14 अगस्त 2026
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जी.एस. पाटिल कर्नाटक विधानसभा के नए स्पीकर, सलीम अहमद 38 वोटों से बने विधान परिषद चेयरमैन

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जी.एस. पाटिल कर्नाटक विधानसभा के नए स्पीकर, सलीम अहमद 38 वोटों से बने विधान परिषद चेयरमैन

सारांश

कर्नाटक में एक ही दिन विधानमंडल के दोनों सदनों को नए पीठासीन अधिकारी मिले — जी.एस. पाटिल विधानसभा स्पीकर और सलीम अहमद विधान परिषद चेयरमैन बने। BJP के बहिष्कार और पार्टी लेटरहेड विवाद ने इन चुनावों को राजनीतिक रंग दे दिया।

मुख्य बातें

कांग्रेस विधायक जी.एस.
पाटिल को 14 अगस्त 2026 को विपक्ष की अनुपस्थिति में कर्नाटक विधानसभा का नया स्पीकर चुना गया।
कांग्रेस एमएलसी सलीम अहमद ने एनडीए उम्मीदवार पी.एच.
पुजार को 38 बनाम 30 मतों से हराकर विधान परिषद का चेयरमैन पद जीता।
BJP ने विधानसभा स्पीकर चुनाव का बहिष्कार किया — आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पार्टी लेटरहेड पर उम्मीदवारी की घोषणा कर संवैधानिक पद की गरिमा घटाई।
अशोक ने पाटिल से स्पीकर पद की स्वतंत्रता और गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया।
विधान परिषद में पूर्व चेयरमैन बसवराज होरट्टी के इस्तीफे की परिस्थितियों पर विपक्ष ने सवाल उठाए।
BJP सदस्य केशवप्रसाद ने कार्यभार हस्तांतरण समारोह में महिला नेताओं की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई।

कर्नाटक विधानसभा को 14 अगस्त 2026 को नया स्पीकर मिल गया — कांग्रेस विधायक जी.एस. पाटिल को विपक्ष की अनुपस्थिति में सर्वसम्मति से इस पद पर निर्वाचित किया गया। उसी दिन विधान परिषद में कांग्रेस एमएलसी सलीम अहमद ने एनडीए उम्मीदवार पी.एच. पुजार को 38 बनाम 30 मतों से पराजित कर चेयरमैन पद हासिल किया। इन दोनों चुनावों के साथ कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों को नए पीठासीन अधिकारी मिल गए हैं।

विधानसभा स्पीकर चुनाव: भाजपा का बहिष्कार

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विधानसभा स्पीकर के चुनाव का बहिष्कार किया। पार्टी का आरोप था कि कांग्रेस सरकार ने पार्टी के लेटरहेड पर पाटिल की उम्मीदवारी की घोषणा करके एक संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाई। विपक्ष ने तर्क दिया कि इस कदम ने स्पीकर के चुनाव को महज एक औपचारिकता में बदल दिया।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस ने संवैधानिक पदों की गरिमा का कोई अपमान नहीं किया है और इस मसले पर BJP पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया।

विपक्ष के नेता आर. अशोक की नसीहत

BJP के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने नवनिर्वाचित स्पीकर जी.एस. पाटिल को बधाई देते हुए स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद किसी दल का पद नहीं होता। उन्होंने कहा, 'यह कुर्सी न्याय की जगह है और न्याय की रक्षा होनी चाहिए। इस कुर्सी पर कभी किसी पार्टी के लेटरहेड की छाया नहीं पड़नी चाहिए — इस पर संविधान की छाया होनी चाहिए। कार्यकाल छोटा है, इसलिए व्यवहार अच्छा रखें। हम पूरा सहयोग देंगे।'

अशोक ने यह भी कहा कि हो सकता है कि पाटिल मंत्री बनने की इच्छा रखते हों, परंतु उन्हें विधानसभा की अध्यक्षता की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने पूर्व स्पीकर यू.टी. खादर के कार्यकाल का हवाला देते हुए पाटिल से विधानसभा की बैठकें समय पर बुलाने का आग्रह किया।

विधान परिषद चुनाव: सलीम अहमद की जीत और विवाद

विधान परिषद के चेयरमैन पद के चुनाव में सलीम अहमद को 38 मत मिले, जबकि एनडीए उम्मीदवार पी.एच. पुजार को 30 मत — यानी आठ मतों का अंतर। चुनाव के दौरान सत्ताधारी कांग्रेस और एनडीए सदस्यों के बीच तीखी बहस भी हुई।

विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी ने सलीम अहमद को बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र में आपसी सम्मान और राजनीतिक मतभेद साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने नए चेयरमैन से पार्टी, जाति और धर्म से ऊपर उठकर परिषद के सभी सदस्यों को न्याय दिलाने की अपील की।

नारायणस्वामी ने यह भी कहा कि यदि एआईसीसी ने पार्टी के लेटरहेड के बजाय केपीसीसी अध्यक्ष को उम्मीदवारों की सूची भेजी होती, तो विपक्ष को कोई आपत्ति नहीं होती। गौरतलब है कि BJP सीनियर एमएलसी एन. रविकुमार ने सवाल उठाया कि क्या पूर्व चेयरमैन बसवराज होरट्टी को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करना संवैधानिक रूप से उचित था।

कार्यभार हस्तांतरण और विवाद

सलीम अहमद के निर्वाचन के बाद प्रो-टेम स्पीकर पुट्टन्ना ने विधान परिषद का कार्यभार उन्हें सौंपा। औपचारिक हस्तांतरण समारोह में सदन के नेता और मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया, केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद, विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

इस दौरान BJP सदस्य केशवप्रसाद ने आपत्ति जताई कि सलीम अहमद को चेयर तक ले जाते समय महिला नेताओं की अनुपस्थिति थी और यह व्यवस्था पूरी तरह पुरुषों के वर्चस्व वाली रही। यह टिप्पणी सदन में चर्चा का विषय बनी।

आगे की राह

जी.एस. पाटिल और सलीम अहमद के निर्वाचन के साथ कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों को नए पीठासीन अधिकारी मिल गए हैं। हालांकि, उम्मीदवारों की घोषणा की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के सवाल अभी भी बने हुए हैं। यह देखना होगा कि नए पीठासीन अधिकारी विपक्ष की आशंकाओं को दूर करते हुए सदनों की स्वतंत्र और निष्पक्ष कार्यवाही सुनिश्चित कर पाते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे लेकर BJP का बहिष्कार यह दर्शाता है कि कर्नाटक में सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद की खाई गहरी होती जा रही है। स्पीकर और चेयरमैन के पद परंपरागत रूप से सर्वदलीय सहमति से भरे जाते रहे हैं — एकतरफा चुनाव इस परंपरा को कमज़ोर करता है। असली परीक्षा यह है कि जी.एस. पाटिल और सलीम अहमद विपक्ष की आशंकाओं को आचरण से दूर कर पाते हैं या नहीं — क्योंकि पद की विश्वसनीयता घोषणा से नहीं, कार्यवाही से बनती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी.एस. पाटिल कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर कैसे बने?
14 अगस्त 2026 को भाजपा के बहिष्कार के बीच कांग्रेस विधायक जी.एस. पाटिल को विपक्ष की अनुपस्थिति में कर्नाटक विधानसभा का नया स्पीकर निर्वाचित किया गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पार्टी लेटरहेड पर उम्मीदवारी घोषित कर संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाई।
सलीम अहमद विधान परिषद के चेयरमैन कैसे बने?
कांग्रेस एमएलसी सलीम अहमद ने 14 अगस्त 2026 को हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार पी.एच. पुजार को 38 बनाम 30 मतों से — यानी आठ मतों के अंतर से — पराजित कर विधान परिषद का चेयरमैन पद जीता।
BJP ने विधानसभा स्पीकर चुनाव का बहिष्कार क्यों किया?
भाजपा का आरोप था कि कांग्रेस ने पार्टी के लेटरहेड पर जी.एस. पाटिल की उम्मीदवारी की घोषणा करके एक संवैधानिक पद की गरिमा को कम किया। विपक्ष का तर्क था कि इस कदम ने स्पीकर के चुनाव को महज एक औपचारिकता बना दिया।
पूर्व विधान परिषद चेयरमैन बसवराज होरट्टी के इस्तीफे पर विवाद क्यों है?
विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि पूर्व चेयरमैन बसवराज होरट्टी को कांग्रेस सरकार के दबाव में पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। BJP सीनियर एमएलसी एन. रविकुमार ने इसे संवैधानिक रूप से अनुचित बताया, हालांकि प्रो-टेम स्पीकर पुट्टन्ना ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान इस पर चर्चा से इनकार किया।
नए स्पीकर और चेयरमैन से विपक्ष की क्या अपेक्षाएँ हैं?
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने जी.एस. पाटिल से पद की स्वतंत्रता और गरिमा बनाए रखने, विधानसभा की बैठकें समय पर बुलाने और संविधान को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया। विधान परिषद में चलावादी नारायणस्वामी ने सलीम अहमद से पार्टी, जाति और धर्म से ऊपर उठकर सभी सदस्यों को न्याय दिलाने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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