बरहरवा रेलवे स्टेशन पर ऑपरेशन 'नन्हे फरिश्ते' के तहत तीन नाबालिगों का सफल रेस्क्यू
सारांश
Key Takeaways
- आरपीएफ ने तीन नाबालिग लड़कों को बचाया।
- ऑपरेशन 'नन्हे फरिश्ते' का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा है।
- बच्चों को बाल संरक्षण मंथन में सौंपा गया।
- इस वर्ष 20 से अधिक बच्चों को सुरक्षित किया गया।
- यह कार्रवाई मानव तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है।
मालदा, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा और निगरानी के तहत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने ऑपरेशन 'नन्हे फरिश्ते' के अंतर्गत बरहरवा रेलवे स्टेशन से तीन नाबालिग लड़कों को सुरक्षित रूप से बचाया।
यह महत्वपूर्ण कार्रवाई मालदा डिविजनल रेलवे मैनेजर मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में और आशीम कुमार कुल्लू, डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर, आरपीएफ मालदा की देखरेख में की गई।
आरपीएफ की टीम नियमित जांच कर रही थी, तभी प्लेटफॉर्म पर आरपीएफ ने लगभग 16 से 17 वर्ष की आयु के तीन नाबालिग लड़कों को संदिग्ध और उद्देश्यहीन रूप से घूमते हुए देखा। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आरपीएफ के जवानों ने तुरंत उन्हें अपने संरक्षण में लिया और आरपीएफ पोस्ट में पूछताछ की, साथ ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की।
बाद में इन नाबालिगों को आगे की देखभाल, काउंसलिंग और कानूनी प्रक्रिया के लिए बाल संरक्षण मंथन, बरहरवा के अधिकृत प्रतिनिधियों को सौंप दिया गया।
आरपीएफ का कहना है कि यह कार्रवाई मालदा डिवीजन की आरपीएफ की सतर्कता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो रेलवे परिसरों में नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
इससे पहले, 2 फरवरी को बरहरवा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ के जवानों ने सफलतापूर्वक दो नाबालिग बच्चों को बचाया था। सामान्य गश्त के दौरान सुबह लगभग 8:20 बजे आरपीएफ कर्मियों ने ट्रेन संख्या 15734 (फरक्का एक्सप्रेस डाउन) के आरक्षित कोच में एक तीन महीने का नाबालिग लड़का और एक आठ साल की नाबालिग लड़की को अकेला पाया।
आरपीएफ टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्चों को अपने संरक्षण में लिया। सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए बच्चों की देखभाल की गई और उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए बाल संरक्षण मंथन, बरहरवा (साहिबगंज) के हवाले कर दिया गया, जिससे बच्चों को संभावित खतरों से सुरक्षित किया जा सका।
बरहरवा के आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि 2024 में 10 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया था, जिनके चंगुल से 28 बच्चों को बचाया गया। वर्ष 2024 में कुल 73 बच्चों और बच्चियों को रेस्क्यू किया गया।
जानकारी के अनुसार, इस वर्ष अब तक 20 से अधिक बच्चों को बचाया जा चुका है।