पेपर लीक रोकने के लिए सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 सोमवार को संसद में, रिजिजू ने सांसदों से माँगा सहयोग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार सोमवार, 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है, जो पेपर लीक के खिलाफ देश के सबसे कड़े कानूनी प्रावधानों में से एक होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर इस विधेयक की जानकारी दे चुके हैं। अब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी सांसदों से इस चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है।
मंत्री की अपील और पृष्ठभूमि
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, 'युवा पीढ़ी की बात सुनने और छात्रों के भविष्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसलों के बाद मैं सभी सांसदों से अपील करता हूँ कि वे सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लें।' यह अपील ऐसे समय में आई है जब सदन में पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही थी।
गौरतलब है कि इस विधेयक का मसौदा अधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री को सौंपा गया, जिसके बाद इसे केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई। अब यह संसद के पटल पर रखा जाना है।
विधेयक में क्या है
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मंजूर किए गए मसौदे में पेपर लीक के संगठित मामलों के लिए 10 साल तक की कैद और अधिकतम ₹10 करोड़ के जुर्माने का प्रस्ताव है। नए प्रावधानों का मकसद उन अनुचित साधनों पर सख्त रोक लगाना है जिनकी वजह से बार-बार राष्ट्रीय परीक्षाएँ प्रभावित हुई हैं और लाखों छात्रों को परेशानी उठानी पड़ी है। इसके अलावा, एक विशेषज्ञ टीम भी तैयार की जा रही है जो तकनीकी उपायों से लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली विकसित करने में मदद करेगी।
राजनीतिक माहौल और बदलाव
यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो चुका है और सदन में पेपर लीक को लेकर विपक्ष की आक्रामकता चरम पर थी। इसके साथ ही नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन समाप्त हो चुका है और सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ दिया है। इन घटनाक्रमों के बाद सरकार को उम्मीद है कि सोमवार को सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलेगी।
आम जनता और छात्रों पर असर
यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह NEET, UGC-NET और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में धोखाधड़ी और पेपर लीक के मामलों पर बड़ा अंकुश लगा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की घटनाओं ने लाखों मेधावी छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कड़े दंड प्रावधान और तकनीकी निगरानी मिलकर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल कर सकते हैं।
आगे की राह
सोमवार को सदन में विधेयक पेश होने के बाद इस पर विस्तृत चर्चा अपेक्षित है। सरकार की कोशिश है कि इसे इसी सत्र में पारित कराया जाए, ताकि आगामी परीक्षा चक्र से पहले नया कानून लागू हो सके। विशेषज्ञ टीम के गठन और तकनीकी ढाँचे की रूपरेखा भी जल्द सार्वजनिक होने की संभावना है।