क्या प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में नई मजबूती आएगी?

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क्या प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में नई मजबूती आएगी?

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा से भारतीय-चीनी संबंधों को नई दिशा मिलेगी। यह मुलाकात दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है, जो सहयोग और विश्वास को बढ़ावा देगी। जानिए इस यात्रा के पीछे के कारण और महत्व को।

Key Takeaways

  • प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से भारत-चीन संबंधों को नई दिशा मिलेगी।
  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात महत्वपूर्ण है।
  • दोनों देशों के बीच कई उच्च-स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं।
  • इस यात्रा से सीमा विवाद पर चर्चा की संभावना है।
  • यात्रा का उद्देश्य विश्वास बहाली और सहयोग बढ़ाना है।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए चीन का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात होगी, जो कि दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

भारत और चीन ने 1 अप्रैल 1950 को राजनयिक संबंधों की स्थापना की थी। लेकिन 1962 का सीमा संघर्ष इन संबंधों के लिए एक बड़ा झटका था। 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चीन यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को पुनर्स्थापित करने का प्रयास शुरू किया। इसके बाद 2003 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यात्रा ने विशेष प्रतिनिधि प्रणाली की स्थापना की, और 2005 में चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा ने रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा दिया।

2014 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा ने घनिष्ठ विकासात्मक साझेदारी की नींव रखी। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा ने इस प्रगति को बनाए रखा। दोनों देशों ने 2018 में वुहान और 2019 में चेन्नई में अनौपचारिक शिखर सम्मेलनों के माध्यम से आपसी विश्वास को बढ़ाया। हालांकि, 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव ने इन संबंधों को प्रभावित किया। 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की मुलाकात से संबंधों में और सुधार हुआ।

इस यात्रा से पहले भी दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय मुलाकातें होती रही हैं। 2016 में जी20 हांग्जो और ब्रिक्स गोवा, 2017 में ब्रिक्स ज़ियामेन, 2018 में एससीओ क़िंगदाओ और 2019 में एससीओ बिश्केक जैसे आयोजनों में दोनों देशों के नेता मिले। 2022 में जी20 बाली में भी संक्षिप्त बातचीत हुई।

सीमा विवाद के समाधान के लिए 2003 से विशेष प्रतिनिधि प्रणाली के अंतर्गत 24 दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत का दौरा कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्री से मुलाकात की। परामर्श और समन्वय तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 27 बैठकें और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की 19 बैठकें हो चुकी हैं, जिनका ध्यान 2020 से लद्दाख में सैनिकों की वापसी पर है। जल संसाधन सहयोग के लिए 2006 से विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) कार्यरत है, जिसकी 14 बैठकें हो चुकी हैं। आशा है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और सहयोग बढ़ाने का एक और सुनहरा अवसर बनेगी।

Point of View

यह कहना उचित होगा कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हमें उम्मीद है कि यह बातचीत गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगी और भारत तथा चीन के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास को बढ़ाना है।
यह यात्रा कब आयोजित की जाएगी?
यह यात्रा 30 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक होगी।
इस यात्रा के दौरान किन नेताओं से मुलाकात होगी?
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात होगी।
भारत और चीन के संबंधों में सुधार के लिए क्या प्रयास किए गए हैं?
भारत और चीन के बीच कई उच्च-स्तरीय बैठकें और वार्ताएं हुई हैं, जिनका उद्देश्य संबंधों में सुधार करना है।
क्या इस यात्रा से सीमा विवाद का समाधान संभव है?
यह यात्रा सीमा विवाद के समाधान के लिए एक मंच प्रदान कर सकती है, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।