राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सपा सांसदों का संसद परिसर में प्रदर्शन, निष्पक्ष SIT जांच की माँग
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने 7 अगस्त 2026 को संसद परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में निष्पक्ष जाँच तथा दोषियों पर कार्रवाई की माँग उठाई। मानसून सत्र के दौरान तेज़ बारिश के बावजूद सपा सांसद डटे रहे और आरोप लगाया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले पर सरकार संसद में चर्चा से बच रही है।
मुख्य घटनाक्रम
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि यह महज़ वित्तीय अनियमितता का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार निष्पक्ष जाँच कर जिम्मेदारों की पहचान नहीं करती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
सपा सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि जो लोग भगवान राम के नाम पर राजनीति कर सत्ता में आए, वही अब इस मुद्दे पर चर्चा से कतरा रहे हैं। उनका कहना था कि यदि चढ़ावे में हेराफेरी हुई है तो जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
SIT की निष्पक्षता पर सवाल
सपा सांसद आनंद भदौरिया ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर राम मंदिर के दानपात्र और बैंक खातों — दोनों में हेराफेरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि जाँच कर रही एसआईटी (SIT) की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उनके अनुसार यदि जाँच एजेंसी की भूमिका ही संदेह के घेरे में हो, तो उसकी रिपोर्ट पर भरोसा करना कठिन होगा।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन का एक-एक पैसा मंदिर तक पहुँचना चाहिए और जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि आरोपियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आरक्षण और सामाजिक न्याय पर विपक्ष की आवाज़
धर्मेंद्र यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि आरक्षण और सामाजिक न्याय की बात हो रही है, तो सरकार और व्यवस्था में पिछड़े, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति वर्गों की वास्तविक भागीदारी भी सामने आनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि विश्वविद्यालयों में कितने कुलपति, प्रधानमंत्री कार्यालय में कितने अधिकारी और केंद्र सरकार में कितने सचिव इन वर्गों से हैं।
आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने जेन-जी आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि RSS यदि छात्रों की बात सुनने की बात करती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ नेता उसी आंदोलन को देश-विरोधी बताते हैं, तो दोनों में से एक पक्ष ज़रूर गलत है। उन्होंने दावा किया कि संसद के भीतर भी BJP नेताओं द्वारा आंदोलनकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं।
झारखंड सरकार की प्रतिक्रिया
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ मांझी ने कहा कि झारखंड सरकार ने छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही दिन संबंधित चेयरमैन का इस्तीफा लिया, CID जाँच शुरू कराई और कई गिरफ्तारियाँ भी हुईं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छात्रों के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र कई विवादास्पद मुद्दों पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव का गवाह बन रहा है। गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी गर्म है और सपा इसे जनता की धार्मिक भावनाओं से जोड़कर सत्तारूढ़ दल को घेरने की कोशिश कर रही है। विपक्ष की माँग है कि संसद में इस पर विस्तृत चर्चा हो और SIT जाँच की निगरानी किसी स्वतंत्र प्राधिकरण द्वारा की जाए।