एनएफआर का बड़ा कदम: रेल सुरक्षा के लिए मार्च 2026 में 1,258 बैटरियां बदलीं, 5 स्टेशनों पर नई स्विच मशीनें लगाईं
सारांश
Key Takeaways
- 5 स्टेशनों पर क्लैंप-लॉकिंग वाली थिक वेब स्विच पॉइंट मशीनें लगाई गईं — कटिहार, अलीपुरद्वार, रंगिया और लुमडिंग मंडलों में।
- 32 लेवल क्रॉसिंग गेटों और 7 स्टेशनों पर 'सिस्टम इंटीग्रिटी टेस्टिंग' पूरी की गई।
- पूरे जोन में 1,258 सिग्नलिंग बैटरियां बदली गईं और 246 ग्लूएड जॉइंट व 92 सिग्नल एलईडी प्रतिस्थापित किए गए।
- तिनसुकिया मंडल में एडवांस एस्पिरेशन-टाइप फायर डिटेक्शन सिस्टम और इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर लगाए गए।
- 10 'स्लाइडिंग बूम' कटिहार, लुमडिंग और रंगिया मंडलों में चालू किए गए।
- गौरीपुर स्टेशन (अलीपुरद्वार मंडल) पर बेहतर 'अर्थिंग' व्यवस्था की गई, जिससे उपकरणों को बिजली के झटकों से सुरक्षा मिलेगी।
गुवाहाटी, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने मार्च 2026 के दौरान रेल सुरक्षा और परिचालन विश्वसनीयता को नई ऊंचाई देने के लिए अपने बुनियादी ढांचे में व्यापक तकनीकी सुधार किए हैं। मालीगांव, गुवाहाटी स्थित मुख्यालय से संचालित इस जोन ने सिग्नलिंग प्रणाली, अग्नि सुरक्षा और लेवल क्रॉसिंग गेटों पर एक साथ कई मोर्चों पर काम किया। यह कदम उस समय आया है जब देशभर में रेल दुर्घटनाओं को लेकर जागरूकता और जवाबदेही की मांग तेज हो रही है।
मुख्य अपग्रेड: स्विच मशीनें और सिस्टम इंटीग्रिटी टेस्टिंग
एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि कटिहार (बिहार), अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल), रंगिया और लुमडिंग (असम) मंडलों के पांच स्टेशनों पर क्लैंप-प्रकार की लॉकिंग वाली 'थिक वेब स्विच पॉइंट मशीनें' स्थापित की गई हैं। ये मशीनें ट्रेन की पटरी बदलने की प्रक्रिया को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाती हैं, जिससे डिरेलमेंट का खतरा काफी कम होता है।
इसके साथ ही कटिहार, अलीपुरद्वार और तिनसुकिया (असम) मंडलों के सात स्टेशनों पर 'सिस्टम इंटीग्रिटी टेस्टिंग' पूरी की गई। इसके अतिरिक्त, सभी मंडलों में 32 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर भी यह परीक्षण अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
लेवल क्रॉसिंग सुरक्षा में बड़े बदलाव
रेल-सड़क चौराहों पर हादसों को रोकने के लिए लुमडिंग और रंगिया मंडलों में कई लेवल क्रॉसिंग गेटों को इंटरलॉक किया गया है। इंटरलॉकिंग से यह सुनिश्चित होता है कि जब ट्रेन आ रही हो तो गेट स्वतः बंद हो जाए और मानवीय चूक की गुंजाइश न रहे।
कटिहार, लुमडिंग और रंगिया मंडलों में विभिन्न लेवल क्रॉसिंग गेटों पर 10 'स्लाइडिंग बूम' चालू किए गए हैं। वहीं, तिनसुकिया मंडल के दो लेवल क्रॉसिंग गेटों पर पुरानी यांत्रिक प्रणालियों की जगह 'इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर' लगाए गए हैं, जो आधुनिक और तेज प्रतिक्रिया देने में सक्षम हैं।
अग्नि सुरक्षा और सिग्नलिंग में तकनीकी छलांग
तिनसुकिया मंडल के दो स्टेशनों पर स्वचालित 'अग्नि पहचान और अलार्म प्रणाली' चालू की गई है। इनमें से दो स्थानों पर एडवांस 'एस्पिरेशन-प्रकार' की प्रणाली अपग्रेड की गई है, जो आग की शुरुआती अवस्था में ही धुएं के सूक्ष्म कणों को पहचान लेती है — यह तकनीक पारंपरिक स्मोक डिटेक्टर से कहीं अधिक संवेदनशील मानी जाती है।
सिग्नलिंग तंत्र को और मजबूत बनाने के लिए 11 स्टेशनों और 12 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर 'सिग्नलिंग केबल मेगरिंग' की गई है। इससे केबल के इन्सुलेशन की गुणवत्ता जांची जाती है, जो सिग्नल फेलियर से बचाव में अहम भूमिका निभाती है।
1,258 बैटरियां बदलीं, 246 ग्लूएड जॉइंट अपग्रेड
सुरक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सभी मंडलों में विभिन्न क्षमताओं वाली 1,258 सिग्नलिंग बैटरियां बदली गई हैं। पूरे जोन में 246 'ग्लूएड जॉइंट' और 92 'एकीकृत-प्रकार' के सिग्नल एलईडी भी प्रतिस्थापित किए गए हैं।
इसके अलावा, अलीपुरद्वार मंडल के गौरीपुर स्टेशन पर बेहतर 'अर्थिंग' व्यवस्था की गई है, जो बिजली के झटकों और उपकरण क्षति से सुरक्षा प्रदान करती है।
व्यापक संदर्भ: क्यों जरूरी हैं ये सुधार
गौरतलब है कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे एक भौगोलिक रूप से जटिल क्षेत्र में संचालित होता है — इसमें पूर्वोत्तर के आठ राज्य, पश्चिम बंगाल के सात जिले और उत्तरी बिहार के पांच जिले शामिल हैं। पहाड़ी इलाकों, नदी पुलों और घने जंगलों से गुजरने वाली रेल लाइनों पर सिग्नलिंग विफलता या लेवल क्रॉसिंग पर लापरवाही का परिणाम बेहद घातक हो सकता है।
भारतीय रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, देश में होने वाली रेल दुर्घटनाओं में एक बड़ा हिस्सा सिग्नलिंग खामियों और मानव रहित लेवल क्रॉसिंग से जुड़ा होता है। ऐसे में एनएफआर द्वारा किए गए ये अपग्रेड न केवल तकनीकी सुधार हैं, बल्कि लाखों यात्रियों की जान की सुरक्षा से सीधे जुड़े हैं।
सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा कि एनएफआर अपने बुनियादी ढांचे की निरंतर निगरानी और सुदृढ़ीकरण के जरिए यात्रियों को सुरक्षित, कुशल और समयबद्ध यात्रा अनुभव देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले महीनों में और अधिक स्टेशनों पर इसी तरह के अपग्रेड की उम्मीद है।