राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अगले हफ्ते तक टली, नई SIT जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली 4 याचिकाओं पर 10 अगस्त 2026 को होने वाली सुनवाई टल गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।
सुनवाई क्यों टली
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से न्यायालय में दो सप्ताह की मोहलत माँगी गई थी। सरकार का तर्क था कि उनकी ओर से पेश होने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपलब्ध नहीं हैं। हालाँकि न्यायालय ने पूरे दो सप्ताह की बजाय केवल अगले सप्ताह तक की मोहलत दी।
नई SIT का गठन और संरचना
इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। इस SIT का नेतृत्व लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस कर रही हैं। टीम में अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा, एसएसपी गौरव ग्रोवर, बाराबंकी के एएसपी रितेश कुमार के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन और अभिलेखों की जांच के लिए एक ऑडिटर को भी शामिल किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद जांच ने नई रफ्तार पकड़ी है।
राजनीतिक हलचल और विपक्ष की माँग
7 अगस्त को समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन कर इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग की। सपा सांसदों का कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले पर सरकार चर्चा से बच रही है।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब तक आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 'भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन का एक-एक पैसा मंदिर तक पहुँचना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।'
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
यह मामला केवल कानूनी या राजनीतिक नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से सीधे जुड़ा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के प्रति देशभर में अटूट आस्था को देखते हुए चढ़ावे में किसी भी अनियमितता की खबर ने व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया है। आलोचकों का कहना है कि जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित होना अनिवार्य है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय में अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि नई SIT की जांच किस दिशा में आगे बढ़ी है। न्यायालय के निर्देशों और SIT की प्रगति रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मामला आने वाले हफ्तों में और अधिक कानूनी और राजनीतिक महत्व ग्रहण कर सकता है।