लोकसभा में 'एंटी-पेपर लीक' बिल पर 10 घंटे चर्चा तय, रिजिजू बोले — सरकार पूरी तरह तैयार
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र में मंगलवार, 28 जुलाई को लोकसभा में एंटी-पेपर लीक विधेयक पर चर्चा की शुरुआत हुई, जो पहले छह घंटे के लिए तय थी। विपक्ष की माँग पर केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि सरकार 10 घंटे तक बहस जारी रखने के लिए पूरी तरह सहमत है। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की सहमति से 10 घंटे की चर्चा को औपचारिक मंजूरी दे दी।
मुख्य घटनाक्रम
दोपहर दो बजे के बाद लोकसभा की कार्यवाही पुनः आरंभ हुई। शुरुआत में सभी राजनीतिक दलों ने छह घंटे की चर्चा पर सहमति जताई थी, जिसे बाद में आठ घंटे तक बढ़ाया गया। विपक्ष ने और अधिक समय की माँग की, जिस पर रिजिजू ने बिना देर किए 10 घंटे की पेशकश स्वीकार कर ली। यह विधेयक सोमवार, 27 जुलाई को कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया था।
अध्यक्ष ओम बिरला की टिप्पणी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों का इस विधेयक पर चर्चा के लिए सहमत होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का उद्देश्य लोक परीक्षाओं को और अधिक शुचितापूर्ण बनाना है। बिरला ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता राष्ट्रहित का अहम विषय है और जितना बेहतर कानून बनेगा, परीक्षा व्यवस्था उतनी ही सुदृढ़ होगी।
विपक्ष की आपत्तियाँ
चर्चा शुरू होते ही कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने ऐतराज जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस 'अत्यंत आवश्यक' विधेयक पर बहस के दौरान सदन में उपस्थित नहीं थे। विपक्ष ने चर्चा का समय बढ़ाने की माँग के साथ-साथ विधेयक की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
प्रस्तावित संशोधनों का मकसद परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करना है। विधेयक में शामिल प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
दोषी पाए जाने वालों को 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा दोषियों की संपत्ति जब्त करने और मामले का तीन माह के भीतर निपटारा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष तंत्र बनाने का प्रावधान भी है। विधेयक का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों का भविष्य पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों से पूरी तरह सुरक्षित रहे।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया है। 10 घंटे की विस्तारित चर्चा से यह संकेत मिलता है कि संसद इस विधेयक को व्यापक सहमति के साथ पारित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। आने वाले दिनों में विधेयक पर मतदान और संभावित संशोधनों की प्रक्रिया तय करेगी कि यह कानून कितना प्रभावी रूप ले पाता है।