12 सितंबर 2026
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मोदी-शी जिनपिंग वार्ता: व्यापार घाटा $112 अरब पार, बाज़ार पहुंच और सप्लाई चेन पर बनी सहमति

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मोदी-शी जिनपिंग वार्ता: व्यापार घाटा $112 अरब पार, बाज़ार पहुंच और सप्लाई चेन पर बनी सहमति

सारांश

सात वर्षों में शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा — और एजेंडे पर सबसे बड़ा मुद्दा था $112 अरब डॉलर का व्यापार घाटा। मोदी-शी बैठक ने सप्लाई चेन निर्भरता और बाज़ार पहुंच पर सहमति तो बनाई, लेकिन असली परीक्षा अब क्रियान्वयन की होगी।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के इतर द्विपक्षीय वार्ता की।
भारत-चीन व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर $112.16 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष $99.21 अरब डॉलर था।
चीन से आयात $131.63 अरब डॉलर ; भारत का निर्यात $19.47 अरब डॉलर — असंतुलन स्पष्ट।
GTRI रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और ऑर्गेनिक केमिकल्स भारत के चीन आयात का 66 प्रतिशत हैं।
भारत अपनी छह महत्वपूर्ण खनिजों की ज़रूरत का 40 प्रतिशत से अधिक चीन से आयात करता है — EV, रक्षा और फार्मा क्षेत्र प्रभावित।
यह करीब सात वर्षों में शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा और लगातार तीसरी मोदी-शी शीर्ष बैठक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन की कमज़ोरियों और एक-दूसरे के बाज़ारों तक सार्थक एवं भरोसेमंद पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद जारी बयान में यह जानकारी दी।

बैठक की पृष्ठभूमि और महत्व

यह द्विपक्षीय वार्ता नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के इतर आयोजित की गई। उल्लेखनीय है कि करीब सात वर्षों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। यह लगातार तीसरा वर्ष भी है जब दोनों नेताओं के बीच शीर्ष स्तरीय बैठक हुई है — इससे पहले दोनों कजान और तियानजिन में मिल चुके हैं। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-चीन व्यापार घाटा नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को पुनर्संतुलित करने की मांग तेज़ हो रही है।

व्यापार असंतुलन के आंकड़े

आंकड़ों के अनुसार, भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर $112.16 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2024-25 में यह $99.21 अरब डॉलर था। इसी अवधि में भारत का चीन को निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर $19.47 अरब डॉलर पहुंचा, वहीं चीन से आयात 16.03 प्रतिशत की वृद्धि के साथ $131.63 अरब डॉलर हो गया। कुल द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 18.31 प्रतिशत बढ़कर $151.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया। गौरतलब है कि चीन अब अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है।

सप्लाई चेन निर्भरता और रणनीतिक जोखिम

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और ऑर्गेनिक केमिकल्स — ये चार क्षेत्र भारत के चीन से होने वाले कुल आयात का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा हैं। भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का लगभग 43 प्रतिशत और मशीनरी एवं कंप्यूटर आयात का लगभग 40 प्रतिशत चीन से प्राप्त करता है। इसके अलावा, भारत अपनी छह महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भी चीन से आयात करता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), फार्मास्युटिकल और रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन चीन पर काफी हद तक निर्भर रहती है।

दोनों नेताओं के बयान

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक के दौरान कहा कि चीन और भारत ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में भिन्नताएं होने के बावजूद वे 'साझा विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग और समर्थन करने में सक्षम रहे हैं।' प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग के लिए राष्ट्रपति शी का आभार व्यक्त किया और कहा कि अब दोनों देशों के पास 'द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर है।'

आगे की राह

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संपर्क में हुई प्रगति का स्वागत किया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों तथा नागरिकों की आवाजाही को और बढ़ावा देने पर सहमति जताई। दूसरी ओर, चीन कथित तौर पर भारत से निवेश नियमों में ढील की उम्मीद कर रहा है ताकि उसकी कंपनियां तेजी से बढ़ते भारतीय बाज़ार में अधिक पूंजी लगा सकें। व्यापार असंतुलन को संतुलित और टिकाऊ बनाने के लिए दोनों पक्षों ने संरचनात्मक समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन $112 अरब डॉलर का घाटा बताता है कि बातचीत और नतीजे के बीच की खाई अभी भी गहरी है। भारत की सप्लाई चेन का चीन पर 40-66 प्रतिशत तक की निर्भरता एक संरचनात्मक कमज़ोरी है जिसे केवल शिखर वार्ता से नहीं पाटा जा सकता। दूसरी ओर, चीन का निवेश नियमों में ढील का आग्रह और भारत की बाज़ार पहुंच की मांग — दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, जो इस रिश्ते की असली जटिलता को उजागर करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि चीन अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है — अमेरिका से भी बड़ा — और यह तथ्य भारत की किसी भी 'आत्मनिर्भर' रणनीति के लिए एक गंभीर प्रश्नचिह्न है।
RashtraPress
12 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोदी और शी जिनपिंग की नई दिल्ली बैठक में क्या हुआ?
12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन की कमज़ोरियों और बाज़ार पहुंच पर सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
भारत-चीन व्यापार घाटा कितना है और यह क्यों चिंताजनक है?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-चीन व्यापार घाटा $112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष $99.21 अरब डॉलर था। GTRI रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा हिस्सा चीन से आता है, जिससे सप्लाई चेन पर रणनीतिक जोखिम बना रहता है।
शी जिनपिंग की यह भारत यात्रा कितने वर्षों बाद हुई?
यह करीब सात वर्षों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा है। यह लगातार तीसरा वर्ष भी है जब प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी की शीर्ष स्तरीय बैठक हुई है — इससे पहले दोनों कजान और तियानजिन में मिल चुके हैं।
भारत की सप्लाई चेन चीन पर किस हद तक निर्भर है?
GTRI रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का लगभग 43 प्रतिशत और मशीनरी व कंप्यूटर आयात का लगभग 40 प्रतिशत चीन से करता है। इसके अलावा, छह महत्वपूर्ण खनिजों की ज़रूरत का 40 प्रतिशत से अधिक भी चीन से आता है, जिससे EV, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मा और रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
चीन भारत से क्या चाहता है और भारत की क्या मांग है?
कथित तौर पर चीन भारत से निवेश नियमों में ढील चाहता है ताकि उसकी कंपनियां भारतीय बाज़ार में अधिक निवेश कर सकें। वहीं भारत चीन के बाज़ार तक सार्थक और पूर्वानुमेय पहुंच तथा व्यापार असंतुलन को कम करने की मांग कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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