एंटी-पेपर लीक बिल 2026 संसद से पारित: ₹50 लाख से ₹10 करोड़ जुर्माना, 10 साल तक जेल का प्रावधान
सारांश
मुख्य बातें
संसद के दोनों सदनों ने 31 जुलाई 2026 को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पारित कर दिया, जिसे आमतौर पर एंटी-पेपर लीक बिल के नाम से जाना जाता है। यह विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की युवा-केंद्रित नीतियों का ठोस प्रमाण बताया है।
विधेयक में क्या है
नए कानून के तहत पेपर लीक के दोषियों पर ₹50 लाख से ₹10 करोड़ तक का जुर्माना और 5 से 10 साल की कैद का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ऐसे मामलों का निपटारा दो महीने के भीतर सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी इस विधेयक में शामिल है। गौरतलब है कि देशभर में पिछले कुछ वर्षों में सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।
NDA नेताओं की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा, 'एंटी-पेपर लीक बिल पास करना मोदी सरकार के संकल्प का हिस्सा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बिल के ज़रिए पेपर लीक के कारण छात्रों को होने वाली मुश्किलों को हमेशा के लिए दूर करने के लिए एक कानून बनाने की सफल कोशिश की है, जिससे यह पक्का हो सके कि पूरे देश में या किसी भी राज्य में बच्चों को भविष्य में ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।'
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी हमेशा से छात्रों और युवाओं को लेकर चिंतित रहे हैं। सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं — ₹50 लाख से ₹10 करोड़ तक का जुर्माना, 5 से 10 साल की जेल और ऐसे मामलों का दो महीने के अंदर निपटारा। प्रधानमंत्री ने न सिर्फ सख्त कानून बनाए हैं बल्कि यह भी पक्का कर रहे हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले।'
बिहार सरकार और जदयू का रुख
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने विधेयक को 'बहुत अच्छा फैसला' करार दिया और कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में समय-समय पर होने वाली ऐसी घटनाओं पर अब कड़ी कार्रवाई संभव होगी।
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि विपक्ष के असहयोग के बावजूद पूरा NDA इस विधेयक को पारित कराने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने बताया कि राज्यसभा और लोकसभा से पारित होने के बाद विधेयक अब भारत के राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।
विपक्ष पर निशाना
भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य की चिंता केवल प्रधानमंत्री मोदी और NDA को है, जबकि विपक्ष राजनीति में उलझा रहा। यह ऐसे समय में आया है जब देश में NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर व्यापक विरोध-प्रदर्शन हो चुके हैं।
आगे क्या होगा
राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा और पूरे देश में लागू होगा। केंद्र सरकार का दावा है कि इससे सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल होगी और लाखों मेधावी छात्रों को उनका उचित अवसर मिल सकेगा।