कालेश्वरम घोटाले में CBI जांच के लिए तेलंगाना सरकार बनाएगी दबाव, रेवंत रेड्डी ने दिए निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- 27 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को CBI को पत्र लिखकर कालेश्वरम परियोजना की तत्काल जांच का अनुरोध करने के निर्देश दिए।
- सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने स्पष्ट किया कि CBI जांच के रास्ते में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
- हाई कोर्ट ने जस्टिस पी.सी. घोष आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट को वैध माना; KCR व हरीश राव को क्लीन चिट नहीं दी।
- राज्य सरकार नौ महीने पहले ही CBI को पत्र लिख चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- 23 अप्रैल 2026 को राज्य मंत्रिमंडल ने CBI पर दबाव बढ़ाने का औपचारिक निर्णय लिया था।
तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने कालेश्वरम सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर दबाव बनाने का औपचारिक निर्णय लिया है। 27 अप्रैल को मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को CBI को पत्र लिखकर तत्काल जांच शुरू करने का अनुरोध करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम: बैठक से निर्देश तक
हाल ही में हाई कोर्ट के फैसले के मद्देनजर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी से विधिक परामर्श लिया गया और आगे की कार्ययोजना तय की गई। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को यह भी निर्देश दिया कि यदि आवश्यक हो, तो वे CBI निदेशक से मिलने का समय मांगें और औपचारिक ज्ञापन सौंपें।
कानूनी स्थिति: CBI जांच में कोई बाधा नहीं
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने मुख्यमंत्री को स्पष्ट किया कि कालेश्वरम परियोजना से जुड़ा कोई भी मामला फिलहाल किसी अदालत में विचाराधीन नहीं है, इसलिए CBI की जांच के रास्ते में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि हाई कोर्ट ने जस्टिस पी.सी. घोष आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट में सरकार की ओर से कोई त्रुटि नहीं पाई, और न ही आयोग के निष्कर्षों पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी की।
केसीआर और हरीश राव को क्लीन चिट नहीं: उत्तम कुमार रेड्डी
सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने स्पष्ट रूप से कहा कि हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव को किसी प्रकार की क्लीन चिट नहीं दी है। उन्होंने बताया कि अदालत ने KCR और हरीश राव की वह मुख्य याचिका खारिज कर दी जिसमें आयोग को अवैध घोषित करने और उसकी रिपोर्ट रद्द करने की मांग की गई थी। हालांकि, कुछ तकनीकी कारणों से अदालत ने यह भी कहा कि दोनों के विरुद्ध अभी कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
नौ महीने बाद भी CBI चुप: राज्य सरकार का आरोप
उत्तम कुमार रेड्डी ने याद दिलाया कि राज्य सरकार पहले ही CBI को जांच के लिए पत्र लिख चुकी है और इसे नौ महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 23 अप्रैल को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में CBI पर दबाव बढ़ाने का औपचारिक निर्णय लिया गया था।
आम जनता पर असर और आगे की राह
गौरतलब है कि कालेश्वरम परियोजना तेलंगाना की सबसे महत्वाकांक्षी और विवादास्पद सिंचाई परियोजनाओं में से एक है, जिस पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि इस परियोजना में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं जिनसे आम जनता का पैसा बर्बाद हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो रही है। अब सभी की नजरें CBI की प्रतिक्रिया और अगले कानूनी कदम पर टिकी हैं।