पब्लिक एग्जामिनेशन्स संशोधन विधेयक 2026: सपा सांसदों ने कहा — कानून नहीं, ईमानदार क्रियान्वयन चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में 30 जुलाई 2026 को 'पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पारित होने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उनका कहना है कि देश में कानूनों की कमी नहीं, बल्कि उन्हें ईमानदारी से लागू करने की इच्छाशक्ति की कमी है। सपा सांसदों ने पेपर लीक रोकने की असली चुनौती को परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़ा।
राम गोपाल यादव की चेतावनी — सिस्टम सुधरे बिना कानून बेकार
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि केवल कानून बना देने से पेपर लीक जैसी घटनाएँ नहीं रुकेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक परीक्षा की पूरी शृंखला — प्रश्नपत्र निर्माण, मुद्रण और परीक्षा केंद्र तक सुरक्षित पहुँचाने — की जिम्मेदारी ईमानदार हाथों में नहीं होगी, तब तक कोई भी कानून प्रभावी नहीं होगा। उनके अनुसार, यह ढाँचागत समस्या है जिसे महज विधायी उपाय से नहीं सुलझाया जा सकता।
यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने भगवान राम के नाम पर चुनाव लड़कर सत्ता हासिल की, उसी के शासनकाल में भगवान राम के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया और कहा कि सपा इस मामले को लगातार उठाती रहेगी।
अवधेश प्रसाद का सवाल — नीयत और व्यवस्था दोनों पर संदेह
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि भारत में पहले भी अनेक कानून बनाए गए, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो सका। उनका तर्क है कि किसी भी कानून की सफलता दो बातों पर निर्भर करती है — सरकार की नीयत और क्रियान्वयन तंत्र की ईमानदारी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी छात्रों और युवाओं के प्रति नीयत ठीक नहीं है।
प्रसाद ने छात्रों पर गोलीबारी की एक घटना का भी उल्लेख किया और सरकार से जवाब माँगा कि आखिर ऐसे हालात क्यों बने जिनमें गोली चलाने की नौबत आई। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में कई छात्र घायल हुए — कई के हाथ-पैर टूटे और कुछ के सिर में गंभीर चोटें आईं। उनके अनुसार, यह कह देना पर्याप्त नहीं कि निर्णय मजिस्ट्रेट ने लिया था; उन परिस्थितियों के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
राहुल गांधी को न बोलने देने पर लोकतंत्र की दुहाई
अवधेश प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि भले ही किसी को उनके बोलने के तरीके पर आपत्ति हो, लेकिन किसी निर्वाचित सांसद को अपनी बात रखने के लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित करना संसद की गरिमा के विरुद्ध है।
विधेयक का संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि यह विधेयक 2024 के NEET-UG पेपर लीक विवाद और उसके बाद देशभर में हुए छात्र-आंदोलनों की पृष्ठभूमि में लाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून में कठोर दंड का प्रावधान तो है, लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर जनता का भरोसा डगमगाया हुआ है। सपा सांसदों की माँग है कि विधेयक के साथ-साथ परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र और पारदर्शी तंत्र भी स्थापित किया जाए।