मोदी-शी जिनपिंग वार्ता: व्यापार घाटा $112 अरब पार, बाज़ार पहुंच और सप्लाई चेन पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन की कमज़ोरियों और एक-दूसरे के बाज़ारों तक सार्थक एवं भरोसेमंद पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद जारी बयान में यह जानकारी दी।
बैठक की पृष्ठभूमि और महत्व
यह द्विपक्षीय वार्ता नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के इतर आयोजित की गई। उल्लेखनीय है कि करीब सात वर्षों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। यह लगातार तीसरा वर्ष भी है जब दोनों नेताओं के बीच शीर्ष स्तरीय बैठक हुई है — इससे पहले दोनों कजान और तियानजिन में मिल चुके हैं। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-चीन व्यापार घाटा नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को पुनर्संतुलित करने की मांग तेज़ हो रही है।
व्यापार असंतुलन के आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार, भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर $112.16 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2024-25 में यह $99.21 अरब डॉलर था। इसी अवधि में भारत का चीन को निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर $19.47 अरब डॉलर पहुंचा, वहीं चीन से आयात 16.03 प्रतिशत की वृद्धि के साथ $131.63 अरब डॉलर हो गया। कुल द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 18.31 प्रतिशत बढ़कर $151.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया। गौरतलब है कि चीन अब अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है।
सप्लाई चेन निर्भरता और रणनीतिक जोखिम
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और ऑर्गेनिक केमिकल्स — ये चार क्षेत्र भारत के चीन से होने वाले कुल आयात का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा हैं। भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का लगभग 43 प्रतिशत और मशीनरी एवं कंप्यूटर आयात का लगभग 40 प्रतिशत चीन से प्राप्त करता है। इसके अलावा, भारत अपनी छह महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भी चीन से आयात करता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), फार्मास्युटिकल और रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन चीन पर काफी हद तक निर्भर रहती है।
दोनों नेताओं के बयान
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक के दौरान कहा कि चीन और भारत ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में भिन्नताएं होने के बावजूद वे 'साझा विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग और समर्थन करने में सक्षम रहे हैं।' प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग के लिए राष्ट्रपति शी का आभार व्यक्त किया और कहा कि अब दोनों देशों के पास 'द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर है।'
आगे की राह
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संपर्क में हुई प्रगति का स्वागत किया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों तथा नागरिकों की आवाजाही को और बढ़ावा देने पर सहमति जताई। दूसरी ओर, चीन कथित तौर पर भारत से निवेश नियमों में ढील की उम्मीद कर रहा है ताकि उसकी कंपनियां तेजी से बढ़ते भारतीय बाज़ार में अधिक पूंजी लगा सकें। व्यापार असंतुलन को संतुलित और टिकाऊ बनाने के लिए दोनों पक्षों ने संरचनात्मक समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता दोहराई है।