26 जून 2026
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नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने मानसून 2026 की तैयारी तेज की, भूस्खलन-बाढ़ से निपटने की पूरी योजना

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नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने मानसून 2026 की तैयारी तेज की, भूस्खलन-बाढ़ से निपटने की पूरी योजना

सारांश

पूर्वोत्तर भारत में हर मानसून रेल पटरियाँ तबाह होती हैं — इस बार NFR ने पहले से ही मोर्चा संभाल लिया है। 24x7 नियंत्रण कक्ष, IMD के साथ सीधा समन्वय, 'इमरजेंसी ऑन व्हील्स' ट्रेनें और लाखों घन मीटर राहत सामग्री के साथ NFR ने मानसून 2026 को एक परीक्षण में बदलने की तैयारी की है।

मुख्य बातें

नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने जून-सितंबर 2026 मानसून सीज़न के लिए व्यापक तैयारियाँ लागू कीं।
संवेदनशील स्थानों पर स्थायी चौकीदार तैनात और पहाड़ी क्षेत्रों में जलस्तर मापक यंत्र स्थापित।
'इमरजेंसी ऑन व्हील्स' ट्रेनें तकनीकी कर्मचारियों और उपकरणों के साथ तत्काल प्रतिक्रिया के लिए तैयार।
लुमडिंग डिवीज़न में 40,000 से अधिक सीमेंट बैग और 10,000-12,000 घन मीटर बोल्डर स्टॉक।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साथ समन्वय और 24x7 नियंत्रण कक्ष सक्रिय।
सभी डिवीज़नों में त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) गठित, मामूली सामग्री कमियों की भरपाई जारी।

नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने जून से सितंबर 2026 तक चलने वाले चार महीने के मानसून सीज़न में सुरक्षित और निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीतिक तैयारियाँ लागू कर दी हैं। गुवाहाटी स्थित NFR मुख्यालय के अधिकारियों ने 28 अप्रैल 2026 को मंगलवार को यह जानकारी दी। पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारी वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ के ऐतिहासिक खतरे को देखते हुए इस बार तैयारी पहले से कहीं अधिक व्यापक बताई जा रही है।

स्थायी चौकीदार और जल-स्तर निगरानी तंत्र

NFR के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिनजल किशोर शर्मा ने बताया कि संवेदनशील स्थानों पर स्थायी चौकीदार रणनीतिक रूप से तैनात किए गए हैं, जो पटरियों की स्थिति पर लगातार नज़र रखेंगे और किसी भी खतरे का पता चलने पर तत्काल अलर्ट जारी करेंगे। इसके अलावा, पहाड़ी क्षेत्रों सहित महत्वपूर्ण स्थानों पर जलस्तर मापने वाले यंत्र (गेज) स्थापित किए गए हैं, जो वास्तविक समय में जलस्तर की निगरानी करेंगे।

शर्मा ने यह भी बताया कि तटबंधों को मज़बूत करके, जल निकासी प्रणालियों में सुधार करके और प्राकृतिक जल प्रवाह चैनलों की सफाई करके भूस्खलन और बाढ़-संभावित क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित बनाया गया है।

इमरजेंसी ऑन व्हील्स और त्वरित प्रतिक्रिया दल

आपात स्थितियों में तेज़ प्रतिक्रिया के लिए 'इमरजेंसी ऑन व्हील्स' ट्रेनें पूरी तरह सुसज्जित रखी गई हैं। इन ट्रेनों में तकनीकी कर्मचारी और आवश्यक उपकरण मौजूद हैं, जो किसी भी स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

भूस्खलन, पटरियों के बह जाने और जलभराव जैसी घटनाओं से शीघ्र निपटने के लिए सभी डिवीज़नों में त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) गठित किए गए हैं। इन दलों को सामान्य परिचालन जल्द से जल्द बहाल करने और यात्री एवं माल ढुलाई सेवाओं में व्यवधान न्यूनतम रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

डिवीज़नवार सामग्री भंडारण का विवरण

मानसून 2026 की तैयारियों के तहत सभी डिवीज़नों में राहत सामग्री रणनीतिक रूप से स्टॉक की गई है। अधिकारियों ने डिवीज़नवार विवरण इस प्रकार साझा किया:

लुमडिंग डिवीज़न: लगभग 10,000 से 12,000 घन मीटर बोल्डर, 2,000 से 3,000 घन मीटर रेत खदान की धूल और 40,000 से अधिक सीमेंट बैग

तिनसुकिया डिवीज़न: लगभग 400 से 600 घन मीटर बोल्डर, 100 से 150 घन मीटर रेत खदान की धूल और 7,000 से अधिक सीमेंट बैग

रंगिया डिवीज़न: लगभग 6,000 से 8,000 घन मीटर बोल्डर, 1,000 घन मीटर से अधिक रेत खदान की धूल और 5,000 से अधिक सीमेंट बोरियाँ

अलीपुरदुआर डिवीज़न: 20,000 घन मीटर से अधिक बड़े पत्थर और अन्य सामग्रियों की महत्वपूर्ण मात्रा।

कटिहार डिवीज़न: लगभग 3,000 से 5,000 घन मीटर बड़े पत्थर, 800 से 1,200 घन मीटर रेत खदान की धूल और 20,000 से अधिक सीमेंट बोरियाँ

अधिकारियों के अनुसार, सभी डिवीज़नों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और मामूली कमियों की भरपाई की प्रक्रिया जारी है। बचाव एवं पुनर्प्राप्ति अभियानों के लिए सभी डिवीज़नों में विभिन्न क्षमताओं के विंच क्रैब, जैक, टिरफोर और ट्राइपॉड भी उपलब्ध रखे गए हैं।

IMD के साथ समन्वय और 24x7 नियंत्रण कक्ष

NFR वास्तविक समय में मौसम संबंधी अलर्ट और पूर्वानुमान प्राप्त करने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साथ मिलकर काम कर रहा है। यह समन्वय रेलवे नियंत्रण कक्षों को — जो 24 घंटे, सातों दिन कार्यरत रहते हैं — ट्रेनों की आवाजाही और जमीनी तैनाती के बारे में सक्रिय निर्णय लेने में सहायता करता है।

गौरतलब है कि हर मानसून सीज़न में रेलवे का बुनियादी ढाँचा बाधित होता है, जिससे पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों के बीच रेल संपर्क प्रभावित होता है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में मानसून की तीव्रता पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है।

यात्रियों के लिए सलाह

NFR ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से नवीनतम जानकारी प्राप्त करते रहें और रेलवे अधिकारियों के साथ सहयोग करें। शर्मा ने कहा कि इन व्यापक उपायों के साथ NFR मानसून सीज़न में सुरक्षा, परिचालन दक्षता और यात्री सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले हफ्तों में मानसून-पूर्व अंतिम निरीक्षण दौर पूरा किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्वोत्तर में हर साल मानसून के बाद रेल सेवाएँ बाधित होने की खबरें आती हैं — यानी तैयारी और क्रियान्वयन के बीच की खाई वास्तविक है। सामग्री भंडारण के आँकड़े प्रभावशाली हैं, परंतु असली परीक्षण यह होगा कि जब भूस्खलन एक साथ कई स्थानों पर हो, तब QRT कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देते हैं। IMD के साथ समन्वय एक सकारात्मक कदम है, लेकिन पिछले वर्षों में भी ऐसे दावे किए गए थे और फिर भी असम-मेघालय मार्ग पर लंबे व्यवधान देखे गए। जब तक प्रदर्शन के आँकड़े सार्वजनिक नहीं होते, यह घोषणा एक और मौसमी प्रेस विज्ञप्ति से अधिक नहीं लगती।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने मानसून 2026 के लिए क्या तैयारियाँ की हैं?
NFR ने संवेदनशील स्थानों पर स्थायी चौकीदार तैनात किए हैं, जलस्तर मापक यंत्र लगाए हैं, 'इमरजेंसी ऑन व्हील्स' ट्रेनें तैयार रखी हैं और सभी डिवीज़नों में राहत सामग्री का बड़ा भंडार किया है। IMD के साथ समन्वय और 24x7 नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय हैं।
NFR के किन डिवीज़नों में सबसे अधिक सामग्री स्टॉक की गई है?
लुमडिंग डिवीज़न में सबसे अधिक 40,000 से अधिक सीमेंट बैग और 10,000-12,000 घन मीटर बोल्डर स्टॉक हैं। अलीपुरदुआर डिवीज़न में 20,000 घन मीटर से अधिक बड़े पत्थर उपलब्ध हैं।
'इमरजेंसी ऑन व्हील्स' ट्रेन क्या होती है?
'इमरजेंसी ऑन व्हील्स' एक विशेष रूप से सुसज्जित ट्रेन है जिसमें तकनीकी कर्मचारी और आवश्यक उपकरण मौजूद रहते हैं। यह आपात स्थितियों जैसे भूस्खलन या पटरी बह जाने पर तुरंत घटनास्थल पर पहुँचकर मरम्मत कार्य शुरू करती है।
NFR मानसून के दौरान मौसम अलर्ट कैसे प्राप्त करता है?
NFR भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साथ समन्वय करके वास्तविक समय में मौसम संबंधी अलर्ट और पूर्वानुमान प्राप्त करता है। इससे 24x7 सक्रिय रेलवे नियंत्रण कक्ष ट्रेनों की आवाजाही के बारे में सक्रिय निर्णय ले सकते हैं।
मानसून में पूर्वोत्तर रेल सेवाएँ क्यों प्रभावित होती हैं?
पूर्वोत्तर भारत में मानसून के दौरान भारी वर्षा से भूस्खलन, पटरियों का बह जाना और जलभराव जैसी घटनाएँ होती हैं, जो रेल बुनियादी ढाँचे को बाधित करती हैं। इससे असम, मेघालय सहित पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों के बीच रेल संपर्क प्रभावित होता है।
राष्ट्र प्रेस
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