27 जुलाई 2026
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पेपर लीक रोकने के लिए सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 सोमवार को संसद में, रिजिजू ने सांसदों से माँगा सहयोग

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पेपर लीक रोकने के लिए सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 सोमवार को संसद में, रिजिजू ने सांसदों से माँगा सहयोग

सारांश

पेपर लीक के खिलाफ सरकार का सबसे बड़ा कानूनी कदम — सोमवार को संसद में पेश होगा सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026। संगठित लीक पर 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रस्ताव। रिजिजू ने सभी सांसदों से चर्चा में भाग लेने की अपील की।

मुख्य बातें

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 सोमवार 28 जुलाई 2026 को संसद में पेश किया जाएगा।
पेपर लीक के संगठित मामलों में 10 साल तक की कैद और अधिकतम ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रस्ताव।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी सांसदों से सदन में चर्चा में भाग लेने की अपील की।
विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है; प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया वीडियो से इसकी जानकारी दी थी।
लीक-प्रूफ परीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ टीम भी गठित की जा रही है।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो चुका है; सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ा, जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन समाप्त।

केंद्र सरकार सोमवार, 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है, जो पेपर लीक के खिलाफ देश के सबसे कड़े कानूनी प्रावधानों में से एक होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर इस विधेयक की जानकारी दे चुके हैं। अब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी सांसदों से इस चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है।

मंत्री की अपील और पृष्ठभूमि

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, 'युवा पीढ़ी की बात सुनने और छात्रों के भविष्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसलों के बाद मैं सभी सांसदों से अपील करता हूँ कि वे सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लें।' यह अपील ऐसे समय में आई है जब सदन में पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही थी।

गौरतलब है कि इस विधेयक का मसौदा अधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री को सौंपा गया, जिसके बाद इसे केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई। अब यह संसद के पटल पर रखा जाना है।

विधेयक में क्या है

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मंजूर किए गए मसौदे में पेपर लीक के संगठित मामलों के लिए 10 साल तक की कैद और अधिकतम ₹10 करोड़ के जुर्माने का प्रस्ताव है। नए प्रावधानों का मकसद उन अनुचित साधनों पर सख्त रोक लगाना है जिनकी वजह से बार-बार राष्ट्रीय परीक्षाएँ प्रभावित हुई हैं और लाखों छात्रों को परेशानी उठानी पड़ी है। इसके अलावा, एक विशेषज्ञ टीम भी तैयार की जा रही है जो तकनीकी उपायों से लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली विकसित करने में मदद करेगी।

राजनीतिक माहौल और बदलाव

यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो चुका है और सदन में पेपर लीक को लेकर विपक्ष की आक्रामकता चरम पर थी। इसके साथ ही नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन समाप्त हो चुका है और सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ दिया है। इन घटनाक्रमों के बाद सरकार को उम्मीद है कि सोमवार को सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलेगी।

आम जनता और छात्रों पर असर

यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह NEET, UGC-NET और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में धोखाधड़ी और पेपर लीक के मामलों पर बड़ा अंकुश लगा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की घटनाओं ने लाखों मेधावी छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कड़े दंड प्रावधान और तकनीकी निगरानी मिलकर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल कर सकते हैं।

आगे की राह

सोमवार को सदन में विधेयक पेश होने के बाद इस पर विस्तृत चर्चा अपेक्षित है। सरकार की कोशिश है कि इसे इसी सत्र में पारित कराया जाए, ताकि आगामी परीक्षा चक्र से पहले नया कानून लागू हो सके। विशेषज्ञ टीम के गठन और तकनीकी ढाँचे की रूपरेखा भी जल्द सार्वजनिक होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि किसी दीर्घकालिक नीतिगत रोडमैप के तहत — शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और सदन में हंगामे के तुरंत बाद इसे पेश करना इसी का संकेत है। 10 साल की सज़ा और ₹10 करोड़ जुर्माना कागज़ पर कड़ा दिखता है, लेकिन असली सवाल यह है कि जाँच एजेंसियों की क्षमता और परीक्षा संस्थाओं की जवाबदेही को कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। विशेषज्ञ टीम का गठन सही दिशा है, पर बिना स्वतंत्र ऑडिट और पारदर्शी क्रियान्वयन के, यह विधेयक भी पिछले सुधारों की तरह घोषणा तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह केंद्र सरकार का वह प्रस्तावित कानून है जो पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के उपयोग पर सख्त दंड का प्रावधान करता है। संगठित लीक के मामलों में 10 साल तक की कैद और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
यह विधेयक संसद में कब पेश होगा?
सरकार इसे सोमवार, 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश करने वाली है। केंद्रीय कैबिनेट पहले ही इस मसौदे को मंजूरी दे चुकी है।
किरेन रिजिजू ने सांसदों से अपील क्यों की?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी सांसदों से अनुरोध किया है कि वे विधेयक पर चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लें, ताकि छात्रों के हित में यह कानून इसी सत्र में पारित हो सके। इससे पहले पेपर लीक के मुद्दे पर सदन की कार्यवाही बाधित हो रही थी।
इस विधेयक से छात्रों को क्या फायदा होगा?
यदि यह विधेयक पारित होता है, तो NEET, UGC-NET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में धोखाधड़ी और पेपर लीक पर कड़ा अंकुश लगेगा। साथ ही एक विशेषज्ञ टीम तकनीकी उपायों से लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली विकसित करेगी, जिससे लाखों मेधावी छात्रों को राहत मिलेगी।
सोनम वांगचुक के अनशन और जंतर-मंतर प्रदर्शन का इस विधेयक से क्या संबंध है?
जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन समाप्त हो चुका है और सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ दिया है। इन घटनाक्रमों के बाद सरकार को उम्मीद है कि सोमवार को सदन की कार्यवाही सुचारू रहेगी और विधेयक पर निर्बाध चर्चा हो सकेगी।
राष्ट्र प्रेस
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