30 जुलाई 2026
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पब्लिक एग्जामिनेशन्स संशोधन विधेयक 2026: सपा सांसदों ने कहा — कानून नहीं, ईमानदार क्रियान्वयन चाहिए

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पब्लिक एग्जामिनेशन्स संशोधन विधेयक 2026: सपा सांसदों ने कहा — कानून नहीं, ईमानदार क्रियान्वयन चाहिए

सारांश

लोकसभा में पेपर लीक रोकथाम विधेयक 2026 पास हुआ, लेकिन सपा सांसद राम गोपाल यादव और अवधेश प्रसाद ने साफ कहा — कानून की किताब नहीं, परीक्षा तंत्र में बैठे ईमानदार लोग पेपर लीक रोकेंगे। BJP सरकार की नीयत और क्रियान्वयन तंत्र दोनों पर सवाल।

मुख्य बातें

30 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित हुआ।
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा — प्रश्नपत्र निर्माण, मुद्रण और वितरण में ईमानदार लोग न हों तो कानून बेकार।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने BJP सरकार की छात्रों के प्रति नीयत पर सवाल उठाए और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को असली चुनौती बताया।
प्रसाद ने छात्रों पर गोलीबारी की घटना का उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर कई छात्र घायल हुए और कुछ के हाथ-पैर टूटे व सिर में चोटें आईं।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में पूरी बात न रखने देने पर भी सपा ने लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई।
यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को भी दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।

लोकसभा में 30 जुलाई 2026 को 'पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पारित होने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उनका कहना है कि देश में कानूनों की कमी नहीं, बल्कि उन्हें ईमानदारी से लागू करने की इच्छाशक्ति की कमी है। सपा सांसदों ने पेपर लीक रोकने की असली चुनौती को परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़ा।

राम गोपाल यादव की चेतावनी — सिस्टम सुधरे बिना कानून बेकार

सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि केवल कानून बना देने से पेपर लीक जैसी घटनाएँ नहीं रुकेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक परीक्षा की पूरी शृंखला — प्रश्नपत्र निर्माण, मुद्रण और परीक्षा केंद्र तक सुरक्षित पहुँचाने — की जिम्मेदारी ईमानदार हाथों में नहीं होगी, तब तक कोई भी कानून प्रभावी नहीं होगा। उनके अनुसार, यह ढाँचागत समस्या है जिसे महज विधायी उपाय से नहीं सुलझाया जा सकता।

यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने भगवान राम के नाम पर चुनाव लड़कर सत्ता हासिल की, उसी के शासनकाल में भगवान राम के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया और कहा कि सपा इस मामले को लगातार उठाती रहेगी।

अवधेश प्रसाद का सवाल — नीयत और व्यवस्था दोनों पर संदेह

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि भारत में पहले भी अनेक कानून बनाए गए, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो सका। उनका तर्क है कि किसी भी कानून की सफलता दो बातों पर निर्भर करती है — सरकार की नीयत और क्रियान्वयन तंत्र की ईमानदारी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी छात्रों और युवाओं के प्रति नीयत ठीक नहीं है।

प्रसाद ने छात्रों पर गोलीबारी की एक घटना का भी उल्लेख किया और सरकार से जवाब माँगा कि आखिर ऐसे हालात क्यों बने जिनमें गोली चलाने की नौबत आई। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में कई छात्र घायल हुए — कई के हाथ-पैर टूटे और कुछ के सिर में गंभीर चोटें आईं। उनके अनुसार, यह कह देना पर्याप्त नहीं कि निर्णय मजिस्ट्रेट ने लिया था; उन परिस्थितियों के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

राहुल गांधी को न बोलने देने पर लोकतंत्र की दुहाई

अवधेश प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि भले ही किसी को उनके बोलने के तरीके पर आपत्ति हो, लेकिन किसी निर्वाचित सांसद को अपनी बात रखने के लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित करना संसद की गरिमा के विरुद्ध है।

विधेयक का संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि यह विधेयक 2024 के NEET-UG पेपर लीक विवाद और उसके बाद देशभर में हुए छात्र-आंदोलनों की पृष्ठभूमि में लाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून में कठोर दंड का प्रावधान तो है, लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर जनता का भरोसा डगमगाया हुआ है। सपा सांसदों की माँग है कि विधेयक के साथ-साथ परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र और पारदर्शी तंत्र भी स्थापित किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सपा सांसदों की आपत्ति उस गहरी समस्या की ओर इशारा करती है जिसे संसद अक्सर नज़रअंदाज़ करती है — क्रियान्वयन का संकट। 2024 के NEET विवाद के बाद यह तीसरा बड़ा विधायी कदम है, फिर भी परीक्षा तंत्र में जवाबदेही का ढाँचा अब भी अस्पष्ट है। विधेयक में दंड के प्रावधान हैं, लेकिन स्वतंत्र निगरानी तंत्र का उल्लेख नहीं — यही वह खाई है जिसे विपक्ष उजागर कर रहा है। राहुल गांधी को बोलने न देने का मुद्दा बताता है कि संसदीय बहस खुद भी दबाव में है, जबकि ऐसे विधेयकों पर गहन विमर्श की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पब्लिक एग्जामिनेशन्स संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करता है। इसे 30 जुलाई 2026 को लोकसभा में पारित किया गया और इसमें परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान है।
सपा सांसदों ने इस विधेयक पर क्या आपत्ति जताई?
सपा सांसद राम गोपाल यादव और अवधेश प्रसाद ने कहा कि कानून बनाना पर्याप्त नहीं है — जब तक परीक्षा तंत्र में ईमानदार लोग नहीं होंगे और सरकार की नीयत साफ नहीं होगी, पेपर लीक नहीं रुकेगा। उन्होंने BJP सरकार की छात्रों के प्रति इच्छाशक्ति पर भी सवाल उठाए।
छात्रों पर गोलीबारी की घटना का क्या संदर्भ है?
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने सदन में एक ऐसी घटना का उल्लेख किया जिसमें कथित तौर पर छात्रों पर गोली चलाई गई। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र घायल हुए और माँग की कि सरकार बताए कि ऐसे हालात क्यों बने और इसके लिए जिम्मेदार कौन था।
राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने से क्यों रोका गया?
सपा सांसद अवधेश प्रसाद के अनुसार, विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया गया। सपा ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और संसदीय गरिमा का उल्लंघन बताया।
राम मंदिर के चढ़ावे में अनियमितता का मामला क्या है?
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ियाँ हुई हैं। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताते हुए कहा कि जिस पार्टी ने भगवान राम के नाम पर सत्ता हासिल की, उसी के शासन में यह आरोप लग रहे हैं — यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा गंभीर मामला है।
राष्ट्र प्रेस
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