पेपर लीक रोकथाम विधेयक 2026: सजा 10 साल, जुर्माना ₹50 लाख — लोकसभा में चर्चा शुरू
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026' पर बहस शुरू हुई — यह विधेयक प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच मौजूदा कानून को और सख्त बनाने की सरकार की कोशिश है। प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक को विचार के लिए पेश करते हुए कहा कि यह कदम छात्रों और युवा उम्मीदवारों के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मूल कानून की पृष्ठभूमि
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 परीक्षा पेपर लीक की एक के बाद एक सामने आई घटनाओं के बाद बनाया गया था और जून 2024 में लागू हुआ था। उस मूल कानून में 15 श्रेणियों के अपराध परिभाषित किए गए थे — जिनमें प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी लीक करना, फर्जी परीक्षा वेबसाइट चलाना और अनुचित साधनों में सहायता करना शामिल थे। सभी अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य रखा गया था, जबकि परीक्षार्थी स्वयं इसके दायरे से बाहर थे।
प्रस्तावित संशोधन: क्या बदलेगा
नए विधेयक में सजा और जुर्माने दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। अनुचित साधनों के दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम कारावास तीन साल से बढ़ाकर पाँच साल और अधिकतम 10 साल तक किया जाएगा। आर्थिक जुर्माना भी ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख किया जाएगा।
परीक्षा आयोजन में शामिल सर्विस प्रोवाइडर्स पर जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ होगा और उन्हें सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से चार साल की जगह आठ साल तक रोका जा सकेगा। परीक्षा में संगठित हेरफेर के मामलों में न्यूनतम सजा पाँच साल से बढ़ाकर सात साल और जुर्माना ₹10 करोड़ तय किया जाएगा।
जाँच और मुकदमों की समय-सीमा
विधेयक में कानूनी प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए स्पष्ट समय-सीमाएं प्रस्तावित की गई हैं। केंद्र सरकार द्वारा मामला भेजे जाने के दो महीने के भीतर जाँच पूरी होनी होगी। फास्ट-ट्रैक अदालतों के प्रावधान के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष सेशन कोर्ट नामित करने होंगे।
चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे पूरे करने की अपेक्षा रखी गई है। उच्च न्यायालय में अपील की सुनवाई दो जजों की पीठ द्वारा यथासंभव इसी समय-सीमा के भीतर की जाएगी।
सरकार की प्रतिक्रिया और संदर्भ
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस संशोधन को मौजूदा व्यवस्था को अधिक असरदार और सख्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्रों में गहरा आक्रोश है और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि 2024 के मूल कानून के बाद भी पेपर लीक की शिकायतें पूरी तरह थमी नहीं हैं, जिसने इस संशोधन की ज़रूरत को और पुख्ता किया। विधेयक के पारित होने के बाद यह देखना होगा कि फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना और समय-सीमाओं का पालन ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से हो पाता है।