी आरोपी नयन कुमार गिरफ्तार, बच्चों को बेंगलुरु निर्माण साइटों पर भेजने की थी साजिश। AHTU को सौंपा गया मामला।

Key Takeaways

  • RPF हटिया स्टेशन ने 26 अप्रैल 2025 को तीन नाबालिग बच्चों को मानव तस्कर के चंगुल से मुक्त कराया।
  • गिरफ्तार आरोपी नयन कुमार (27 वर्ष, पुरुलिया, पश्चिम बंगाल) बच्चों को ट्रेन 18367 से बेंगलुरु ले जाने वाला था।
  • आरोपी के PhonePe खाते में घटना के दिन ₹25,000 ट्रांसफर किए गए थे, जो संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
  • नेटवर्क का मास्टरमाइंड हरिहर कुमार अभी भी फरार है, AHTU जांच जारी है।
  • आरोपी से दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड की प्रतियां और रेलवे टिकट जब्त किए गए।
  • तीनों बच्चे सुरक्षित 'बालाश्रय' रांची में, आरोपी AHTU कोतवाली रांची को सौंपा गया।

रांची, 26 अप्रैल: रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने हटिया रेलवे स्टेशन, रांची पर चलाए गए विशेष चेकिंग अभियान के दौरान तीन नाबालिग बच्चों को एक मानव तस्कर के चंगुल से सफलतापूर्वक मुक्त कराया। आरोपी ने इन बच्चों को नौकरी का झांसा देकर बेंगलुरु ले जाने की कोशिश की थी। यह कार्रवाई 26 अप्रैल 2025 को अंजाम दी गई और इस मामले में एक संदिग्ध तस्कर को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।

कैसे हुई बच्चों की पहचान और बचाव

हटिया स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर नियमित चेकिंग के दौरान RPF जवानों की नजर एक संदिग्ध युवक पर पड़ी, जो तीन छोटे बच्चों के साथ था। जवानों को युवक का व्यवहार संदेहास्पद लगा और उसे रोककर पूछताछ शुरू की गई।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का निवासी 27 वर्षीय नयन कुमार इन तीनों बच्चों को रोजगार दिलाने का वादा करके ट्रेन संख्या 18367 से बेंगलुरु ले जाने की फिराक में था।

आरोपी का कबूलनामा और तस्करी का नेटवर्क

गिरफ्तारी के बाद नयन कुमार ने पुलिस के समक्ष अपना अपराध स्वीकार किया। उसने बताया कि वह बेंगलुरु की निर्माण साइटों (Construction Sites) पर मजदूर उपलब्ध कराता है और इसके एवज में प्रत्येक मजदूर पर ₹300 से ₹400 प्रति माह का कमीशन वसूलता है।

आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि वह हरिहर कुमार नामक एक और व्यक्ति के निर्देश पर काम करता है। हरिहर कुमार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक प्रलोभन देकर उनके बच्चों को बाहर भेजने के लिए राजी करता है। जांच में यह भी सामने आया कि घटना के दिन ही आरोपी के PhonePe खाते में ₹25,000 ट्रांसफर किए गए थे, जो इस तस्करी नेटवर्क के संगठित होने का स्पष्ट संकेत है।

बच्चों ने पुलिस को बताया कि वे आरोपी को पहले से नहीं जानते थे। साथ ही उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उनके गांव के अन्य बच्चों को भी इसी तरह काम के बहाने बाहर ले जाया जा चुका है।

जब्त सामग्री और कानूनी कार्रवाई

RPF ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन, बच्चों के आधार कार्ड की प्रतियां और रेलवे टिकट बरामद किए। सभी साक्ष्य कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिए गए।

कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी नयन कुमार को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), कोतवाली, रांची को सुपुर्द कर दिया गया। वहीं, रेस्क्यू किए गए तीनों नाबालिगों को सुरक्षित रूप से 'बालाश्रय' रांची भेज दिया गया है।

अभियान में शामिल टीम और व्यापक संदर्भ

मंडल सुरक्षा आयुक्त पवन कुमार के निर्देशन में संचालित इस सफल ऑपरेशन में हटिया पोस्ट कमांडर, महिला सेल रांची की निरीक्षक कुजूर, एसआई दीपक कुमार, उज्ज्वल कुमार, सुनीता तिर्की, पी. पान, एम. बिस्वास, एस. पी. टोप्पो और मोहिनी साहू समेत अनेक जवानों की सराहनीय भूमिका रही।

गौरतलब है कि झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों से बच्चों और महिलाओं की तस्करी एक गंभीर और दीर्घकालिक समस्या रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार झारखंड मानव तस्करी के मामलों में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। पुरुलिया (पश्चिम बंगाल) और झारखंड की सीमावर्ती बेल्ट तस्करों के लिए एक सक्रिय गलियारा मानी जाती है, जहां से बच्चों को दक्षिण भारत के महानगरों में भेजा जाता है।

इस मामले में हरिहर कुमार की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। AHTU की जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क के और सदस्यों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है। यह मामला रेलवे स्टेशनों पर चौकसी और बाल तस्करी विरोधी अभियानों की अनिवार्यता को एक बार फिर रेखांकित करता है।

Point of View

बल्कि झारखंड-बंगाल सीमा से चलने वाले उस संगठित तस्करी नेटवर्क की एक झलक है जो वर्षों से गरीब आदिवासी परिवारों की मजबूरी को भुनाता आ रहा है। विडंबना यह है कि जिस राज्य में सरकार 'बाल संरक्षण' के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं से बच्चे हर महीने दक्षिण भारत के शहरों में 'सप्लाई' किए जाते हैं। मुख्य आरोपी हरिहर कुमार अभी भी फरार है — यह सवाल उठता है कि क्या AHTU इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंच पाएगी, या फिर यह मामला भी एक छोटे आरोपी की गिरफ्तारी तक सिमट कर रह जाएगा? RPF की चौकसी सराहनीय है, लेकिन असली जीत तभी होगी जब पूरा नेटवर्क ध्वस्त हो।
NationPress
27/04/2026

Frequently Asked Questions

हटिया रेलवे स्टेशन पर किसे और कैसे बचाया गया?
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने हटिया स्टेशन पर चेकिंग के दौरान तीन नाबालिग बच्चों को मानव तस्कर नयन कुमार के चंगुल से मुक्त कराया। आरोपी इन बच्चों को नौकरी का झांसा देकर बेंगलुरु ले जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपी नयन कुमार कौन है और वह क्या करता था?
नयन कुमार पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का 27 वर्षीय निवासी है। वह बेंगलुरु की निर्माण साइटों पर मजदूर सप्लाई करता था और हर मजदूर पर ₹300-₹400 मासिक कमीशन कमाता था।
इस मानव तस्करी नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है?
आरोपी नयन कुमार ने खुलासा किया कि वह हरिहर कुमार नामक व्यक्ति के इशारे पर काम करता था। हरिहर कुमार गरीब परिवारों को पैसों का लालच देकर उनके बच्चों को बाहर भेजने के लिए तैयार करता है।
बचाए गए बच्चों को कहां भेजा गया है?
रेस्क्यू किए गए तीनों नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रूप से 'बालाश्रय' रांची भेज दिया गया है। यह एक सरकारी बाल संरक्षण गृह है।
झारखंड में मानव तस्करी की समस्या कितनी गंभीर है?
NCRB के आंकड़ों के अनुसार झारखंड मानव तस्करी के मामलों में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। पुरुलिया-झारखंड सीमावर्ती क्षेत्र तस्करों का एक सक्रिय गलियारा माना जाता है जहां से बच्चों को दक्षिण भारत भेजा जाता है।
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