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इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: 3 मई को भूमि पूजन करेंगे CM मोहन यादव, किसानों को मिलेगी 60% विकसित जमीन

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इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: 3 मई को भूमि पूजन करेंगे CM मोहन यादव, किसानों को मिलेगी 60% विकसित जमीन

सारांश

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर महज़ एक सड़क परियोजना नहीं — यह मध्य प्रदेश की औद्योगिक महत्वाकांक्षा का नया पड़ाव है। ₹2,360 करोड़ की इस योजना में किसानों को 60% विकसित जमीन देने का फ़ैसला भूमि अधिग्रहण की पुरानी कड़वाहट को मीठा करने की कोशिश है — और 3 मई का भूमि पूजन इस बदलाव की असली परीक्षा होगी।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव 3 मई 2026 को इंदौर के नैनोद गांव, सेक्टर-ए में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमि पूजन करेंगे।
परियोजना 1,300 हेक्टेयर में फैली है, कुल अनुमानित लागत ₹2,360 करोड़ ; पहले चरण की लागत ₹326.51 करोड़ ।
किसानों को मिलने वाली विकसित जमीन की हिस्सेदारी 50% से बढ़ाकर 60% की गई, जिससे स्वैच्छिक भागीदारी बढ़ी।
75 मीटर चौड़ी और 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में विकास कार्य होंगे।
परियोजना से औद्योगिक, व्यावसायिक और सेवा क्षेत्र में निवेश और स्थानीय रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना को तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ाने की घोषणा की है। राज्य सरकार ने किसानों को मिलने वाली विकसित जमीन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी है, जिससे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। परियोजना के पहले चरण का भूमि पूजन 3 मई 2026 को इंदौर के नैनोद गांव स्थित सेक्टर-ए में मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा।

परियोजना का स्वरूप और दायरा

यह परियोजना कुल 1,300 हेक्टेयर भूमि में फैली है और इसकी अनुमानित कुल लागत ₹2,360 करोड़ है। योजना के अंतर्गत 75 मीटर चौड़ी और 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में औद्योगिक, व्यावसायिक और सेवा क्षेत्र के लिए आधुनिक बुनियादी ढाँचा विकसित किया जाएगा।

पहले चरण की अनुमानित लागत ₹326.51 करोड़ है, जिसके साथ बुनियादी ढाँचे के विकास कार्यों की शुरुआत होगी। इसमें सड़क, बिजली और पानी जैसी आवश्यक सुविधाएँ शामिल हैं।

किसानों के लिए क्या बदला

परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती किसानों की सहमति से भूमि अधिग्रहण थी, क्योंकि इंदौर शहर के निकट होने के कारण इस क्षेत्र की जमीन की माँग काफी अधिक है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने किसानों को उनकी मूल जमीन के बदले विकसित जमीन देने का निर्णय लिया और हिस्सेदारी को 50 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया।

इस फ़ैसले के बाद किसान स्वेच्छा से परियोजना में भागीदारी कर रहे हैं। 60 प्रतिशत विकसित जमीन मिलने से किसान इसका उपयोग आवास, व्यापार या अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगे, जिससे उनके और उनके परिवार के लिए स्थायी आय का स्रोत बनेगा।

औद्योगिक विकास पर असर

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक बुनियादी ढाँचे के ज़रिए बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि पीथमपुर पहले से ही मध्य प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, और इस कॉरिडोर से उसकी क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार होने की संभावना है।

परियोजना के तहत औद्योगिक, व्यावसायिक और सेवा क्षेत्रों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

सरकार की प्राथमिकता और आगे की राह

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों के हित को प्राथमिकता देकर विकास और जनकल्याण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान संगठनों की आपत्तियाँ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई हैं।

3 मई 2026 के भूमि पूजन के बाद पहले चरण के निर्माण कार्य शुरू होंगे, और परियोजना के पूर्ण होने पर यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के औद्योगिक मानचित्र पर एक निर्णायक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'विकसित जमीन' की परिभाषा और उसकी डिलीवरी की समयसीमा क्या होगी — जो प्रेस नोट में अनुपस्थित है। मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण से जुड़े पिछले विवादों को देखते हुए, किसानों का 'भरोसा बढ़ना' तब तक अधूरी कहानी है जब तक स्वतंत्र सत्यापन तंत्र न हो। इंदौर-पीथमपुर औद्योगिक बेल्ट की क्षमता निर्विवाद है, लेकिन ₹2,360 करोड़ की परियोजना का लाभ स्थानीय किसानों और युवाओं तक पहुँचे, यह सुनिश्चित करना सरकार की असली जवाबदेही होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार की एक प्रमुख औद्योगिक परियोजना है जो 1,300 हेक्टेयर भूमि में फैली है और इसकी कुल अनुमानित लागत ₹2,360 करोड़ है। इसके तहत 75 मीटर चौड़ी और 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर औद्योगिक, व्यावसायिक और सेवा क्षेत्र के लिए आधुनिक बुनियादी ढाँचा विकसित किया जाएगा।
3 मई को भूमि पूजन कहाँ होगा?
भूमि पूजन 3 मई 2026 को इंदौर के नैनोद गांव स्थित सेक्टर-ए में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया जाएगा। यह परियोजना के पहले चरण की शुरुआत होगी, जिसकी अनुमानित लागत ₹326.51 करोड़ है।
किसानों को इस परियोजना में क्या लाभ मिलेगा?
किसानों को उनकी मूल जमीन के बदले 60 प्रतिशत विकसित जमीन दी जाएगी, जिसमें सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। पहले यह हिस्सेदारी 50 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया गया है।
इस परियोजना से क्षेत्र में क्या बदलाव आएगा?
परियोजना से इंदौर-पीथमपुर क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक बुनियादी ढाँचा तैयार होगा, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय युवाओं को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे। पीथमपुर पहले से ही मध्य प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है और यह कॉरिडोर उसकी क्षमता को और विस्तार देगा।
भूमि अधिग्रहण की सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?
इंदौर शहर के निकट होने के कारण इस क्षेत्र की जमीन की माँग काफी अधिक है, जिससे किसानों की सहमति से भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती थी। सरकार ने विकसित जमीन की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत करके इस चुनौती का समाधान निकालने का प्रयास किया है।
राष्ट्र प्रेस
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