27 जुलाई 2026
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पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026: BJP सांसदों ने बताया छात्रहित में, दोषियों को 10 साल सजा और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान

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पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026: BJP सांसदों ने बताया छात्रहित में, दोषियों को 10 साल सजा और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान

सारांश

पेपर लीक और परीक्षा माफियाओं पर नकेल कसने के लिए संसद में पेश पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026 पर BJP सांसदों ने एकजुट समर्थन दिखाया। दोषियों को 10 साल सजा और ₹10 करोड़ जुर्माने के प्रावधान के साथ यह बिल छात्रों के भविष्य की रक्षा का दावा करता है।

मुख्य बातें

संसद में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर 27 जुलाई को चर्चा हुई।
बिल में पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी के दोषियों को 10 साल तक की सजा और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान।
BJP सांसद शशांक मणि त्रिपाठी , अशोक मित्तल और धर्मबीर सिंह चौधरी ने विधेयक को छात्रहित में बताया।
सरकार का दावा — छात्रों की सभी प्रमुख मांगें बातचीत के बाद स्वीकार कर ली गई हैं।
BJP ने विपक्ष पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने और छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

संसद में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों ने 27 जुलाई को इस विधेयक को देशभर के छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक निर्णायक कदम करार दिया। साथ ही, BJP सांसदों ने विपक्ष पर इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण करने और छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

मुख्य घटनाक्रम

BJP सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि यह संशोधन बिल एक सार्थक प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य देशभर के छात्रों के भविष्य की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हमेशा छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी है और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के गठन के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

त्रिपाठी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर केवल 'आंसू बहाने' का काम कर रहा है और इसे 'मेरे बनाम आपके' की राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। उनके अनुसार, विपक्ष की बातों का सदन में अब प्रभाव नहीं रह गया है।

बिल के प्रमुख प्रावधान

BJP सांसद अशोक मित्तल ने बताया कि प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक, नकल और परीक्षा में धोखाधड़ी जैसे अपराधों में शामिल गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। दोषियों को 10 साल तक की सजा और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

मित्तल ने कहा कि इस सख्त कानून का उद्देश्य परीक्षा माफियाओं के खिलाफ मजबूत संदेश देना है, ताकि भविष्य में कोई भी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह विधेयक संसद से पारित होकर जल्द लागू होगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने स्वयं पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर छात्रों से सीधा संवाद किया है।

छात्रों की मांगों पर सरकार का रुख

अशोक मित्तल ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के बाद छात्रों की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। उनके अनुसार, जब छात्र और छात्र संगठन सरकार के फैसले से संतुष्ट हैं, तब राजनीतिक दलों को इस मामले में हस्तक्षेप कर छात्रों को गुमराह नहीं करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष की मांगों को पूरी तरह निराधार बताया।

अन्य BJP सांसदों की प्रतिक्रिया

BJP सांसद धर्मबीर सिंह चौधरी ने भी सरकार के एजेंडे का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार संसद के सामने जो भी प्रस्ताव लाती है, वह देशहित को ध्यान में रखकर लाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि पूर्ववर्ती शासनकाल की खामियों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।

चौधरी ने यह भी कहा कि हाल ही में गठित समिति का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति को सौंपा गया है, जिन्हें विश्व स्तर पर सम्मान प्राप्त है और उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की सराहनीय पहल बताया। यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में देश में कई बड़े पेपर लीक कांड सामने आए हैं, जिनसे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ।

आगे की राह

विधेयक के संसद में पारित होने के बाद परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि कड़े दंड के साथ-साथ क्रियान्वयन तंत्र को भी मजबूत करना होगा, तभी यह कानून वास्तव में प्रभावी साबित होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — क्योंकि पिछले कई वर्षों में पेपर लीक कांड तब हुए जब कानून पहले से मौजूद थे। NTA की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच महज सजा बढ़ाना पर्याप्त नहीं; जाँच एजेंसियों की स्वतंत्रता और परीक्षा संचालन में संरचनात्मक सुधार भी उतने ही जरूरी हैं। विपक्ष को 'राजनीतिकरण' कहकर खारिज करने की बजाय सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि स्वतंत्र सत्यापन तंत्र कैसे काम करेगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026 क्या है?
यह पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव है, जिसे 27 जुलाई 2026 को संसद में पेश किया गया। इसका उद्देश्य पेपर लीक, नकल और परीक्षा धोखाधड़ी में शामिल गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई करना है।
इस बिल में दोषियों के लिए क्या सजा का प्रावधान है?
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी के दोषियों को 10 साल तक की कैद और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। BJP सांसद अशोक मित्तल के अनुसार यह प्रावधान परीक्षा माफियाओं को कड़ा संदेश देने के लिए बनाया गया है।
BJP सांसदों ने इस बिल का समर्थन क्यों किया?
BJP सांसदों ने कहा कि यह बिल छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में सरकार का ठोस कदम है। उनका तर्क है कि NTA के गठन के बाद परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के प्रयास जारी हैं और यह संशोधन उसी दिशा में अगला कदम है।
विपक्ष की इस बिल पर क्या स्थिति है?
BJP सांसदों के अनुसार विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है और छात्रों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। सरकार का दावा है कि छात्र संगठन और छात्र खुद सरकार के फैसले से संतुष्ट हैं।
यह बिल छात्रों को कैसे फायदा पहुँचाएगा?
सरकार का कहना है कि इस बिल के लागू होने के बाद पेपर लीक और परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे मेहनती छात्रों को समान और निष्पक्ष परीक्षा का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, सरकार ने छात्रों की प्रमुख मांगें भी स्वीकार करने का दावा किया है।
राष्ट्र प्रेस
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