दिग्विजय सिंह की CM मोहन यादव और जीतू पटवारी से मुलाकात, मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल
सारांश
Key Takeaways
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार, 1 मई 2026 को भोपाल में बैठकों की एक शृंखला की, जिसने मध्य प्रदेश के सियासी हलकों में अटकलों का दौर तेज कर दिया। पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात और फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ बंद कमरे में हुई चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।
मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात
घटनाक्रम की शुरुआत शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री निवास पर हुई, जहाँ दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की। इस बैठक में दिग्विजय सिंह ने किसानों से जुड़े मुद्दे, विशेषकर गेहूं खरीदी की मौजूदा प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया।
मुलाकात के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को किसानों की परेशानियों से अवगत कराया और गेहूं खरीदी सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए समय पर समाधान की जरूरत पर जोर दिया। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदी के स्लॉट पहले ही बुक किए जा चुके हैं और प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है।
इस मुलाकात के दौरान दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री यादव को अपने गृह नगर राघौगढ़ में इस महीने के अंत में होने वाले एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
जीतू पटवारी के साथ बंद कमरे में बैठक
शाम होते-होते सियासी हलचल दिग्विजय सिंह के निवास पर पहुँच गई, जहाँ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उनसे बंद कमरे में मुलाकात की। इस बैठक में राज्यसभा सांसद अशोक सिंह भी मौजूद थे।
दिग्विजय सिंह के कार्यालय ने बैठक की पुष्टि की और जीतू पटवारी के निवास से निकलने का एक छोटा वीडियो भी जारी किया, लेकिन चर्चा का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे बैठक के मकसद को लेकर अटकलें और तेज हो गईं।
एक दिन पहले की नोकझोंक का संदर्भ
यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि एक दिन पहले गुरुवार को कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की बैठक में दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच हल्की नोकझोंक देखने को मिली थी। उस बैठक में दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस में वाल्मीकि और बसोड़ समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था और ज्यादा भागीदारी की वकालत की थी।
उन्होंने जीतू पटवारी के केंद्रीय नेतृत्व से बेहतर तालमेल का जिक्र करते हुए कहा था कि संगठनात्मक मामलों में उन्हें काफी फ्री हैंड मिला हुआ है। इस पर जीतू पटवारी ने सम्मानजनक अंदाज में कहा,