मोहन भागवत: राम मंदिर सबकी भागीदारी से बना, अब 'राम राज्य' की जिम्मेदारी समाज की
सारांश
Key Takeaways
- डॉ. मोहन भागवत ने २७ अप्रैल को नागपुर में कहा कि राम मंदिर सबकी भागीदारी से बना और अब 'राम राज्य' की जिम्मेदारी समाज की है।
- चंपत राय ने बताया कि मंदिर को १,००० वर्षों तक टिकाऊ बनाने के लिए लोहे और सीमेंट का न्यूनतम उपयोग किया गया।
- लगभग १० करोड़ लोगों के सहयोग से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परियोजना पूर्ण हुई।
- भागवत ने १८५७ से २०१४ तक की भारत की पुनरुत्थान यात्रा का उल्लेख किया और नरेंद्र मोदी सरकार को एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
- डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा आयोजित समारोह में गोविंददेव गिरी महाराज और भैयाजी जोशी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
- भागवत ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं — यह स्वयंसिद्ध सत्य है।
नागपुर, २७ अप्रैल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को नागपुर में कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण करोड़ों भारतीयों की सामूहिक आस्था और परिश्रम का परिणाम है, और अब 'राम राज्य' की स्थापना की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति, नागपुर द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह में उन्होंने यह उद्गार व्यक्त किए, जिसमें मंदिर निर्माण में योगदान देने वाली विभूतियों का अभिनंदन किया गया।
समारोह का आयोजन और प्रमुख उपस्थिति
नागपुर में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। समारोह में डॉ. मोहन भागवत के अतिरिक्त पूज्य गोविंददेव गिरी महाराज, समिति अध्यक्ष सुरेश 'भैयाजी' जोशी, उपाध्यक्ष श्रीधर गाडगे तथा चंपत राय सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे। यह आयोजन उन सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए किया गया जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में अपना योगदान दिया।
भागवत का गोवर्धन उपमा से संदेश
डॉ. भागवत ने अपने संबोधन में गोवर्धन पर्वत की प्रसिद्ध कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे भगवान की उंगली तब तक काम नहीं करती जब तक बाकी सभी लोग अपनी लकड़ी नहीं लगाते, उसी प्रकार राम मंदिर का निर्माण भी भारतवर्ष के एक-एक नागरिक के योगदान से संभव हुआ। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का उत्थान होने के लिए भारतवर्ष का उत्थान अनिवार्य है, यह बात १५० वर्ष पूर्व योगी अरविंद ने घोषित की थी। भागवत ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।
२०१४ और भारत के पुनरुत्थान का संदर्भ
डॉ. भागवत ने कहा कि १८५७ से शुरू हुई उत्थान की प्रक्रिया २०१४ में एक नए पड़ाव पर पहुंची, जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार ने शपथ ली। उन्होंने बताया कि उस समय लंदन के गार्डियन अखबार ने लिखा था कि इस दिन भारतीयों ने तकनीकी रूप से अंग्रेजों को अलविदा कहा। भागवत ने कहा कि १५ अगस्त १९४७ को स्वतंत्रता तो मिली, परंतु मानसिक स्वतंत्रता की यात्रा उसके बाद भी जारी रही। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को पुनः स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।
संघ की १०० साल की यात्रा और हिंदू राष्ट्र का संदर्भ
गौरतलब है कि डॉ. भागवत ने डॉ. हेडगेवार की दृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ के पास प्रारंभ में न प्रसिद्धि थी, न सत्ता, न साधन और न धन — फिर भी श्रद्धा और विश्वास के बल पर यह यात्रा आगे बढ़ती रही। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी खिल्ली उड़ाते थे, वे आज स्वयं कह रहे हैं कि भारत हिंदुओं का देश है। भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं, जो सत्य है वह स्वयंसिद्ध है — जैसे सूरज पूरब से ही उगता है।
राम राज्य की प्रजा और समाज की भूमिका
भैयाजी जोशी ने कहा कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हिंदू समाज के स्वाभिमान और पुनर्स्थापना का प्रतीक है। चंपत राय ने मंदिर निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलू साझा करते हुए बताया कि मंदिर को १,००० वर्षों तक टिकाऊ बनाने के लिए इसमें लोहे और सीमेंट का न्यूनतम उपयोग किया गया है। देशभर के कारीगरों, इंजीनियरों और संस्थानों के सहयोग से यह निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और लगभग १० करोड़ लोगों के सहयोग से यह परियोजना साकार हुई। डॉ. भागवत ने अंत में कहा कि जो प्रत्येक मन को अयोध्या बनाकर राष्ट्र का मंदिर खड़ा करना है, वह काम हम सबको अपने-अपने स्थान पर करना होगा और यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी।