28 जुलाई 2026
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मानसून सत्र: विपक्ष ने पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा और छात्र आंदोलन पर संसद में बहस की मांग की

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मानसून सत्र: विपक्ष ने पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा और छात्र आंदोलन पर संसद में बहस की मांग की

सारांश

मानसून सत्र में विपक्ष ने तीन मोर्चों पर सरकार को घेरा — पेपर लीक कानून की खामियाँ, राम मंदिर चढ़ावे का अनुत्तरित हिसाब, और छात्र आंदोलन पर बल प्रयोग। सपा, झामुमो और शिवसेना (यूबीटी) ने नियम 267 के तहत चर्चा की माँग की, लेकिन सदन बार-बार स्थगित होता रहा।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए केवल कानून नहीं, ईमानदार क्रियान्वयन ज़रूरी है।
यादव ने राम मंदिर के दान और 1990 की राम रथ यात्रा के चंदे का पारदर्शी हिसाब माँगा।
झामुमो सांसद महुआ माजी ने आरोप लगाया कि नियम 267 के तहत नोटिस देने पर सदन स्थगित कर दिया जाता है।
माजी ने कहा कि पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और कथित तौर पर कई छात्रों ने आत्महत्या की।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने छात्र आंदोलन में लाठीचार्ज, आँसू गैस और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार पर संसद में विस्तृत बहस की माँग की।
विपक्ष ने सरकार से आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के वादे को पूरा करने की माँग की।

संसद के मानसून सत्र में 28 जुलाई को विपक्षी दलों ने तीन अहम मुद्दों — पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावे की पारदर्शिता और छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई — पर केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार को घेरा। समाजवादी पार्टी (सपा), झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों ने सदन में व्यापक चर्चा कराने की माँग की और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

पेपर लीक: कानून काफी नहीं, क्रियान्वयन ज़रूरी

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने पेपर लीक विरोधी कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल कानून बना देने से इस तरह की घटनाएँ नहीं रुकेंगी। उनके अनुसार, जब तक प्रश्न-पत्र तैयार करने से लेकर उसकी छपाई तक की पूरी प्रक्रिया में ईमानदार अधिकारी तैनात नहीं होंगे, गड़बड़ियाँ जारी रहेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक की घटनाओं ने देशभर में लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है।

राम मंदिर चढ़ावा: पारदर्शिता पर उठे सवाल

रामगोपाल यादव ने राम मंदिर के दान और चढ़ावे की पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अब तक चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की राम रथ यात्रा के दौरान लोगों ने बड़ी मात्रा में धन, गहने और कीमती वस्तुएँ दान की थीं, लेकिन उन निधियों का भी समुचित हिसाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की कथित लापरवाही से श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुँची है।

संसद संचालन पर झामुमो की आपत्ति

झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने आरोप लगाया कि जब भी विपक्षी सांसद नियम 267 के तहत नोटिस पर चर्चा की माँग करते हैं, सदन स्थगित कर दिया जाता है। उनके अनुसार, यह प्रतीत होता है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस से बचना चाहती है। हालाँकि उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे सदन को सुचारु रूप से चलने दिया जाएगा।

माजी ने पेपर लीक विरोधी विधेयक पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता रेखांकित करते हुए कहा कि इस समस्या से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और मानसिक दबाव के चलते कई छात्रों ने कथित तौर पर आत्महत्या तक की है।

छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई: शिवसेना का विरोध

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आँसू गैस के प्रयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देखा कि किस प्रकार प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया और महिलाओं के साथ भी कथित दुर्व्यवहार की घटनाएँ सामने आईं। सावंत ने कहा कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

महुआ माजी ने माँग की कि सरकार आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने के अपने वादे को पूरा करे और ऐसा कानून बनाए जिसमें निर्दोष छात्रों को सजा न मिले। गौरतलब है कि आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मामले और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पहले भी संसद में विवाद का विषय रहे हैं।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों की माँग है कि मानसून सत्र के शेष दिनों में इन तीनों मुद्दों पर विस्तृत संसदीय बहस हो। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार नियम 267 के तहत चर्चा की अनुमति देती है या नहीं, क्योंकि इस पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राम मंदिर चढ़ावा और छात्र आंदोलन — अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही बड़े सवाल से जुड़े हैं: सार्वजनिक विश्वास और जवाबदेही। पेपर लीक विरोधी कानून की घोषणा बिना क्रियान्वयन ढाँचे के खोखली है, यह आलोचना नई नहीं — पर बार-बार अनसुनी होती रही है। राम मंदिर चढ़ावे के हिसाब का सवाल राजनीतिक नहीं, संस्थागत पारदर्शिता का है; इसे केवल विपक्षी आरोप कहकर खारिज करना श्रद्धालुओं के साथ अन्याय होगा। सबसे गंभीर मुद्दा छात्रों पर बल प्रयोग का है — जिस पीढ़ी का भविष्य पेपर लीक ने छीना, उसी पर लाठी चलाना राज्य की प्राथमिकताओं पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानसून सत्र में विपक्ष ने किन मुद्दों पर बहस की माँग की?
विपक्षी दलों ने 28 जुलाई को तीन मुद्दों — पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावे की पारदर्शिता और छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई — पर संसद में विस्तृत बहस की माँग की। सपा, झामुमो और शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर चर्चा की माँग की।
रामगोपाल यादव ने पेपर लीक कानून पर क्या कहा?
सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि केवल कानून बनाने से पेपर लीक नहीं रुकेगा — जब तक प्रश्न-पत्र तैयार करने से छपाई तक की पूरी प्रक्रिया ईमानदार अधिकारियों के हाथों में नहीं होगी, गड़बड़ियाँ जारी रहेंगी। उन्होंने कानून के प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन पर जोर दिया।
राम मंदिर चढ़ावे को लेकर क्या विवाद है?
सपा सांसद रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के दान और चढ़ावे का पारदर्शी हिसाब अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने 1990 की राम रथ यात्रा के दौरान एकत्र धन और गहनों के हिसाब का भी सवाल उठाया और उत्तर प्रदेश सरकार पर कथित लापरवाही का आरोप लगाया।
महुआ माजी ने नियम 267 के बारे में क्या कहा?
झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि जब भी विपक्ष नियम 267 के तहत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का नोटिस देता है, सदन स्थगित कर दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों पर बहस से बचना चाहती है।
छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में क्या माँग उठी?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत और झामुमो सांसद महुआ माजी ने छात्र आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज, आँसू गैस और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार पर संसद में बहस की माँग की। माजी ने यह भी माँग की कि सरकार आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के अपने वादे को पूरा करे।
राष्ट्र प्रेस
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