राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार, जुलाई में होगी अगली पेशी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जून 2025 को अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जाँच की माँग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 12 से 17 जुलाई के सप्ताह में सुना जाएगा।
याचिका में क्या माँगा गया है
यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दाखिल की है। इसमें मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की निगरानी में विशेष जाँच दल (SIT) गठित करने की माँग की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासन और वित्तीय संचालन में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।
राज्य SIT पर उठे सवाल
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT ने बिना किसी प्राथमिकी दर्ज किए जाँच शुरू कर दी, जो कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि 13 जून को चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने SIT का गठन किया था। इस SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों है। पीठ ने कहा कि गर्मी की छुट्टियों के बाद नियमित कामकाज शुरू होने पर सुनवाई होने से कोई असाधारण स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि आरोप गंभीर हैं और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप ज़रूरी है — परंतु न्यायालय ने इसे तत्काल सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
अब तक की गिरफ्तारियाँ और जाँच की स्थिति
इस मामले में पुलिस अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय — जिन्होंने हाल ही में ट्रस्ट से इस्तीफा दिया था — का बयान दर्ज किया जा चुका है। ट्रस्टी अनिल मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के बयान भी आवश्यकता पड़ने पर दर्ज किए जा सकते हैं।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट की साख पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में जुलाई में होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या CBI-SIT जाँच का रास्ता खुलेगा या राज्य की जाँच को ही वैध माना जाएगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस सुनवाई पर देशभर की नज़रें टिकी रहेंगी।